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Sambhal: पुलिस चौकी की जमीन को Waqf की बताने वालों का दावा निकला फर्जी !

संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के बाद मचे बवाल के बीच योगी सरकार अब मस्जिद के ठीक सामने पुलिस चौकी बनवा रही है जिसका विरोध करते हुए ओवैसी बताने लगे कि ये तो वक्फ की जमीन है जिस पर अब्दुल समद नाम के शख्स ने खुद हलफनामा दाखिल कर ओवैसी के एजेंडे की धज्जियां उड़ा दी !

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जिस संभल में विवादित जामा मस्जिद के सर्वे के बाद बवाल शुरु हुआ। वो बवाल अब संभल में खुदाई के साथ साथ नई पुलिस चौकी के निर्माण तक पहुंच गई है। क्योंकि दंगाइयों की हरकतों को देखते हुए योगी सरकार ठीक मस्जिद के सामने जमीन खुदवा कर पुलिस चौकी बनवा रही है।जिससे दंगाई दोबारा दंगा करने के बारे में सोच भी ना सकें। लेकिन सैकड़ों किलोमीटर दूर हैदराबाद में बैठे ओवैसी को इससे भी तकलीफ होने लगी। और कागज दिखाते हुए दावा करने लगे कि ये तो वक्फ की जमीन है। यहां सरकार पुलिस चौकी कैसे बनवा सकती है। यहां तक कि सपाई अखिलेश यादव भी ओवैसी की हां में हां मिलाने लगे। जिस पर एक मुस्लिम ने ही ओवैसी और अखिलेश एजेंडे का पर्दाफाश कर दिया। और योगी सरकार के साथ खड़ा हो गया।


दरअसल संभल की विवादित जामा मस्जिद का जब नवंबर में सर्वे हो रहा था। उस वक्त कुछ दंगाइयों ने बवाल मचा दिया था। जिसके बाद से ही सख्ती दिखा रही योगी सरकार अब मस्जिद के सामने ही जमीन खोद कर पुलिस चौकी बनवा रही है। ये भनक जैसे ही सांसद असदुद्दीन ओवैसी को लगी। वो लगे चीखने चिल्लाने की अरे भाई ये वक्फ की जमीन है। यहां कैसे सरकार पुलिस चौकी बनवा सकती है।यहां तक उन्होंने कुछ कागज भी सोशल मीडिया पर दिखाया। और दावा किया कि यह वक्फ नंबर 39-A, मुरादाबाद है, यह उस जमीन का वक्फनामा है, जिस पर पुलिस चौकी का निर्माण हो रहा है, उत्तर प्रदेश सरकार को कानून का कोई एहतराम नहीं है।

ओवैसी के पीछे पीछे समाजवादी पार्टी भी चल दी और। तीस दिसंबर को समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की ओर से भी संभल जिला प्रशासन को बीस बिंदुओं पर आधारित दस्तावेज सौंपे गये थे। जिसमें बताया गया था कि साल 1929 में अब्दुल समद नाम के शख्स ने अपनी संपत्तियों को वक्फ को दिया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने जब दस्तावेजों की जांच करवाई तो वे फर्जी निकले। यहां तक कि खुद अब्दुल समद के परिजन ने बताया कि जामा मस्जिद के सामने बन रही सत्यव्रत पुलिस चौकी वक्फ की संपत्ति नहीं है।और ना ही चौकी की जमीन से उनका कोई मतलब है। वो तो सिर्फ इस भूमि की देखरेख करते थे। जब उन्हें पता चला कि ये सरकारी जमीन है तो उन्होंने इसकी देखभाल करना छोड़ दिया।

योगी सरकार ने मस्जिद के सामने पुलिस चौकी बनवानी शुरू की तो। ओवैसी और अखिलेश जैसे नेता इसे वक्फ की जमीन बताने लगे लेकिन जिस मुस्लिम शख्स का परिवार इस जमीन की देखरेख कर रहा था। उसने खुद सामने आकर हलफनामा दे दिया कि इस जमीन से उसके परिवार का कोई लेना देना नहीं है। वो तो बस इसकी देखरेख करता था। और पुलिस चौकी बनने से जितनी खुशी लोगों को है उतना ही खुश अब्दुल समद का परिवार भी है। यानि एक झटके में ओवैसी और सपा के वक्फ वाले एजेंडे का पर्दाफाश हो गया और अब अभी भी मस्जिद के सामने पुलिस चौकी का जोरशोर से निर्माण जारी है।

जितनी तेजी से पुलिस चौकी निर्माण का काम हो रहा है उसे देख कर लग रहा है जल्द ही पुलिस चौकी का उद्घाटन भी हो जाएगा। और फिर इसी पुलिस चौकी में बैठने वाली पुलिस जामा मस्जिद के आसपास के गुंडे बदमाशों और दंगाइयों की कमर तोड़ने का काम शुरू करेगी। 
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