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संभल के SP केके बिश्नोई ने लेखपाल को लगाई लताड़, बगलें झाकने लगे अधिकारी !

यूपी के संभल में एक तरफ प्राचीन मंदिर, तीर्थ स्थलों, बावरियों और कुएं को संरक्षित करने का कार्य प्रशासन जोरशोर से कर रहा है. वहीं अब ASI संरक्षित धरोहरों को भी संवारने पर प्रशासन की कवायद तेज हो गई है. शनिवार को कलेक्टर और एसपी ने ASI संरक्षित 500 साल पुराने सौंधन किले का निरीक्षण किया है

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24 नवंबर के दिन हुई हिंसा के बाद संभल में खुदाई लगातार जारी है। सभी 19 कूपों को कब्जा मुक्त करवा लिया गया है, कूपों की खुदाई का काम भी पूरा कर लिया गया है, सभी 68 तीर्थों को खोजने का काम भी लगातार जारी है, ज्यादातर ढूंढ लिए गए है। कुछ अभी बाकी है। और ये काम संभल में लगातार जारी है। करीब दो हफ्तें पहले एक बावड़ी को भी कब्जा मुक्त करवाया गया, उसकी भी खुदाई लगातार जारी है।और ऐसा नहीं की इतने पर ही ये अभियान रुक गया।बल्कि पौराणिक नगरी संभल में लगातार प्राचीन मंदिर, तीर्थ स्थलों, बावरियों और कुएं को संरक्षित करने का कार्य प्रशासन जोरशोर से कर रहा है।जिले में जो ASI की धरोहर है उन्हें पुर्जिवित करने का काम भी तेज कर दिया गया है।और इसी खोज में संभल प्रशासन को एक 500 साल पुराना किला मिला। जिसका 15 बीधा का एरिया बताया जाता है।लेकिन 15 बीधा तो छोडिए, किले के भीतर लोगों ने गोबर का अंबार लगा रखा है। उपले रखे है। मतलब किला बिल्कुल जर्जर हालात में पहुंचा दिया गया।लेकिन जब एसपी और डीएम इसके निरिक्षण के लिए पहुंचे तो वो भड़क गए।लेखपाल से नक्शा देखने को कहा तो लेखपाल के हाथ-पांब भी फूल गए।


जहां डीएम और एसपी पहुंचे थे उसे सौंधन का किला बताया जाता है।बताया जाता है कि किला, मस्जिद और कुएं का निर्माण मुगल शासक शाहजहां के शासनकाल में 1645 ई. में करवाया गया था। शाहजहां की सल्तनत में संभल और मुरादाबाद के गवर्नर रहे रूस्तम खान दक्खनी ने इस किले को बनवाया था। लेकिन बाद में एक हिंदू राजा ने इसे जीत लिया था। यहां हर साल एक मेला भी लगता है।सौंधन का किला अपनी अनोखी नक्काशी और शाही स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। इस किले के निर्माण में बारीक नक्काशी और मजबूत संरचनात्मक डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है।

किले के नाम पर यहां सिर्फ के गेट बचा है, बाकी सब जगह पर लोगों ने अवैध तरीके से कब्जा कर लिया है।हालांकि प्रशासन की तरफ से लोगों को नोटिस भी दिया गया है।लेकिन लोगों का कहना है कि हमारे पास इस जगह की वसीयत है।तो बड़ा सवाल ये भी है कि इस जमीन की वसीयत किन लोगों ने इनके नाम कर दी।लेकिन बड़ी बात ये है कि स्थानिय लोगों का कहना है कि अब हम यहां से कहां जाएंगे। और अगर सरकार हमें रहने के लिए जमीन देती है तो हम इस जमीन को खाली कर देंगे।तो ऐसे में ये भी देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इन लोगों के प्रति क्या रुख अख्तियार करती है। वैसे ऐतिहासिक धरोहरों की अनदेखी संभल में कोई नई बात नहीं है।संभल में अगर कुल ASI की संरक्षित धरोहरों की बात करों तो इनकी संख्या छह बताई जाती है।इन इन सभी को सही तरीके से संरक्षित करने के लिए डीएम राजेंद्र पेंसिया ने एएसआई के अधिकारियों से भी बात की है।और इन धरोहरों का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार करने की बात कही है। अब देखना ये होगा कि प्रशासन कैसे संभव की ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण करता है।लेकिन जिस तरीके से संभल में अधिकारी काम कर रहे है। उनका संदेश साफ है कि अवैध अतिक्रमण जिसने भी किया है, वो खाली कर दें।नहीं तो बुलडोजर से खाली करवा दिया जाएगा।

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