Advertisement
महाराष्ट्र में कांग्रेस-NCP राज में दिया गया मुस्लिमों को आरक्षण, CM फडणवीस ने एक झटके में किया खत्म, मचा बवाल
महाराष्ट्र में मराठा की आड़ में मुस्लिम आरक्षण के खेल को खत्म कर दिया है. CM फडणवीस ने मुस्लिमों को मिला आरक्षण खत्म कर दिया है. इतना ही नहीं 6 दिन के अंदर 75 से ज्यादा कॉलेजों को दिया गया अल्पसंख्यक दर्जा मामले में भी सख्त एक्शन दिया गया है.
Advertisement
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने अपने एक तगड़े फैसले से हड़कंप मचा दिया है. दरअसल मुस्लिम समुदाय को शिक्षा में दिए गए 5% आरक्षण पर फुल स्टॉप लगा दिया गया है. इतना ही नहीं इस औपचारिक रूप से खत्म ही कर दिया है. नया शासन निर्णय (GR) जारी करते हुए सरकार ने 2014 में शुरू हुई इस आरक्षण प्रक्रिया को पूर्ण रूप से खत्म घोषित कर दिया है. यानी कि अब इस श्रेणी के विद्यार्थियों को कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में 5% आरक्षण नहीं मिलेगा, न ही इस श्रेणी में नई जाति प्रमाणपत्र या वैधता प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे.
महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण खत्म!
आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने एक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी कर 2014 के उस आदेश को औपचारिक रूप से वापस ले लिया है, जिसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों को शिक्षा और नौकरियों में 5% आरक्षण प्रदान किया गया था. विभाग ने मंगलवार देर रात यह आदेश जारी कर मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को दिए गए 5% एसईबीसी (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) कोटा को रद्द कर दिया.
Advertisement
कांग्रेस-NCP राज में लागू हुआ था मुस्लिम कोटे वाला फैसला!
Advertisement
अधिकारियों के मुताबिक यह निर्णय अदालती फैसलों और 2014 की नीति से संबंधित मौजूदा कानूनी स्थिति के अनुरूप लिया गया है. आरक्षण नीति को पहले बॉम्बे उच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा था, जिसने सरकारी नौकरियों में कोटा पर रोक लगा दी थी. मुस्लिम आरक्षण की यह व्यवस्था जुलाई 2014 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन कांग्रेस-NCP सरकार ने मराठा और मुस्लिम समुदाय दोनों के लिए आरक्षण लागू किया था.
उस समय मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत और मुस्लिम समुदाय को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. इससे राज्य में कुल आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर 73 प्रतिशत तक पहुंच गया था. मुस्लिम आरक्षण का प्रस्ताव तत्कालीन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नसीम खान ने कैबिनेट में रखा था.
Advertisement
सरकार के GR के अनुसार, अब ना तो किसी संस्था में इस श्रेणी के तहत एडमिशन दिया जाएगा, और न ही इस श्रेणी से संबंधित कोई लंबित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. मामले को पूरी तरह बंद घोषित कर दिया गया है. इसने अब राज्य की राजनीति में एक तरह से बवाल खड़ा कर दिया है.
'मुसलमानों को रमजान का तोहफा'
वहीं इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील ने सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे रमजान गिफ्ट करार देते हुए कहा कि 'सरकार ने रमजान का तोहफा देते हुए मुसलमानों का 5% शैक्षणिक आरक्षण खत्म कर दिया. हाई कोर्ट ने माना था कि मुसलमानों में शिक्षा छोड़ने की दर सबसे अधिक है, फिर भी हम अपने लड़के-लड़कियों से कहेंगे- पढ़ाई न छोड़ें. पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया.'
Advertisement
6 दिन में 75 से ज्यादा कॉलेजों को अल्पसंख्यक दर्जा!
इतना ही नहीं फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र में चल रहे एक और खेल पर पूरी तरह रोक लगा दिया है. दरअसल महाराष्ट्र में थोक के भाव में कॉलेजों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जा रहा था. यानी कि खेल चल रहा था. जानकारी के मुताबिक अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय को ट्रांसफर कर दिया गया है. ये कार्रवाई ऐसे वक्त में हुई है जब आरोप लग रहे हैं कि महज 6 दिन में 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 के बीच 75 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को रिकॉर्ड समय में अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया.
अजित पवार के प्लेन क्रैश के वक्त कैसे हुए डिजिटल साइन!
Advertisement
इतना ही नहीं कई फाइलों पर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज होने का संदेह भी उभरा है. राज्य शोक अवधि में यह तेज मंजूरियां कैसे हुईं, इस पर सवाल गहराए हैं. सरकार जांच करने जा रही है कि ये मंजूरी लोभ, दबाव या भ्रष्टाचार के कारण दी गई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी 75 मंजूरियां रोक दीं और उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए. इनमें पोदार इंटरनेशनल के 25 स्कूलों सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान शामिल हैं.
अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय पर एक्शन!
यह भी पढ़ें
इस बीच, अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय को ट्रांसफर कर दिया गया है. यह कार्रवाई उस बड़े विवाद के बाद हुई, जिसमें आरोप लगा कि 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 के बीच 75 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को रिकॉर्ड समय में अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया. कई फाइलों पर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज होने का संदेह भी उभरा है. राज्य शोक अवधि में यह तेज मंजूरियां कैसे हुईं, इस पर सवाल गहराए हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी 75 मंजूरियां रोक दीं और उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए. इनमें पोदार इंटरनेशनल के 25 स्कूलों सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान शामिल हैं.