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पंडित नेहरू पर राजनाथ के दावे से बढ़ा सियासी बवाल... कांग्रेस ने सरदार पटेल की बेटी की डायरी शेयर कर दिया जवाब

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी के बर्खास्त विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रख दी है. यह कदम अयोध्या में बाबरी विध्वंस की बरसी पर उठाया गया, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. इसी बीच कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर इतिहास तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया है.

Jairam Ramesh/ Rajnath Singh (File Photo)
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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शनिवार को टीएमसी के बर्खास्त विधायक हुमायूं कबीर ने यहां ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रख दी है. इस घटना ने पूरे देश में देश की राजनीति में नया तूफ़ान ला दिया है. खास बात यह है कि यह नींव उस दिन रखी गई, जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी थी. इस वजह से राजनीतिक माहौल और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है. स्थानीय लोगों के बीच हलचल बढ़ी है और राष्ट्रीय स्तर पर यह कदम चर्चा का केंद्र बन चुका है. इस बीच कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. 

कांग्रेस ने शेयर किया डायरी का मूल पेज 

दरअसल, राजनाथ सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू सरकारी धन से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने ऐसा होने नहीं दिया. इसी बयान पर बवाल शुरू हो गया है. राजनाथ सिंह के आरोप पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने राजनाथ सिंह के दावे को झूठ करार दिया है. उन्होंने सरदार पटेल की बेटी द्वारा लिखी गई डायरी के मूल पन्ने एक्स पर शेयर करते हुए कहा कि डायरी में ऐसा कुछ भी नहीं है, जैसा दावा किया जा रहा है. रमेश के अनुसार, मूल प्रविष्टि और राजनाथ सिंह के बयान में जमीन-आसमान का फर्क है. कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी से रिश्ते बेहतर करने के लिए रक्षा मंत्री ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं.

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रक्षामंत्री को मांगनी चाहिए माफी: कांग्रेस 

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जयराम रमेश ने आगे कहा कि सरदार पटेल मेमोरियल सोसाइटी द्वारा प्रकाशित मूल डायरी सबूत के रूप में मौजूद है और उसमें नेहरू के बारे में ऐसे किसी सुझाव का जिक्र नहीं है. उनका कहना है कि रक्षा मंत्री को देश से और विशेष रूप से इतिहास का सम्मान करने वाले लोगों से माफी मांगनी चाहिए. जानकारी देते चलें कि राजनाथ सिंह ने अपने बयान में यह भी दावा किया था कि नेहरू ने सुझाव दिया था कि पटेल की मृत्यु के बाद उनके स्मारक के लिए जुटाई गई राशि का उपयोग कुएं और सड़कों के निर्माण में किया जाए. वडोदरा के पास साधली गांव में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सरदार पटेल को सच्चा उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष नेता बताया, जो कभी तुष्टीकरण की राजनीति में विश्वास नहीं रखते थे.

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बताते चलें कि मुर्शिदाबाद से उठी यह नई राजनीतिक हलचल और गुजरात से उठा बयान, दोनों ने मिलकर देश की राजनीति में नया मोड़ पैदा कर दिया है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर गर्मागरम बयानबाजी और तेज होती दिख सकती है.

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