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BMC मेयर पद के लिए BJP की पसंद बनीं ऋतु तावड़े, शिंदे सेना को डिप्टी मेयर पद, जानिए उनका राजनीतिक सफर

महायुति की जीत के बाद बीजेपी की ऋतु तावड़े आज मुंबई महापौर पद के लिए नामांकन करेंगी, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय घाडी उप महापौर उम्मीदवार होंगे. बीएमसी इतिहास में पहली बार महापौर पद पर बीजेपी का प्रतिनिधि होगा.

Sanjay Shankar Ghadi/ Ritu Tawde (File Photo)
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महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव में महायुति गठबंधन के शानदार प्रदर्शन के बाद अब सत्ता की औपचारिक बागडोर संभालने की प्रक्रिया तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी की पार्षद ऋतु तावड़े आज मुंबई के महापौर पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने जा रही हैं. उनके साथ शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नेता संजय शंकर घाडी उप महापौर पद के लिए गठबंधन के उम्मीदवार होंगे. यह सियासी समीकरण न सिर्फ बीएमसी की सत्ता संरचना को बदलेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में मुंबई के प्रशासनिक फैसलों की दिशा भी तय करेगा.

बीएमसी के इतिहास में यह पहला मौका है जब महापौर पद पर बीजेपी का प्रतिनिधि बैठने जा रहा है. पार्टी इसे संगठनात्मक मजबूती और जमीनी राजनीति की बड़ी जीत के तौर पर देख रही है. ऋतु तावड़े घाटकोपर के वार्ड नंबर 132 से लगातार तीसरी बार पार्षद चुनी गई हैं. उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी व्यापक स्वीकार्यता मानी जाती है. मराठा समुदाय से आने के बावजूद उन्होंने गुजराती बहुल वार्ड में लगातार तीन बार जीत दर्ज कर यह साबित किया है कि उनकी राजनीति जातिगत दायरों से ऊपर है. ऋतु तावड़े को पार्टी के भीतर एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो सीधे जनता से संवाद करने में विश्वास रखती हैं. स्थानीय नागरिक समस्याएं हों या प्रशासनिक स्तर पर समन्वय, वे हर मोर्चे पर सक्रिय दिखाई देती हैं. यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें महापौर पद के लिए आगे बढ़ाया है. भाजपा नेताओं का मानना है कि तावड़े बीएमसी के प्रशासनिक कामकाज को न केवल समझती हैं, बल्कि उसमें सुधार की स्पष्ट दृष्टि भी रखती हैं.

कैसा है ऋतु तावड़े का राजनीतिक सफर

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ऋतु तावड़े का राजनीतिक सफर किसी बड़े पद या विरासत से नहीं, बल्कि जमीनी मेहनत से शुरू हुआ है. उन्होंने वर्ष 2012 में वार्ड नंबर 127 से चुनाव जीतकर बीएमसी में कदम रखा था. इसके बाद 2017 में वे घाटकोपर के वार्ड नंबर 121 से निर्वाचित हुईं. ताजा 2025 के चुनाव में उन्होंने वार्ड नंबर 132 से जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार पार्षद बनने का रिकॉर्ड बनाया. घाटकोपर क्षेत्र में उनकी यह निरंतर सफलता उनकी मजबूत पकड़ और भरोसे का संकेत मानी जा रही है. अपने अब तक के कार्यकाल में ऋतु तावड़े बीएमसी की शिक्षा समिति की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. इस दौरान उन्होंने नगर निगम के स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर खास ध्यान दिया. शिक्षा के क्षेत्र में उनके अनुभव को महापौर पद के लिए एक मजबूत आधार माना जा रहा है, क्योंकि मुंबई जैसे महानगर में नागरिक सेवाओं के साथ सामाजिक विकास भी उतना ही अहम है.

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कांग्रेस छोड़ BJP में हुईं थी शामिल 

ऋतु तावड़े का राजनीतिक करियर कई मायनों में दिलचस्प रहा है. उन्होंने वर्ष 2012 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था. इसके बाद से उन्होंने पार्टी संगठन में लगातार अपनी जगह मजबूत की. वर्तमान समय में वे महाराष्ट्र प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. संगठनात्मक समझ, क्षेत्रीय लोकप्रियता और लगातार चुनावी जीत को ही उनके महापौर पद तक पहुंचने की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. मराठा समुदाय से आने के बावजूद गुजराती बहुल इलाके में उनकी मजबूत पकड़ यह दिखाती है कि वे समुदायों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम हैं. नागरिक मुद्दों पर उनका व्यावहारिक रवैया और समस्याओं का मौके पर समाधान निकालने की शैली उन्हें आम नेताओं से अलग पहचान देती है.

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उप महापौर पद पर शिंदे गुट का दांव

महायुति गठबंधन के तहत उप महापौर का पद शिव सेना (शिंदे गुट) के खाते में गया है. इस पद के लिए संजय शंकर घाडी को उम्मीदवार बनाया गया है. शिंदे गुट का मानना है कि घाडी एक अनुभवी और संगठन के प्रति वफादार नेता हैं. गठबंधन के नेताओं को भरोसा है कि ऋतु तावड़े और संजय घाडी की जोड़ी मुंबई के विकास कार्यों को नई गति देगी.

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बताते चलें कि बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद महायुति का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है. भाजपा नेताओं का कहना है कि ऋतु तावड़े का चयन यह साफ संदेश देता है कि पार्टी जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को आगे बढ़ा रही है. आज नामांकन दाखिल होने के बाद अगले कुछ दिनों में मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी. विपक्ष की ओर से अब तक किसी साझा उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई है, जिससे ऋतु तावड़े की राह आसान मानी जा रही है. यदि वे निर्वाचित होती हैं, तो मुंबई को एक ऐसा महापौर मिलेगा, जिसके पास शिक्षा, प्रशासन और जमीनी सुधारों का लंबा अनुभव होगा.

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