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“वंदे मातरम” विवाद पर साक्षी महाराज का पलटवार, ए राजा पर साधा निशाना; पीएम मोदी के संबोधन की तारीफ

सांसद साक्षी महाराज ने आईएएनएस से बातचीत में दावा किया कि ए राजा से पहले इसी तरह का बयान मोहम्मद अली जिन्ना ने भी दिया था.

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भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने मंगलवार को डीएमके सांसद ए राजा के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम को मुसलमानों के खिलाफ बताया था.

ए राजा के बयान पर भड़के साक्षी महाराज

सांसद साक्षी महाराज ने आईएएनएस से बातचीत में दावा किया कि ए राजा से पहले इसी तरह का बयान मोहम्मद अली जिन्ना ने भी दिया था. उन्होंने भी वंदे मातरम को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया था, जिसके दबाव में आकर पंडित नेहरू को इसे वापस लेना पड़ा था. ऐसे लोग देश को विभाजित करने की बात करते हैं. ऐसे लोगों के सपने किसी भी कीमत पर पूरे होने वाले नहीं हैं.

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उन्होंने कहा कि लोकसभा चर्चा के लिए होती है, शोर मचाने के लिए नहीं. हमें उम्मीद है कि संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्ष का रवैया सकारात्मक रहेगा. सदन में चर्चा के दौरान किसी भी प्रकार की खलल पैदा नहीं होगी. विपक्ष की तरफ से अगर सकारात्मक रवैया रहेगा, तो हर मुद्दे पर लोकतांत्रिक ढंग से चर्चा संभव हो पाएगी.

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अनुराग ठाकुर ने की PM मोदी के संबोधन की तारीफ

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की तारीफ की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन में मुख्य रूप से जनता का हित निहित था. उनके संबोधन में लोगों की फिक्र साफतौर पर झलक रही थी. उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कैसे लोगों का व्यक्तिगत विकास हो और उनके विकास के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए.

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मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष पर सवाल

उन्होंने कहा कि किसी को भी देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध नहीं करना चाहिए. एक लोकतांत्रिक देश में इस तरह की प्रक्रिया जरूरी हो जाती है, क्योंकि फर्जी मतदाताओं को चिन्हित करके सिर्फ पात्र मतदाताओं को मतदान का अधिकार दिया जाता है. ऐसी स्थिति में यह समझ से परे है कि किसी राजनीतिक दल को इससे क्या आपत्ति हो रही है.

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उन्होंने बिहार में संपन्न हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि बिहार में किसी ने भी एसआईआर का विरोध नहीं किया. किसी ने भी शिकायत नहीं की कि उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है. लेकिन, बिहार में कुछ लोगों ने राजनीतिक मुनाफा अर्जित करने के मकसद से इसका विरोध किया.

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