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अविमुक्तेश्वरानंद के ख़िलाफ़ उतरे शंकराचार्य प्रज्ञानंद महाराज, कुंभ से बाहर निकालने की मांग

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को योगी सरकार के ख़िलाफ़ बोलना. सीएम योगी का इस्तीफ़ा मांगना महंगा पड़ गया. अब दूसरे शंकराचार्यों ने अविमुक्तेश्वरानंद के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है. ना सिर्फ़ अविमुक्तेश्वरानंद को हिंदू धर्म से बाहर करने की मांग उठ रही है.. बल्कि उन्हें मुस्लिम धर्म अपनाकर मौलाना बनने की नसीहत तक दी जा रही है

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महाकुंभ भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत पर बौखलाना। सीएम योगी का इस्तीफ़ा मांगते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाना शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को महंगा पड़ गया। क्योंकि अब ना सिर्फ़ उनका ख़ुदका पद दांव पर लग गया है। उन्हें कुंभ से बाहर भगाने की माँग भी उठने लगी। इसी के साथ साथ संतों ने अब जो कदम उठाया है उससे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का सिर की चकरा जाएगा। ग़ुस्से में भड़के संतों ने अब माँग रख दी है। कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अब किसी भी मस्जिद का मौलना मौलवी बना देना चाहिए।सनातन धर्म का अधिकार उनके छीन लेना चाहिए।भड़के एक संत ने कहा 


"वो सनातन धर्म में रहने लायक़ व्यक्ति नहीं है उसे किसी मस्जिद का मौलवी बना देना चाहिए या फिर सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कहकर ईसाईयत में कोई पद दिलवा दें उनको।उसी के लायक़ है वो। यहां कुंभ में रहने लायक़ नहीं है यहां अमृत वृष्टि हुई है यहां ज्ञान अमृत बांटना चाहिए। बस यहां चौबीस घंटे मीडिया को लेकर बैठे हुए हैं। जप तप करने के लिए ये भूमि है। यहां साधना आराधना करने के लिए लोग आए हैं। लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद जैसे लोग सिर्फ़ यहां मीडिया को इकट्ठा करके रील बनाने, फेसबुक पर एक्टिव रहने के लिए आए है आईटी के माध्यम से अपना प्रचार प्रसार करने में लगे हुए हैं जो व्यक्ति फ़र्ज़ी है जो व्यक्ति अप्रमाणित है वो अपनी प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए क्या करेगा उसके पास में ध्यान होता ज्ञान होता उसको बांटता उसके पास में पाखंड है तो वो पाखंड बांट रहा है इसी पाखंड और मीडिया का सहारा लेकर वो सनातन की धारा को रोकने में लगा हुआ है।

चारों तरफ़ से अविमुक्तेश्वरानंद अब बुरी तरह फंस गए हैं। क्योंकि एक तरफ उनके ही शिविर में उनके ख़िलाफ़ बवाल मच गया है। उनके बटुक दो गुटों में बंट चुके हैं। तो दूसरी तरफ़ अविमुक्तेश्वरानंद को कुंभ से बाहर निकालने की भी तैयारी चल रही है। क्योंकि आरोप यही लगाए जा रहे हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद राजनीतिक पार्टियों की सह पर योगी के ख़िलाफ़ अपनी सियासी दुकान चलाने काम पर बैठे हैं। यही वजह है कि जब कुंभ में घटना हुई। तो एक 24 घंटे तक शंकराचार्य कुछ नहीं बोले।लेकिन जैसे ही कांग्रेस से लेकर सपा ने माहौल बनाया। आकाओं ने भड़काया। योगी आदित्यनाथ की कुंभ की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाया। वैसे ही मोर्चा संभालते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भी मैदान में कूद आए। तुरंत अखिलेश-कांग्रेस के राग में राग अलापते हुए योगी के इस्तीफ़े की माँग कर डाली। मीडिया का माइक थामने ही इतना भड़के इतना भड़के शब्द कम पड़ गए। लेकिन योगी के ख़िलाफ़ भड़कना कम नहीं हुआ। क्योंकि पता था। बोलेंगे नहीं। तो कैसे अखिलेश और कांग्रेस को एजेंडे को कामयाब कर पाएँगे। ये बात हम नहीं बल्कि ये बात शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के ट्वीट बोल रहे हैं। दरअसल जैसे ही अविमुक्तेश्वरानंद की वीडियो सोशल मीडिया पर योगी के ख़िलाफ़ बोलते हुए वीडियो वायरल हुई। तुरंत सपा ने उसे अपने ट्वीटर हैंडल से साझा करते हुए उनके बयान पर सहमति जताई।

सीएम योगी के खासमखास लोग और भाजपा का आईटी सेल आदरणीय श्री शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं ,उनका अपमान कर रहे हैं सनातन परंपरा के सर्वोच्च ध्वजवाहक प्रख्यात संत एवं सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्माधिकारी आदरणीय श्री अविमुक्तेश्वरानंद के साथ भाजपा योगी सरकार का यह क्रूर व्यवहार बेहद शर्मनाक बेहद निंदनीय कृत्य है।

तो ये कहना गलत नहीं होगा कि योगी विरोधी शक्तियों के साथ मिलकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद योगी के खिलाफ कुंभ के मैदान ने जंग छेड़ रहे हैं ताकी उनकी कुर्सी हिला सके। लेकिन देखिये समय का पहिया ऐसा घूमा की नौबत शंकराचार्य की ही कुर्सी हिलने की आ गई है।क्योंकि कुंभ के ही सभी अखाड़ों और साधु संतों ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी पद के खिलाफ जांच बैठाने की मांग कर डाली। क्योंकि अविमुक्तेश्वरानंद पार्टियों के एजेंट बनकर कुंभ में अशांति फैलाने की कोशिश में लगे हुए हैं। योगी को कैसे पूरी तरह बदनाम किया जाए। मौके ढूंढ रहे हैं.. लेकिन अब सारे मौक़े अविमुक्तेश्वरानंद की कुर्सी। उनके धर्म के लिए काल बनते दिखाए दे रहे हैं। क्योंकि अब साधु संतों ने उन्हें ना सिर्फ़ कुंभ से खदेड़ने बल्कि हिंदू धर्म से बाहर करने की माँग उठा डाली है। 
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