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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया अल्स्टॉम के सवली संयंत्र का दौरा, कहा- रेल उपकरणों का टॉप निर्यातक बन रहा भारत, हो रहा 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना साकार

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वडोदरा में अल्स्टॉम के सवली संयंत्र का दौरा किया। यहां उन्होंने नमो भारत ट्रेन के निर्माण कार्य की समीक्षा की और अल्स्टॉम के ऑपरेशन को भी देखा. रेल मंत्री ने कहा कि 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' का सपना साकार हो रहा है. भारत आज रेल उपकरणों का टॉप निर्यातक बन रहा है.

Image: Rail Minister Ashwini Vaishnaw at Alstom Factory
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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वडोदरा, गुजरात में अल्स्टॉम के सवली संयंत्र का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने नमो भारत ट्रेन के निर्माण कार्य का जायजा लिया और वहां हो रहे दूसरे कामों को भी देखा. मंत्री ने संयंत्र के कर्मचारियों और अधिकारियों से बातचीत की और ट्रेन की क्वालिटी, सामान की सप्लाई और आगे की योजनाओं पर चर्चा की. उन्होंने अल्स्टॉम की इस बात के लिए तारीफ की कि वे हर ऑर्डर के हिसाब से ट्रेन डिज़ाइन करते हैं.

मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे को भी ऐसा ही तरीका अपनाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि अल्स्टॉम और गति शक्ति विश्वविद्यालय मिलकर एक संयुक्त ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करें, जिससे नए लोगों को अच्छी ट्रेनिंग मिल सके. मंत्री ने यह भी कहा कि रेलवे की सभी उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों को सवली संयंत्र आकर काम को समझना चाहिए. बातचीत के दौरान, ट्रेन के रखरखाव को बेहतर बनाने के लिए सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई.

Make in India और आत्मनिर्भर भारत को जमीन पर उतार रहा अल्स्टॉम
सवली संयंत्र वर्तमान में अत्याधुनिक कम्यूटर और ट्रांजिट ट्रेन कारों का निर्माण कर रहा है, जो भारत सरकार की "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" पहलों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है. संयंत्र में काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों की संख्या 3,400 से अधिक है, जो 21 अल्स्टॉम साइट्स के साथ वैश्विक स्तर पर सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं. इस संयंत्र से 2016 के बाद से अब तक 1,002 रेल कारों का सफलतापूर्वक निर्यात किया जा चुका है, जो विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए उपयोग की जा रही हैं. इसके अलावा, सवली संयंत्र से 450 रेल कारें ऑस्ट्रेलिया को क्वींसलैंड मेट्रो परियोजना के लिए निर्यात की गई हैं, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. 

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सवली संयंत्र ने वैश्विक स्तर पर 3,800 से अधिक बोगियों का निर्यात किया है, जिनमें जर्मनी, मिस्र, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश शामिल हैं. इसके साथ ही, 4,000 से अधिक फ्लैटपैक (मॉड्यूल्स) को ऑस्ट्रिया के वियना में भेजा गया है. मानेजा संयंत्र ने 5,000 से अधिक प्रोपल्शन सिस्टम्स का निर्यात कर वैश्विक परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि भारत ने रेलवे निर्माण क्षेत्र में अपने आप को एक भरोसेमंद और सक्षम आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया है.

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भारत इस समय 27 अंतर्राष्ट्रीय सिग्नलिंग परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहा है, और साथ ही 40 अन्य परियोजनाओं में समर्थन भी प्रदान कर रहा है. बैंगलोर का डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर 120 से अधिक परियोजनाओं में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, जिनमें IoT, AI, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. यह केंद्र अगली पीढ़ी की सिग्नलिंग प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी कौशल की पहचान बना रहा है.

भारत के रेल उत्पादों का निर्यात अब बढ़ता जा रहा है. यह "भारत से दुनिया तक डिज़ाइन, डेवलप, और डिलीवर" के दृष्टिकोण का हिस्सा बन चुका है:

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मेट्रो कोच: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा को निर्यात

बोगी: यूके, सऊदी अरब, फ्रांस, और ऑस्ट्रेलिया को भेजी गई

प्रोपल्शन सिस्टम्स: फ्रांस, मेक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली को सप्लाई की गई

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यात्री कोच: मोजाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका को डिलीवर किए गए

लोकोमोटिव: मोजाम्बिक, सेनेगल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश और गिनी गणराज्य को निर्यात किए गए

सवली संयंत्र के आसपास एक मजबूत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसे प्रमुख सप्लायर्स का समर्थन प्राप्त है. इन आपूर्तिकर्ताओं में इंटेग्रा, एनोवी, हिंद रेक्टिफायर, हिटाची एनर्जी और एबीबी जैसे प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं, जो निर्माण, इंटीरियर्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं. इस नेटवर्क की वजह से सवली क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़े हैं.

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मेक इन इंडिया" और "मेक फॉर द वर्ल्ड का सपना हो रहा साकार

मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री ने कहा कि "मेक इन इंडिया" और "मेक फॉर द वर्ल्ड" पहल का असर भारतीय रेलवे के निर्माण क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे द्वारा विभिन्न देशों में रेलवे घटकों का निर्यात, न केवल भारत की वैश्विक पहचान को बढ़ा रहा है, बल्कि भारतीय इंजीनियरों और श्रमिकों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दक्षताएं भी दे रहा है. उन्होंने इसे "मेक इन इंडिया" मिशन की बड़ी सफलता के रूप में स्वीकार किया.

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इस प्रकार, भारत अब रेलवे उपकरणों के निर्माण और निर्यात में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है, जो न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता को साबित कर रहा है.

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