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चुनाव से पहले जेल से बाहर आएगा राम रहीम, EC ने सशर्त दी पैरोल को मंजूरी

चुनाव से पहले जेल से बाहर आएगा राम रहीम, EC ने सशर्त दी पैरोल को मंजूरी

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Haryana में विधानसभा चुनाव के मतदान के लिए अब महज कुछ ही घंटे का वक्त बचा है। इस बीच राज्य से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर पैरोल मिल गई है। चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद एक बार फिर राम रहीम 20 दिनों के लिए सशर्त जमानत पर जेल से बाहर आएगा। पैरोल के दरम्यान राम रहीम को हरियाणा में जाने और किसी भी चुनाव प्रचार गतिविधि में शामिल होने साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से किसी भी दल का प्रचार करने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। 

किन शर्तों का राम रहीम को करना होगा पालन

दरअसल, कोर्ट में गुरमीत राम रहीम ने आकस्मिक और आवश्यक कारण बताते हुए 20 दिन के पैरोल की अर्जी डाली थी। ऐसे में राज्य में विधानसभा चुनवा के मद्देनजर ये मामला हरियाणा निर्वाचन आयोग के पास गया। जिस पर आयोग ने गुरमीत राम रहीम की इस अर्जी को सशर्त मंजूरी दी है। शर्तों के मुताबिक राम रहीम को हरियाणा जाने किसी भी चुनाव प्रचार की गतिविधियों में शामिल होने के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी किसी भी दल का चुनाव प्रचार करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है। डेरा प्रमुख की अर्जी को मंजूर करते हुए आयोग ने साफ कहा है कि अगर राम रहीम शर्तों का उल्लंघन करता है तो तुरंत पैरोल को रद्द कर दिया जाएगा। यह उम्मीद जताई जा रही है कि चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद हरियाणा सरकार गुरमीत राम रहीम के पैरोल पर बाहर आने का आदेश जल्द जारी कर सकती है। इस मामले के जानकारों की माने तो राम रहीम की जमानत बुधवार की सुबह हो सकती है और अगर जमानत पर राम रहीम बाहर आता है तो वह उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में रहेगा क्योंकि उसमें पैरोल की अर्जी में साफ तौर पर यह कहा था कि वह पैरोल के दौरान उत्तर प्रदेश के बागपत में रहेगा और उसका हरियाणा विधानसभा चुनाव से किसी भी प्रकार का लेना-देना नहीं है। 


सियासी पार्टी की नजरों में राम रहीम
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम भले ही अपनी अर्जी में यह कहां हो कि हरियाणा विधानसभा चुनाव से उसका कोई लेना-देना नहीं है लेकिन सभी को पता है कि हरियाणा में राम रहीम को मानने वाले बड़ी संख्या में उसके अनुयाई हैं जो उसकी हर एक बात को मानते हैं इन लोगों की संख्या यूपी बॉर्डर हरियाणा और पंजाब के इलाकों में सबसे ज्यादा है। पहले भी कई बार देखा गया है कि जब राम रहीम जेल नहीं गया था तब जब लोकसभा हो या हरियाणा में विधानसभा का चुनाव हो राम रहीम के पास बड़े-बड़े दलों के नेता पहुंचने से और चुनाव में उसे मदद मांगते थे। यही वजह है कि राम रहीम की इस पैरोल की अर्जी को लोगो ने सियासी तौर पर भावना शुरू कर दिया है। बताते चने की इससे पहले पंजाब विधानसभा चुनाव के कुछ दिनों पहले भी राम रहीम जेल से बाहर आया था। 

जानिए क्या होता है पैरोल

लिए सबसे पहले हम आपको यह समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर पैरोल होता क्या है। जिस अधिकार का इस्तेमाल कर जेल की सलाखों के पीछे सजा काट रहा मुजरिम पैरोल की अर्जी डालता है। तो आपको बता दें पैरोल एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें कैदी को कुछ शर्तों के साथ जेल से अस्थाई रूप से रिहा कर दिया जाता है। इसमें सबसे मुख्य बात यह होती है कि किसी भी कैदी को पैरोल देने के पीछे सबसे पहले यह देखा जाता है कि कैदी ने सुधार हुआ है या नही क्या वह समाज में वापस आने की स्थिति में है। इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर  कैदी की पैरोल की अर्जी को स्वीकृति मिलती है।  इन अधिकारों का इस्तेमाल कर राम रहीम अब तक अपनी सजा के दरम्यान लगभग 10 बार जेल से बाहर आ चुका है। 

गौरतलब है कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम दो शिष्यों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है और वर्तमान में वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। मैं अगर हरियाणा में विधानसभा चुनाव की बात करें तो राज्य में 5 अक्टूबर को मतदान होने हैं जबकि 8 अक्टूबर को मटन की गिनती होगी इसके बाद यह स्थिति साफ हो पाएगी कि राज्य की सत्ता की कुर्सी पर कौन सी पार्टी का नेता विराजमान होगा।
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