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रुपया में ऐतिहासिक गिरावट, मिडिल ईस्ट की आग में झुलसी भारतीय करेंसी, पहली बार ₹92 का स्तर पार

मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच भारतीय रुपया इतिहास में पहली बार ₹92 प्रति डॉलर के पार चला गया है. अगर ऐसे ही युद्ध लंबा खिंचता है, तो पुरी दनिया की इकोनॉमी को नुकसान पहुंच सकता है.

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मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण डॉलर के मुकाबले रुपए ने बुधवार को नया ऑल-टाइम लो बनाया और पहली बार 92 के स्तर के पार निकल गया. खबर लिखे जाने तक दिन के दौरान, डॉलर के मुकाबले रुपए में 0.8 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई और फिलहाल यह 92.30 पर है. इसका पिछला रिकॉर्ड लो 91.875 था, जो कि इस साल की शुरुआत में देखा गया था.

रुपये में गिरावट के साथ कच्चे तेल की कीमत में भारी उछाल

रुपए में गिरावट की वजह मध्य पूर्व संघर्ष के चलते महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने की संभावना और विदेशी निवेश के उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से बाहर जाने की आशंका है. एक तरफ डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट देखी जा रही है. वहीं, दूसरी तरफ युद्ध के कारण कच्चे तेल में 2020 के बाद सबसे बड़ी तेजी देखने को मिल रही है. बीते दो दिनों में कच्चे तेल का दाम 12-13 प्रतिशत बढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.

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जरूरत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से होता है आयात

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देश अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में इसकी कीमत में बढ़ोतरी होने से देश का आयात बिल बढ़ता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में हर डॉलर के इजाफे से बाजार का आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ता है.

डॉलर में गिरावट का इंतजार और RBI पर नज़र

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विश्लेषकों ने आयातकों से डॉलर खरीदने के लिए गिरावट का इंतजार करने और रुपए पर आरबीआई की कार्रवाई पर बारीकी से नजर रखने का आग्रह किया. बजाज फिनसर्व एएमसी ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा कि स्थिर विकास और मध्यम मुद्रास्फीति के सहायक घरेलू माहौल के बावजूद, अमेरिकी टैरिफ, बढ़ती भूराजनीतिक चिंताओं और लगातार एफपीआई से जूझ रहे बाजारों ने रुपए को अब तक के सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है.

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग को रोकने की धमकी दी है

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रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भावना में सार्थक सुधार हुआ है.
तेल और गैस सुविधाओं पर ईरान के जवाबी हमलों से आपूर्ति बाधित होने, तेल की कीमतें बढ़ने और मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ने की आशंकाएं बढ़ गई हैं. तेहरान ने कथित तौर पर सऊदी अरब में तेल और गैस के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग को रोकने की धमकी दी है.

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