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कांग्रेसी कहे जाने पर भड़के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देखिये क्या कहा ?

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धर्म ज्ञान से ज्यादा सियासी बयान की वजह से चर्चाओं में बने रहते हैं, कभी मोदी सरकार पर निशाना साधना तो कभी योगी सरकार को निशाने पर लेना, ऐसा लगता है उनका काम हो गया है, इसीलिये उन पर भी कांग्रेसी होने के आरोप लगते रहे हैं जिस पर शंकराचार्य ने दिया गजब जवाब !

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जब तक स्वरूपानंद सरस्वती ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य रहे। उन पर कांग्रेस समर्थक होने के आरोप लगते रहे। गांधी परिवार उनसे आशीर्वाद लेता रहा। और जब उनके निधन के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की गद्दी संभाली तो। वो भी अपने गुरु स्वरूपानंद सरस्वती के नक्शेकदम पर चलते नजर आए। और धर्म ज्ञान से ज्यादा सियासी बयान की वजह से चर्चाओं में बने रहते हैं।कभी मोदी सरकार पर निशाना साधना तो। कभी योगी सरकार को निशाने पर लेना।ऐसा लगता है उनका काम हो गया है। इसीलिये उन पर भी कांग्रेसी होने के आरोप लगते रहे हैं। तो वहीं अब तो खुद शंकराचार्य भी कहने लगे हैं कि अगर सच कहना कांग्रेसी है तो मैं कांग्रेस को चाहता हूं।


दरअसल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उनके बयानों की वजह से बीजेपी विरोधी माना जाता रहा है। यही वजह है कि 29 जनवरी यानि मौनी अमावस्या के दिन जब महाकुंभ में हादसा हुआ तो विपक्षी नेताओं से पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ही सीएम योगी का इस्तीफा मांगना शुरू कर दिया। और यहां तक कहने लगे कि 2027 में योगी आदित्यनाथ को नहीं जिताएंगे। ऐसे ऐसे बयानों की वजह से ही शंकराचार्य को कभी योगी विरोधी बताया जाता है तो कभी कांग्रेसी बता दिया जाता है। जिस पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस कदर भड़क गये कि यहां तक कह दिया कि। "कांग्रेस की तरफ से बैटिंग करना खराब है भाजपा की तरह से बैटिंग करना खराब नहीं है, यही कांग्रेस है जिसकी बड़ी प्रशंसा होती थी जिसने आजादी की लड़ाई में भाग लिया, यही कांग्रेस है जिसे जनता इतने सालों तक सत्ता में भेजती रही आज कांग्रेसी होना गाली हो गई ?

कांग्रेस का बखान करते करते। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सफाई दी और कहा कि। "हम कांग्रेसी नहीं हैं, लेकिन आप हमें कांग्रेसी भी मान लो तो क्या कांग्रेसी होना गाली है ? बहुत से कांग्रेसी हैं देश में जनता उनको भी चुनती है, बहुत से भाजपाई हैं जनता उनको भी चुनती है, कांग्रेसी होने को गाली क्यों समझते हैं, कांग्रेसी होना भी गर्व है और भाजपाई होना भी गर्व है, दोनों इस देश की पार्टियां हैं, दोनों देश की सेवा में लगी हैं, कांग्रेसी है, कांग्रेसी है कह कर किसी को क्यों चिढ़ाते हो ? अरे कांग्रेसी होना भी गर्व का विषय है भाजपाई होना भी गर्व का विषय है, दोनों देश की बेहतरी के लिए अपने-अपने तरीके से काम कर रही है, जो सच कह रहा है वो कांग्रेसी है तो हम ऐसी कांग्रेस को चाहते हैं, अगर सच कहना कांग्रेसी होना है तो हम कांग्रेस को चाहते हैं "

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना सही है। किसी का कांग्रेसी होना या भाजपाई होना कोई गलत नहीं है। लेकिन समस्या वहां हो जाती है। जब कोई शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च सनातनी पद पर बैठा हो और कांग्रेस या भाजपा का पक्ष लेता हो। भला "एक सनातनी कैसे उस कांग्रेस का पक्ष ले सकता है जिसने दशकों तक देश पर राज किया लेकिन अयोध्या में कभी राम मंदिर नहीं बनवा सकी ?एक सनातनी कैसे उस कांग्रेस का पक्ष ले सकता है जिसने हिंदुओं को अपना ही मंदिर वापस लेने से रोकने के लिए वर्शिप एक्ट जैसा कानून लागू किया ?


लेकिन बात जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की आती है। तो शायद उन्हें इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। इसीलिये वो कहते हैं कि कांग्रेसी होना भी गर्व की बात है।यही वजह है कि उनके ये बयान कांग्रेस नेताओं को भी खूब पसंद आ रहा है। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने तो वीडियो शेयर करते हुए कह दिया। वाह क्या बात है, शंकराचार्य जी ने सही बात कही। तो वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी शंकराचार्य के बयान को शेयर किया है। इसी बात से समझ सकते हैं कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर कांग्रेसी होने के आरोप क्यों लगते हैं। जिस पर सफाई देते हुए शंकराचार्य ने जिस तरह से कहा है कि कांग्रेसी होना भी गर्व है और भाजपाई होना भी गर्व है। अगर सच कहना कांग्रेसी होना है तो हम कांग्रेसी हैं। 
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