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सेशन कोर्ट ने सुन ली सपा नेता आज़म खान की अर्ज़ी, अब 27 मामलों का एक साथ होगा ट्रायल

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म खान की एक अर्ज़ी को सेशन कोर्ट ने मंज़ूरी दे दी है, दरअसल, आज़म खान की तरफ़ से सेशन कोर्ट में रिवीजन एप्लीकेशन दाखिल किया गया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म खान की एक अर्ज़ी को सेशन कोर्ट ने मंज़ूरी दे दी है, दरअसल, आज़म खान की तरफ़ से सेशन कोर्ट में रिवीजन एप्लीकेशन दाखिल किया गया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट की मंज़ूरी के बाद उनसे जुड़े 27 मुकदमों का मैजिस्ट्रेट कोर्ट में जॉइंट ट्रायल होगा। ये मुकदमे जौहर यूनिवर्सिटी में किसानों द्वारा दर्ज कराए गए थे और इनकी एक साथ सुनवाई के लिए निगरानी याचिका कोर्ट में दाखिल की गई थी। 


सजम खान से जुड़े मामलों को लेकर अभियोजन अधिकारी सीमा राणा ने बताया कि थाना अजीम नगर से 27 किसानों ने कुछ मामले पंजीकृत कराए गए थे। जिसमें उन्होंने अवर न्यायालय में एक एप्लीकेशन दी थी। जिसमें कहा गया था कि इन मामलों की सुनवाई इकठ्ठा की जाए। अवर न्यायालय द्वारा उनकी एप्लीकेशन खारिज की गई। बचाव पक्ष के द्वारा एक सेशन कोर्ट में रिवीजन किया गया है, जिसमें आज कहा गया है कि इनके मामले एक नहीं होंगे, लेकिन ट्रायल एक साथ हो सकता है। उनकी एप्लीकेशन को कोर्ट ने स्वीकार किया है। 27 मामले में निर्णय एक साथ आयेंगे। अवर न्यायालय एक साथ ट्रायल करेंगे।


सपा नेता के वक़ील ने डाली थी अर्ज़ी

आजम खान के वकील ने मांग की थी कि 27 किसानों के मामलों को एक कर दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने इनकार करते हुए कहा कि सभी मामले अलग-अलग चलेंगे, ट्रायल एक साथ हो सकते हैं। जिससे गवाह और अन्य लोगों का समय बचेगा। ज्ञात हो कि सपा के वरिष्ठ आजम खान पर यह 27 मामले किसानों की जमीन कब्जाने से जुड़े हैं। सभी मुकदमे अजीमनगर थाने में दर्ज कराए गए थे। सभी मामलों को एक साथ किए जाने के लिए बचाव पक्ष द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसे निचली अदालत ने निरस्त कर दिया था। इस मामले में अब विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष द्वारा निगरानी याचिका दायर की गई थी। इसकी सुनवाई में बचाव पक्ष द्वारा विस्तृत रूप से बहस की गई थी। अदालत में मंगलवार को पत्रावली निर्णय पर लगी थी। अधिवक्ता ने बताया कि रिवीजन में दर्शाए गए आधारों पर अदालत ने रिवीजन स्वीकार कर लिया है। निचली अदालत को आदेश दिए हैं कि सभी संबंधित मुकदमों का ज्वाइंट ट्रायल किया जा सकता है।
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