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'विकसित भारत' इवेंट में दहाड़े RSS प्रमुख मोहन भागवत, बोले- "अपने लोगों पर भी चलाना पड़ता है डंडा"
RSS प्रमुख मोहन भागवत "विकसित भारत की दिशा" कार्यक्रम में हरियाणा के गुरुग्राम पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय शिक्षा मंडल की पत्रिका "शोध" का अनावरण किया। उन्होंने भारत के विकास,विज्ञान और अध्यात्म के अलावा का कई विषयों पर अपने विचार रखे।
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हरियाणा के गुरुग्राम में "विकसित भारत की दिशा" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में RSS प्रमुख मोहन भागवत बतौर अतिथि शामिल हुए। भागवत ने इस कार्यक्रम में भारत के विकास और पर्यावरण पर चर्चा की।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि "विकास कार्य पर्यावरण की रक्षा करें। हमें दोनों को साथ लेकर चलना पड़ेगा। जब तकनीकी प्रगति मापदंडों की बात आती है। तो मात्र सिर्फ 4 प्रतिशत जनसंख्या के साथ 80% संसाधन मिलते हैं। इस तरह के विकास के लिए पूरी मेहनत के साथ काम करना पड़ता है। लेकिन नतीजा न मिलने पर कभी-कभी निराशा होती है। जिस वजह से हमें कठोर कदम उठाना पड़ता है। अपने ही लोगों को डंडा चलाना पड़ता है। जो आज की स्थिति से साफ तौर पर दिखाई देता है"।
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पूरी दुनिया यह मानती है कि भारत 16वीं सदी तक हर क्षेत्र में अग्रणी रहेगा। हमने कई महत्वपूर्ण खोज भी की थी। लेकिन रुक गए जिसकी वजह से हमारे पतन की शुरुआत हो गई। भारत ने हमेशा से यह मिशाल पेश किया है कि सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। व्यक्तिगत विकास में मन और बुद्धि का भी विकास होना चाहिए। विकास का मतलब सिर्फ आर्थिक लाभ प्राप्त करना नहीं है। बल्कि मानसिक और भौतिक दोनों रूप से मिलाजुला होना चाहिए।
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मोहन भागवत ने इस सम्मेलन में हर एक मुद्दे पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने आध्यात्मिक और विज्ञान पर भी अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि अध्यात्म और विज्ञान "दोनों का मकसद मानवता की भलाई है। किसी को मोक्ष प्राप्त करना है। तो उसे अपने सांसारिक कर्मों को छोड़ना पड़ता है। पैसा कमाना है, तो भागते रहो। बच्चों को अच्छे से रखना है, सुबह जाकर शाम को वापस लौटना है। लेकिन इसके लिए कुछ ना कुछ काम त्याग करना पड़ता है।
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बता दें कि "विकसित भारत की दिशा" सम्मेलन में पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय शिक्षा मंडल की पत्रिका "शोध" का अनावरण किया। इस दौरान विशाल प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया।