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CM Yogi का रौद्र रूप देख Shah की नींद उड़ी, दौड़े दौड़े पहुंचे डिप्टी CM

हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने एक अहम बैठक की जिसमें यूपी के सीएम और डिप्टी सीएम मौजूद रहे। इस मीटिंग में हार पर तो मंथन हुआ ही, साथ ही कुछ ऐसे फ़ैसले योगी की तरफ़ से लिए गए जिनसे हड़कंप मच गया।

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हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन कैसा रहा ये किसी से छिपा नहीं है, ख़ासकर अगर बात की जाए यूपी की तो यहां तो बीजेपी को ज़बरदस्त झटका लगा। तीसरी बार सरकार भले ही NDA की बन गई हो लेकिन बीजेपी का मंथन अभी भी जारी है। बार बार मीटिंगों में उन पहलुओं का पता लगाने की कोशिश की जा रही है जिस वजह से 80 में से 33 सीटें बीजेपी के खाते में गई और बाकि सपा और कांग्रेस के। इसी कड़ी में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष के नेतृत्व में एक बैठक लखनऊ में बुलाई गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदिकत्यनाथ के साथ साथ दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या और बृजेश पाठक भी मौजूद रहे।

इस बैठक में बीजेपी के ख़राब प्रदर्शन को लेकर तो चर्चा हुई ही, साथ ही आगे की रणनीति पर भी फ़ोकस किया गया। बताया जा रहा है कि बीएल संतोष ने दो बैठकें की जिनमें से एक में सिर्फ़ सीएम, दोनो डिप्टी सीएम, प्रदेश महासचिव धर्मपाल सिंह और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी मौजूद थे। इस बैठक में 10 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों पर भी चर्चा की गई। इसी के साथ ये भी तय किया गया कि कैसे इन 10 की 10 सीटों पर जीत हासिल की जाए।

इस बैठक में ये भी फ़ैसला लिया गया कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी को हार मिली उन विधायकों पर एक्शन लिया जाए, मसल 2027 में उन सबके टिकट काटे जाएं। जो अपने क्षेत्र में बीजेपी को जीत ही नहीं दिला पाए उनको विधायक का टिकट अगली बार ना दिया जाए इसको लेकर मंथन हुआ है, सूत्रों की माने तो ये भी तय हुआ है कि कोई भी इस फ़ैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

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आपको याद होगा जिस वक़्त लोकसभा चुनावों के लिए यूपी के लिए टिकट फ़ाइनल होने थे उस वक़्त योगी ने 30 नामों की एक लिस्ट बनाकर भेजी थी जिसमें से केंद्र ने 24 को रिजेक्ट कर दिया था। ख़बरें थी कि योगी बृजभूषण, अजय मिश्रा टेनी समेत कई विवादिता नामों को इस बार टिकट नहीं दिलवाना चाहते थे लेकिन केंद्र के आगे उनकी एक नहीं चली, नतीजा सबने देखा…अब 27 के चुनावों में योगी कोई If and but नहीं चाहते और ना ही किसी का हस्तक्षेप।

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ख़बरों की मानें तो इस बैठक में बीजेपी के भीतरघात की भी चर्चा हुई। दो नेताओं की आपस की लड़ाई का असर कैसे सीटों पर पड़ा, उसे लेकर भी मंथन हुआ। ख़ासकर वाराणसी को लेकर चर्चा हुई। नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में ऐसा क्या हुआ कि जीत का अंतर सिर्फ़ 1.5 लाख रहा, ये मुद्दा ज़ोर शोर से उठा।बैठक में मौजूद लोगों ने बताया की अबकी बार 400 पार का नारा पार्टी के लिए उलटा साबित हुआ। आपको बता दें अभी तो बैठकों की शुरुआत हुई है, अब ऐसे ही मीटींग होंगी जिनमें ग्राउंड ज़ीरो पर बीजेपी को ख़ुद को फिर से मज़बूत करेगी

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14 जुलाई को होने वाली प्रदेश कार्यसमिती की बैठक की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बहरहाल, इतना तो तय है कि इस बार अपने मन की करने वाले विधायकों पर तगड़ा एक्शन होने जा रहा है।

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