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रिंकू सिंह की मंगेतर और सपा सांसद प्रिया सरोज ने लगाए धान, सहेलियों संग पानी भरे खेत में काम करने का वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के मछलीशहर से सपा सांसद प्रिया सरोज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने गांव करखियांव में नंगे पांव धान की रोपाई करती नजर आ रही हैं. वीडियो खुद उन्होंने शेयर किया है और लिखा, "हमारा गांव...". उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ खेत में करीब आधे घंटे तक काम किया और इस दौरान सपा व पीडीए की उपलब्धियों की चर्चा भी की.

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यूपी की राजनीति में इन दिनों एक अलग ही तस्वीर सुर्खियों में है. मछलीशहर से समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वह देसी अंदाज में नंगे पांव खेत में धान की रोपाई करती नजर आ रही हैं. यह वीडियो खुद उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है. कैप्शन में उन्होंने लिखा, "हमारा गांव..." और बस इतना ही काफी था उनके फॉलोअर्स के दिल जीतने के लिए. यूजर्स इस वीडियो पर लगातार शेयर और कमेंट कर रहे हैं, कोई उन्हें "धरती से जुड़ी सांसद" बता रहा है तो कोई कह रहा है,"यही असली जनप्रतिनिधि की पहचान है".

खेत की मिट्टी से संसद तक का सफर

जानकारी के अनुसार, यह वीडियो वाराणसी के पिंडरा तहसील क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव करखियांव का है, जहां वे रविवार को पहुंची थीं. वहां उन्होंने अपनी बचपन की सहेलियों और गांव की महिलाओं के साथ करीब आधे घंटे तक धान की रोपाई की. पानी भरे खेत, गर्मी और मिट्टी में धन की रोपाई करते समय उनके चेहरे पर आत्मीयता और सहजता दिखाई दी. इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात कर समाजवादी पार्टी और PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों के लिए चलाए जा रहे संघर्षों और उपलब्धियों की जानकारी भी दी.

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देश की सबसे युवा सांसदों में से एक

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25 साल की उम्र में सांसद बनने वाली प्रिया सरोज आज देश की सबसे युवा सांसदों में गिनी जाती हैं. वह पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक तूफानी सरोज की बेटी हैं, लेकिन अपनी सादगी, सक्रियता और जुड़ाव के चलते उन्होंने खुद की एक अलग पहचान बनाई है. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी भोलानाथ को 35,850 वोटों के अंतर से हराकर मछलीशहर सीट पर बड़ी जीत दर्ज की. आमतौर पर राजनीतिक परिवारों से आने वाले नेता खुद को जनता से ऊपर समझ बैठते हैं, लेकिन प्रिया सरोज का व्यवहार बिलकुल इसके विपरीत है. गांव की गलियों से लेकर संसद के गलियारों तक, वह हर जगह सहज, सक्रिय और सजग नजर आती हैं.

हर मंच पर बनी चर्चा का केंद्र

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बता दें कि हाल ही में प्रिया सरोज की सगाई क्रिकेटर रिंकू सिंह से हुई, यह कार्यक्रम न केवल व्यक्तिगत रूप से खास था, बल्कि राजनीतिक रूप से भी चर्चित रहा. इस मौके पर सपा मुखिया अखिलेश यादव, डिंपल यादव समेत पार्टी के कई बड़े चेहरे मौजूद थे. उनकी इस नई शुरुआत ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी और एक बार फिर से प्रिया सरोज सुर्खियों में आ गईं.

बिना झिझक रखती हैं बात

प्रिया सरोज सिर्फ जमीन से जुड़ी नेता ही नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक मामलों पर भी मुखर राय रखने वाली सांसद हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के एक बयान पर कड़ा विरोध जताया था. कथावाचक ने समाजवादी पार्टी और खासतौर पर अखिलेश यादव को लेकर जो विवादित टिप्पणी की, उसके जवाब में प्रिया ने तीखा ट्वीट करते हुए लिखा, "जब एक बाबा कृष्ण जी का नाम बताने में असफल हो जाता है, तो अपनी छवि सुधारने के लिए वह राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का नाम हिंदू-मुस्लिम जोड़ कर देश-प्रदेश का माहौल खराब कर देता है..." इस बयान ने साफ कर दिया कि प्रिया सरोज सिर्फ मंचों की नेता नहीं, बल्कि मुद्दों की भी सशक्त आवाज हैं.

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बताते चले कि मछलीशहर की सांसद प्रिया सरोज आज एक ऐसे दौर की मिसाल बन रही हैं, जब राजनीति को सिर्फ भाषण और सोशल मीडिया तक सीमित समझा जाता है. उनका खेत में उतरना, जनता से संवाद करना और ज़मीनी मुद्दों को उठाना, यह सब बताता है कि युवा राजनीति का चेहरा अब बदल रहा है. वह राजनीति में आई हैं, लेकिन राजनीति उनमें नहीं आई. 

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