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रेलवे की बड़ी कार्रवाई, 3.02 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी निष्क्रिय, तत्काल टिकट बुकिंग हुई और मजबूत
ट्रेन टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग में गड़बड़ाझाला रोकने के लिए रेलवे ने कई सख्त कदम उठाए हैं. रेलवे ने इस साल के शुरू से अब तक 3.02 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी बंद की है, तत्काल टिकट बुकिंग में एंटी बॉट सिस्टम लगाया है और 322 ट्रेनों में ऑनलाइन तत्काल टिकट के लिए ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य किया है.
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भारतीय रेलवे ने आरक्षण प्रणाली के प्रदर्शन को मजबूत बनाने और तत्काल टिकटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगभग 3.02 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय किया है. यह जानकारी गुरुवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी.
रेलवे ने फर्जी यूजर्स पर की कड़ी कार्रवाई
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे नियमित/तत्काल टिकटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए यूजर्स अकाउंट का कड़ा पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन किया गया है. जनवरी 2025 से अब तक लगभग 3.02 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय कर दिया गया है.
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साथ ही, अकामाई जैसे एंटी-बॉट समाधानों को फर्जी यूजर्स को हटाने और वैध यात्रियों के लिए सुचारू बुकिंग सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है.
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तत्काल टिकटों के लिए OTP प्रणाली लागू
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तत्काल बुकिंग में दुरुपयोग को रोकने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सत्यापन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. 4 दिसंबर 2025 तक यह सुविधा 322 रेलगाड़ियों में मिल रही है. इन उपायों के परिणामस्वरूप, इन रेलगाड़ियों में से लगभग 65 प्रतिशत में तत्काल टिकट की उपलब्धता का समय बढ़ गया है.
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इसके अतिरिक्त, आरक्षण काउंटरों पर तत्काल बुकिंग के लिए आधार-आधारित ओटीपी को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है और 4 दिसंबर तक इसे 211 रेलगाड़ियों में लागू किया गया है.
इन और अन्य उपायों के परिणामस्वरूप, 96 लोकप्रिय रेलगाड़ियों में से लगभग 95 प्रतिशत रेलगाड़ियों में तत्काल टिकट की उपलब्धता का समय बढ़ गया है.
साइबर सुरक्षा को भी मिला मजबूती
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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए, रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड व्यापक साइबर सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सेवाएं प्रदान करता है, जिनमें टेक-डाउन सेवाएं, खतरा निगरानी, डीप और डार्क वेब निगरानी और डिजिटल जोखिम सुरक्षा शामिल हैं. ये सेवाएं उभरते साइबर खतरों के बारे में सक्रिय और कार्रवाई योग्य जानकारी प्रदान करती हैं और बेहतर घटना प्रतिक्रिया को संभव बनाती हैं.