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अखिलेश यादव के आदेश पर संभल जाएगा समाजवादी पार्टी का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने एक प्रतिनिधिमंडल को संभल भेजने का फ़ैसला लिया है। जो स्थानीय दौरा पर अपनी रिपोर्ट पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपेंगे।

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उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा का मामला अब पूरे तरीक़े से सियासी रंग ले चुका है। विपक्ष द्वारा लगातार इस घटना को लेकर योगी सरकार और ज़िला प्रशासन पर प्रहार किए जा रहे है। इसी क्रम में अब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने एक प्रतिनिधिमंडल को संभल भेजने का फ़ैसला लिया है। जो स्थानीय दौरा पर अपनी रिपोर्ट पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के 5 सांसद समेत 15 नेता शामिल है जो संभल जाएँगे। हालाँकि शांति व्यवस्था को कायम बनाने के लिए इन नेताओं के संभल जाने पर फ़िलहाल पुलिस प्रशासन की तरफ़ से रोक लगाया गया है, सूबे की राजधानी लखनऊ में यूपी विधानसभा के नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय के घर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती भी की गई है।  


वही अगर संभल की स्थानीय स्थिति की बात करें तो ज़िला प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार स्थिति को सामान्य किए जाने के लिए हर संभव क़दम उठाए जा रहे है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने भी इस घटना को लेकर दोषियों के ख़िलाफ़सख़्त कारवाई की बात कही गई है। ऐसे में सपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के संभल जाने की जानकारी मिलते ही मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने कहा है कि अभी संभल में बाहर का कोई भी व्यक्ति नहीं जा सकता हैं क्योंकि शांति व्यवस्था को स्थापित कर लिया गया है। ऐसे में अगर कोई राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल आएगा तो फिर से दंगा भड़क सकता है। 
 

अखिलेश यादव के आदेश पर कौन-कौन नेता जाएगा संभल

संभल में घटना सस्थल का निरीक्षण करने और पीड़ितों से मुलाक़ात करने के लिए संभल जाने वाले में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव, सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल, सांसद हरेंद्र मलिक, रुचि वीरा, इकरा हसन, जियाउर्रहमान बर्क और नीरज मौर्य  के अलावा विधायक कमाल अख्तर, रविदास मेहरोत्रा, नवाब इकबाल महमूद और पिंकी सिंह यादव समेत सपा के कुल 15 लोगों को अखिलेश यादव ने संभल भेजने का फ़ैसला किया है। 


वही दूसरी तरफ़ संभल हिंसा की जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यों की टीम भी संभल जाने वाली है। जो हिंसा की असली वजह को जानेगी और लगभग दो महीने में आपनी जाँच को पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। न्यायिक जांच की इस टीम में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज डीके अरोड़ा, IAS अमित मोहन प्रसाद और रिटायर्ड IPS अरविंद कुमार जैन को शामिल किया गया है। वही इस घटना को लेकर पुलिस प्रशासन के काम पर भी सवाल उठ रहे है। न्यायिक टीम इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग एंगल से अपनी जांच रिपोर्ट को तैयार कर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यानाथ को सौपेगी। 


ग़ौरतलब है कि 24 नवंबर को संभल की शाही जामा मस्जिद के दूसरे सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस टीम पर पथराव किए जाने के बाद संभल में बवाल बढ़ गया। संभल की एक अदालत के आदेश पर दूसरा सर्वेक्षण सुबह करीब 7 बजे शुरू हुआ और मौके पर भीड़ जमा होने लगी। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई के मुताबिक़ पहले तो भीड़ ने सिर्फ नारे लगाए और फिर कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस के मुताबिक, पत्थरबाजों के तीन समूह तीन दिशाओं से आ रहे थे और जैसे ही सर्वेक्षण दल बाहर निकल रहा था, उन्होंने पथराव शुरू कर दिया। बाद में दल को सुरक्षित तरीके से इलाके से बाहर निकाल लिया गया।
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