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सैटेलाइट, मिसाइल, ऑन ग्राउंड एक्सपर्ट्स...PAK की नापाक हरकत में सहभागी था चीन, जयशंकर ने खोली पोल

भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को लेकर रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं. भारत पर पाकिस्तान के नापाक हमले में पहले तुर्किए की भूमिका सामने आई थी और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर के एक बयान ने चीन को लेकर भी बड़ा खुलासा कर दिया है.

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भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को लेकर  रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं. भारत पर पाकिस्तान के नापाक हमले के में पहले तुर्किए की भूमिका सामने आई थी और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर के एक बयान ने चीन को लेकर भी बड़ा खुलासा कर दिया है. उन्होंने कहा भारत पर हमले के दौरान पाकिस्तानी सेना की मदद चीन की सैटेलाइट ने की थी. लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम के आगे चीन की मदद से पाकिस्तान सेना की हर कोशिश नाकाम हुई. 

पाकिस्तान पहुंचे थे चीनी एक्सपर्ट

विदेश मंत्री स जयशंकर के मुताबिक, "भारत की सेना द्वारा पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तानियों की मदद करने के लिए चीन सबसे पहले आगे आया." पाकिस्तान में चीन की मिसाइलों के साथ चीनी एक्सपर्ट भी मौजूद थे, यही नहीं चीनी सैटेलाइट भी पाकिस्तान को ड्रोन हमला करने में मदद कर रही थी. इसी के चलते पाकिस्तान ने इतने कम समय में भारत के कई बड़े शहरों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल दागे लेकिन भारतीय सेना की सतर्कता और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम ने ना सिर्फ पाकिस्तान के इन प्रयासों को हवा में ही फेल किया बल्कि पूरी दुनिया को भी यह दिखा दिया कि चीन का असली चरित्र क्या है और किस तरह चीन आतंकवाद के मददगार और पनाहगार पाकिस्तान को हर संभव मदद दे रहा है. इसके अलावा विदेश मंत्री ने यह भी साफ कर दिया है कि 'पाकिस्तान के साथ अब बातचीत होगी तो सिर्फ और सिर्फ PoK पर वार्ता होगी.'

पाक को पहले ही दिया गया था संदेश: एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर स्पष्ट किया है कि "हमारा निशाना सिर्फ पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के लिए है ना कि उसकी सेना पर, लेकिन पाकिस्तान ने हमारी सलाह को नजरअंदाज किया." 10 मई की सुबह पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ जिसका खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से हो गया है.   द्विपक्षीय वार्ता सिर्फ आतंकवाद पर होगी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा  "पाकिस्तान को अब अपने यहां आतंकवाद की फैक्ट्री पर ताला लगाना होगा. उसे भारत को आतंकियों की सूची सौंपनी होगी. भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत का मुद्दा सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद ही होगा. 

सिंधु जल संधि पर भारत का क्या है रुख?

पहलगाम हमले के बाद भारत की डिप्लोमेटिक स्ट्राइक में सिंधु जल समझौते को स्थगित करना सबसे बड़ा फैसला था. सीजफायर के बाद अब इस फैसले पर पुनर्विचार करने के सवालों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा "जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह नहीं रुकता है तब यह समझौता स्थगित रहेगा. इसके अलावा एस जयशंकर ने यह भी कहा कि अगर कश्मीर को लेकर कोई बातचीत होगी तो वो पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर होगी. हम इस चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है. 

बताते चलें कि पहलगाम आतंकी 22 अप्रैल को हुआ था. इस दौरान आतंकियों ने 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे. इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत एयर स्ट्राइक करते हुए पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइलों की बरसात की थी. भारत की इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच लगभग चार दिनों तक सैन्य संघर्ष चला बाद में पाकिस्तान के अनुरोध पर अपनी शर्तों के साथ भारत सीजफायर के लिए तैयार हुआ.
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