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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अब मोदी सरकार को दिया 33 दिनों का अल्टीमेटम, जानिए पूरा मामला ?

मुख्यमंत्री योगी के बाद अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने 33 दिनों का सीधा अल्टीमेटम दिया है।

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे आस्था के सबसे बड़े मेले महाकुंभ में पहुंचे वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 45 करोड़ के पार जा चुकी है। त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाने वाले ज़्यादातर श्रद्धालु मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के सरकार द्वार की गई व्यवस्थाओं को लेकर प्रशंसा कर रहे है तो वही दूसरी तरफ कई ऐसे विपक्ष के लोग और कुछ साधु-संत है जो बार-बार कमियों को ढूंढ़ते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ का इस्तीफा मांग रहे है। उन्ही में से एक नाम है ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी का। जिन्होंने मुख्यमंत्री योगी के बाद अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर 33 दिनों का सीधा अल्टीमेटम दिया है। 


17 मार्च तक समय सरकार के पास

महाकुंभ नगर क्षेत्र के सेक्टर 19 स्थित ज्योतिषपीठ के पंडाल में मंगलवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा गाय के लिए भले ही हमारे चिथड़े उड़ जाए फिर भी हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और कहते रहेंगे कि गाय हमारी राष्ट्रमाता है। उन्होंने कहा गाय के शरीर में 33 कोटि देवी देवताओं का वास है हम पिछले डेढ़ साल से गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं अब हमने निर्णय किया है कि माघी पूर्णिमा के अगले दिन से हम 33 दिनों की यात्रा निकालेंगे। यह 33 दिन की यात्रा 17 मार्च को दिल्ली जाकर पूर्ण होगी। केंद्र सरकार के पास निर्णय करने के लिए 33 दिनों का समय है यदि वह इन 33 दिनों में कोई निर्णय नहीं करती तो हम 17 मार्च को शाम पांच बजे के बाद कोई कड़ा निर्णय करेंगे। हमारी सरकार से मांग है कि गाय को पशु की श्रेणी से हटाकर राष्ट्र माता घोषित किया जाए और गोहत्या को अपराध माना जाए।


गाय कि लिए निकलेगी पदयात्रा

प्रेसवार्ता के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि गाय को माता के रूप में घोषित करने के लिए एक पदयात्रा महाकुंभ नगर से राजधानी दिल्ली के लिए निकलेगी। जो 33 दिनों में विभिन्न प्रांतो से होते हुए 17 मार्च को दिल्ली पहुंचेगी। इस यात्रा का मकसद कोई राजनीति नहीं बल्कि सिर्फ़ हिंदुओं को और सनातनियों को जागरूक करना.।गाय को गौ माता के रूप में घोषित करने के लिए जनजागरण करना है। 


बताते चले कि गाय को सम्मान और उसके हक़ के लिए शंकराचार्य काम तो सही कर रहे है लेकिन उनका यह कदम और इस तरह से मांग करने का समय ठीक नही माना जा रहा है। इसके पीछे की वजह यह है कि अभी हाल के दिनों में मौनी अमावस्या के दौरान महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद जिस तरह से स्वामी अविमुक्तेश्वारनंद ने सीधे-सीधे योगी आदित्यानाथ पर बिफरें थे। इसके बाद कई अखाड़ों ने अविमुक्तेशवरानंद की निंदा की थी। ख़ैर मोदी योगी को घेरते हुए अब शंकराचार्य राहुल गांधी के खिलाफ ही बोल पड़े हैं। गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करते करते कुंभ में धर्म संसद के दौरान शंकराचार्य ने फिर से दो बड़े प्रस्ताव पारित किया है। एक प्रस्ताव में अमेरिकी प्रशासन के हिंदू विरोधी कदमों की कड़ी निंदा  और दूसरा मनुस्मृति के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में लोकसभा नमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्कार करने का प्रस्ताव पारित किया गया। 
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