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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को डिजाइन करने वाले मशहूर मूर्तिकार पद्मश्री राम सुतार का निधन, CM योगी ने कहा- कला जगत की अपूरणीय क्षति

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार और पद्मभूषण से सम्मानित मशहूर मूर्तिकार राम सुतार का बुधवार देर रात नोएडा में निधन हो गया. 100 वर्षीय राम सुतार लंबे समय से बीमार थे. पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण और महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित राम सुतार के निधन पर सीएम योगी समेत कई नेताओं ने गहरा दुख जताया.

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दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को आकार देने वाले मशहूर मूर्तिकार और पद्मभूषण से सम्मानित राम सुतार का बुधवार देर रात निधन हो गया. 100 वर्षीय राम सुतार लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे और नोएडा के सेक्टर 19 स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर मिलते ही देशभर के कला, राजनीति और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई. 

कई राष्ट्रीय सम्मान से किए गए थे सम्मानित  

राम सुतार के निधन की जानकारी उनके बेटे अनिल सुतार ने दी. अनिल सुतार स्वयं एक प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं और अपने पिता की कला विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. राम सुतार को उनके जीवनकाल में पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण और टैगोर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका था. हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान महाराष्ट्र भूषण से भी नवाजा था. राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के गोंडूर गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने कला को अपना जीवन बनाया. वर्ष 1990 से वे नोएडा में रह रहे थे और यहीं उन्होंने अपना स्टूडियो स्थापित किया. अजंता और एलोरा की गुफाओं में स्थित कई प्राचीन मूर्तियों के जीर्णोद्धार में भी उनकी अहम भूमिका रही.

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CM योगी ने जताया दुख 

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राम सुतार के निधन पर देश के कई नेताओं ने शोक जताया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि महान मूर्तिकार और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम वी सुतार का निधन अत्यंत दुखद और कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने दिवंगत आत्मा की सद्गति और परिजनों को शक्ति देने की प्रार्थना की. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी उनके साथ पुरानी तस्वीर साझा करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया. बीते नवंबर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं अपने मंत्रिमंडल के साथ नोएडा पहुंचे थे और राम सुतार को उनके घर पर महाराष्ट्र भूषण सम्मान प्रदान किया था. यह सम्मान उनके जीवन की तपस्या और योगदान का प्रतीक माना गया.

महात्मा गांधी की कई मूर्तियों का किया था निर्माण 

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राम सुतार की सबसे प्रसिद्ध कृति मानी जाती है. गुजरात में स्थित 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा आज भी दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है. सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित इस प्रतिमा ने भारतीय शिल्पकला को वैश्विक पहचान दिलाई. इसके अलावा उन्होंने महात्मा गांधी की 350 से अधिक मूर्तियों का निर्माण किया, जो भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में स्थापित हैं.

कई महान विभूतियों की बनाई प्रतिमा 

राम सुतार की कला केवल प्रतिमाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह विचारों को पत्थर और धातु में ढालने की क्षमता रखते थे. भारत के करीब 450 शहरों में स्थापित गांधी प्रतिमाएं इसका उदाहरण हैं. यह सिर्फ एक कलाकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि गांधीवादी विचारों की वैश्विक स्वीकार्यता का भी प्रतीक है. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर, छत्रपति संभाजी महाराज और भगवान श्रीराम की प्रतिमाओं के माध्यम से उन्होंने इतिहास, संस्कृति और आस्था को मूर्त रूप दिया. उनकी अन्य प्रमुख कृतियों में संसद भवन में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा, बेंगलुरु की 153 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा, पुणे के मोशी में 100 फीट ऊंची छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा, अयोध्या में प्रस्तावित 251 मीटर ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा, लता मंगेशकर चौक पर विशाल वीणा, दक्षिण गोवा में 77 फुट ऊंची कांसे की भगवान राम की प्रतिमा और पटना के गांधी मैदान में बच्चों के साथ गांधी की प्रतिमा शामिल हैं.

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बताते चलें कि राम सुतार का जाना भारतीय मूर्तिकला के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है. उनकी द्वारा निर्माण की गई प्रतिमाओं आने वाली पीढ़ियों को न केवल कला की बारीकियां सिखाएंगी, बल्कि इतिहास, विचार और राष्ट्र निर्माण की भावना भी जगाती रहेंगी. उनका नाम भारतीय कला इतिहास में सदैव अमर रहेगा.

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