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MP के धार भोजशाला विवाद पर SC का ऐतिहासिक फैसला, नमाज और पूजा होंगे साथ-साथ, सुरक्षा के व्यापक प्रबंध के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने MP के धार स्थित भोजशाला विवाद पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि पूजा भी होगी और नमाज भी अदा की जाएगी.
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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. लंबे समय से चले आ रहे इस मामले में दायर एक नई याचिका पर सुनवाई करते हुए SC ने कहा है कि पूजा भी होगी और नमाज भी अदा की जाएगी. अदालत ने वसंत पंचमी पर भोजशाला में सरस्वती पूजा और नमाज पढ़ने के लिए अलग-अलग टाइमिंग की मंजूरी दी है और प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम करने के आदेश दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट में दायर याचिका में हिंदू पक्ष ने 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को पड़ने वाले वसंत पंचमी को भोजशाला में केवल हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की अनुमति देने के अलावा जुम्मे के दिन इस परिसर में मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोकने की मांग की थी. वहीं, सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया, ताकि धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो सके.
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कब-कब पूजा और नमाज?
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SC ने हिंदू पक्ष को बसंत पंचमी के दिन पूरे दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) पारंपरिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी है. वहीं नमाज के समय (1-3 बजे) स्थान उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है.
प्रशासन के लिए भी निर्देश!
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर में बैरिकेडिंग और पंडाल लगाकर अलग-अलग स्थान उपलब्ध कराए जाएं, लेकिन हवन कुंड और नजाम अदा करने आने वाले लोगों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार की व्यवस्था करनी होगी.
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनवाई की. इस याचिका में हिंदू संगठन ने भोजशाला को हिंदू मंदिर मानते हुए सरस्वती पूजा के लिए विशेष अनुमति की मांगी थी.
कोर्ट में किसने क्या कहा:
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कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने पहले की व्यवस्थाओं के अनुसार कानून-व्यवस्था के इंतजाम किए जा सकते हैं.
मस्जिद कमेटी के वकील क्या बोले?
वहीं मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने अपनी दलील दी कि इससे पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार यानी कि जुम्मे की नमाज के दिन पड़ी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हिंदू पक्ष को तीन घंटे तक पूजा की अनुमति दी थी. उन्होंने इस दौरा कोर्ट से अपील की कि, "ऐसा ही दोबारा होने दिया जाए... खुर्शीद ने आगे कहा कि जुमा की नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक होती है, हम 3 बजे तक जगह खाली कर देंगे. हम न्यूनतम समय मांग रहे हैं और खुशी से समायोजन करने को तैयार हैं. पूजा बाहर भी जारी रह सकती है."
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ASI के वकील क्या बोले?
ASI की ओर से पेश वकील ने बताया कि पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है और वे हिंदू पक्ष को अनुमति दे सकते हैं.
हिंदू पक्ष के वकील क्या बोले?
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वहीं हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने जोर देकर कहा कि पूजा-अनुष्ठान सूर्योदय से सूर्यास्त तक होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नमाज शाम 5 बजे कर ली जाए तो हिंदू पक्ष पूजा पूरी कर 5 बजे जगह खाली कर देगा.