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देश विरोधी नारे, पाकिस्तान से प्रेम... ऐसे मौलाना को 4 साल तक सैलरी देती रही सपा सरकार, योगी राज में हुआ बड़ा एक्शन

यूपी के आजमगढ़ में सपा सरकार में एक मदरसा शिक्षक, मौलाना पर जिस तरह की मेहरबानियां की गईं हैं उसने हड़कंप मचा दिया है. वो मौलाना जिसने भारत की नागरिकता त्याग दी, जिसके पाकिस्तान के साथ रिश्ते रहे हैं, वो पाकिस्तान का दौरा भी कर चुका है, उसे सालों तक लंदन में बैठे होने के बावजूद सैलरी देते रहे और पेंशन भी निकालने दी. अब जाकर योगी सरकार ने न्याय किया है.

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भारत में किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं और किस तरह कानून को ठेंगा दिखाया जाता है उसका एक बड़ा मामला सामने आया है. यूपी में योगी राज आने से पहले पूर्ववर्ती सपा राज में मदरसा के मौलानाओं की मौज का मामला सामने आया है. दरअसल आजमगढ़ का लंदन में बैठा मौलाना सालों-साल तक बतौर मदरसा शिक्षक के रूप में लाखों रुपए वेतन लेता रहा और शासन को चूना लगाता रहा.

आपको बताएं कि भारत की नागरिकता छोड़कर लंदन में बैठे मौलाना शमशुल हुदा खान को गलत ढंग से लाखों रुपए वेतन देने के मामले में योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. इसके तहत सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए साल 2014 से 2017 के बीच आजमगढ़ में तैनात रहे 4 जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है.

ये अधिकारी नप गए!

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मदरसा शिक्षक को गलत तरीके से पैसे ट्रांसफर करने, सालों तक वेतन देने के फर्जीवाड़े में शामिल जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है उनमें वर्तमान में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर शेषनाथ पांडे, गाजियाबाद में तैनात साहित्य निकश सिंह, अमेठी में तैनात प्रभात कुमार और बरेली में तैनात जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी लालमन शामिल हैं. 

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क्या है पूरा मामला?

संत कबीर नगर के खलीलाबाद इलाके का रहने वाला मौलाना शमशुल हुदा खान आजमगढ़ के मदरसा अशरफिया मिस्बाह-उल- उलूम में शिक्षक था. वो दावत-ए-इस्लामी से भी जुड़ा है. मौलाना शमशुल हुदा खान ने 19 दिसंबर 2013 को भारत की नागरिकता छोड़ दी थी और ब्रिटेन की नागरिकता ले ली थी. हद तो तब हो गई जब शमशुल हुदा भारत की नागरिकता छोड़ने के के बावजूद बतौर मदरसा प्रबंधक, प्रधानाचार्य व विभागीय अफसर की मिली भगत से जुलाई 2017 तक वेतन लेता रहा.

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इतना ही नहीं, मौलाना शमशुल हुदा खान ने VRS लेने के बाद न सिर्फ अपना GPF निकाल लिया, बल्कि पेंशन भी हड़प ली. जब पूरे मामले की जांच कराई गई  तो जनवरी 2022 में आज़मगढ़ के एडीएम प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर 16.59 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया.

पाकिस्तान तक जा चुका है शमशुल हुदा खान!

बीते महीने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यूपी एटीएस की वाराणसी यूनिट ने जांच की और अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मदरसा शिक्षक रहते हुए शमशुल हुदा खान ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, सिंगापुर, श्रीलंका के साथ-साथ तीन से चार बार पाकिस्तान तक गया. रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ कि उसके पाकिस्तान और कश्मीर के तमाम लोगों से रिश्ते हैं. ऐसे में उसकी गतिविधि संदिग्ध पाई गई है. 

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ATS ने दी रिपोर्ट फिर दर्ज हुई FIR!

 जब पूरे मामले की जांच कर एटीएस ने रिपोर्ट दी तब संत कबीर नगर के खलीलाबाद में शमशुल हुदा खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई. अब जाकर सरकार ने मदरसा टीचर के वेतन जारी करने वाले आजमगढ़ के तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है.

पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी से मौलाना के सांठ-गांठ

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जांच एजेंसियों के मुताबिक भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक शमसुल हुदा की दावत-ए-इस्लामी के साथ कई देशों में बैठकें भी हुईं. इनके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए. इतना ही नहीं बीते 5 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में हुई दावत-ए-इस्लामी की एक बैठक में 'फ्री कश्मीर' के भी नारे लगाए गए थे. 

इसके अलावा 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी कई देशों में कश्मीर की आजादी के नाम पर लगातार जलसे करता रहा. इसको लेकर साउथ अफ्रीका में भी बैठक हुई थी जिसमें शुमशुल हुदा भी शामिल हुआ था. उसके फ्री कश्मीर के नारे लगाने वालों के साथ तस्वीर भी सामने आईं. आपको बता दें दावत ए इस्लामी वही संगठन है, जिसके लोगों के राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या के आरोपियों से संबंध मिले थे. 

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शमशुल ने विदेशी फंडिंग के जरिए भेजे करोड़ों रुपए!
 
इसके अलावा यूपी एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि शमशुल हुदा ने विदेशी फंडिंग के जरिए 4 करोड़ रुपए संत कबीर नगर भेजे. वहीं संत कबीर नगर के खलीलाबाद में मौलाना शमशुल हुदा का बेटा एक मदरसा भी चलाता है. लंदन में रहते हुए शमशुल हुदा ने संत कबीर नगर में परिवार वालों के नाम पर कीमती प्रॉपर्टी खरीदी थी. शमशुल हुदा के खिलाफ संत कबीर नगर के खलीलाबाद में विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई. 

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