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संजय निरुपम ने कहा- नक्सलवाद पर नियंत्रण, देश का विकास संविधान के दायरे में सुनिश्चित हो रहा है

संजय निरुपम ने कहा कि देश नक्सल मुक्त की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि नक्सल विरोधी प्रयास और विकास कार्य संविधान के दायरे में सुनिश्चित किए जा रहे हैं, जिससे देश की सुरक्षा और समग्र विकास दोनों को बल मिल रहा है.

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शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी राय रखी है. आईएएनएस को दिए विशेष इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नक्सलवाद उन्मूलन पर बयान की सराहना की, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर तीखा प्रहार किया और निजामुद्दीन दरगाह में जश्न-ए-चरागा कार्यक्रम को लेकर छिड़े विवाद पर सद्भाव का संदेश दिया.

निरुपम ने कहा कि सरकार के प्रयासों से देश आतंकवाद के आखिरी चरण में पहुंच गया है, जबकि विपक्षी दलों की राजनीति गुंडागर्दी को बढ़ावा दे रही है. 

'11 वर्षों का सतत प्रयास सफल'

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संजय निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे पर लक्ष्य निर्धारित किया था. निरुपम ने कहा, "देश को नक्सलवादी आतंकवाद को आखिरी पड़ाव पर पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार बधाई की पात्र है. 2014 में जब मोदी सरकार बनी थी, तब लगभग 125 जिले नक्सल प्रभावित थे. 11 वर्षों के अथक प्रयासों से आज नक्सलवाद में भारी कमी आई है. मार्च 2026 तक भारत को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य सराहनीय है."

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उन्होंने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में हाल ही में सैकड़ों नक्सलियों के आत्मसमर्पण का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार संविधान की मर्यादा में रहकर विकास और शांति स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है. निरुपम ने इसे मोदी-शाह की नीतियों की जीत बताया, जो आंतरिक सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं.

लालू प्रसाद पर तीखा प्रहार

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निरुपम ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर सीधी चोट की. उन्होंने कहा, "लालू यादव के करीबी और सिवान-छपरा क्षेत्र में कभी आतंक का पर्याय रहे कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन ने बिहार में भय और हिंसा का राज कायम किया था. अब उसी शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब को RJD ने रघुनाथपुर विधानसभा सीट से टिकट दे दिया है. ओसामा अपने पिता जैसी ही आक्रामक भाषा और रवैया अपनाता है. " निरुपम ने चेतावनी दी कि यदि ऐसे अपराधी मानसिकता वाले लोगों को मौका मिला, तो बिहार में फिर से जंगल राज लौट आएगा.

उन्होंने छपरा और सिवान के मतदाताओं से अपील की, "ऐसे उम्मीदवारों को सिरे से खारिज करें. कानून व्यवस्था बनाए रखने में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है. बिहार को गुंडागर्दी से मुक्त रखें." यह बयान बिहार विधानसभा चुनावों के संदर्भ में RJD की रणनीति पर सवाल उठाता है.

कट्टरपंथ समाज को बांटने की साजिश

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निजामुद्दीन दरगाह में जश्न-ए-चरागा  कार्यक्रम को लेकर RSS की मुस्लिम विंग और दरगाह कमेटी के बीच छिड़े विवाद पर निरुपम ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा, "निजामुद्दीन औलिया की दरगाह सदियों से हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक रही है. यह लगभग 700 वर्ष पुराना स्थान है, जहां सूफी परंपराओं के तहत सभी धर्मों के लोग आते हैं. सूफी संतों ने हमेशा हिंदू परंपराओं का सम्मान किया और कई मुस्लिम शासकों ने हिंदू ग्रंथों का अनुवाद कर उनके विचारों का प्रचार किया.

 " निरुपम ने विवाद पैदा करने वाले संगठनों को आड़े हाथों लिया, "यदि किसी संगठन द्वारा दरगाह में दीपावली या सद्भाव कार्यक्रम पर आपत्ति की जाती है, तो यह कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और समाज को बांटने की साजिश है. "

उन्होंने अपील की कि ऐसे प्रयासों से दूर रहें और दरगाह की परंपरा को मजबूत करें, जो शांति और भाईचारे का संदेश देती है. निरुपम के ये बयान राजनीतिक बहस को और गर्म कर रहे हैं. शिवसेना ने इन्हें पार्टी की हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा से जोड़ा है, जबकि विपक्ष ने इन्हें चुनावी स्टंट बताया है. आने वाले दिनों में ये मुद्दे और सुर्खियां बटोर सकते हैं.

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