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'राहुल गांधी को सदन के नियम मानने ही होंगे...', अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद बोले ओम बिरला, किसे दी वॉर्निंग!

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन की गरिमा और मर्यादा बनी रहे. उन्होंने कहा कि संसद में सभी सदस्यों को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाता है.

Om Birla
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लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को अपना आसन संभाला. उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि होती रहे. उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है और सदन की कार्यवाही हमेशा नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही चलती है.

सभी सदस्यों को बोलने का अवसर देने की कोशिश

लोकसभा स्पीकर ने कहा, 'मैंने हमेशा प्रयास किया कि सदन के अंदर हर सदस्य नियमों और प्रक्रिया के तहत विषय और मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करे. सभी सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने की कोशिश की गई. यह सदन समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बने, ऐसा मेरा प्रयास रहा है.' उन्होंने बताया कि जो सदस्य संकोच करते हैं या कम बोलते हैं, उन्हें भी सदन में बोलने के लिए प्रेरित किया जाता है. उन्होंने कहा कि अपने दोनों कार्यकाल में कई बार उन्होंने ऐसे सदस्यों को अपने चैंबर में बुलाकर सदन में अपनी बात रखने का आग्रह किया.

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लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम है संसद

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ओम बिरला ने कहा कि सदन में बोलने से लोकतंत्र का संकल्प मजबूत होता है और सरकार की जवाबदेही भी तय होती है. उन्होंने कहा कि संसद विचार और चर्चा का जीवंत मंच है और हमारे संसदीय लोकतंत्र में सहमति और असहमति की महान परंपरा हमेशा से रही है. उन्होंने कहा कि जब संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्र भारत के लिए संविधान बनाया, तब गहन विमर्श और अनुभव के आधार पर संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था को अपनाया गया. आज दुनिया में संसदीय लोकतंत्र को शासन चलाने की सर्वश्रेष्ठ पद्धति माना जाता है। इस व्यवस्था में संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्र की लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र भी है.

दूसरी बार अध्यक्ष बनने पर जताया आभार

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स्पीकर ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 93 में अध्यक्ष के निर्वाचन का प्रावधान है. उन्हें इस सदन ने दूसरी बार अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी है. उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा कोशिश की कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के तहत संचालित हो.

अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिन चली चर्चा

अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए ओम बिरला ने कहा कि मंगलवार को विपक्ष के कुछ सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था. उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था में उनका हमेशा अटूट विश्वास रहा है. उन्होंने बताया कि नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन की कार्यवाही से खुद को अलग कर लिया था. पिछले दो दिनों में सदन ने लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा किया. इस दौरान विभिन्न सदस्यों ने अपने विचार, दृष्टिकोण और भावनाएं सदन के सामने रखीं.

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संसदीय इतिहास में तीसरी बार आया ऐसा प्रस्ताव

स्पीकर ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई है. इस दौरान लगभग 12 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई, ताकि सभी सदस्यों के विचार और चिंताएं सदन के सामने आ सकें.

विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब

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अपने संबोधन में ओम बिरला ने विपक्ष के उस आरोप का भी जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि विपक्ष को सदन में बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जाता. उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत चलती है और किसी भी सदस्य को बोलने से पहले स्पीकर की अनुमति लेना अनिवार्य होता है. उन्होंने यह भी कहा कि संसद में कोई भी फोटो, दस्तावेज, उद्धरण या छपी हुई सामग्री पेश करने से पहले स्पीकर की अनुमति लेनी होती है. कई बार इन नियमों का पालन न होने के कारण उन्हें कठिन फैसले लेने पड़ते हैं.

संसद में सभी के लिए नियम समान

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संसद में सभी के लिए नियम समान हैं और कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले नोटिस देना पड़ता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चेयर के पास ऐसा कोई बटन नहीं होता जिससे किसी सांसद का माइक बंद या चालू किया जा सके. सदस्य तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी आती है.

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सांसदों के निलंबन पर क्या बोले स्पीकर

सांसदों के निलंबन को लेकर उठे सवालों पर ओम बिरला ने कहा कि वे किसी भी सदस्य को निलंबित करना नहीं चाहते, लेकिन कभी-कभी सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसे फैसले लेने में दुख होता है, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि आखिर निलंबन की नौबत क्यों आती है. जब संसद के नियमों का उल्लंघन होता है, तब मुझे अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है.'

140 करोड़ लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है सदन

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स्पीकर ने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है. यहां आने वाला हर सांसद लाखों नागरिकों के जनादेश के साथ आता है और उनकी समस्याओं को दूर करने तथा उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी लेकर आता है. अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि वे उन सभी सांसदों के आभारी हैं, जिन्होंने उनकी कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे संसद की संवैधानिक गरिमा और मर्यादा बनाए रखने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेंगे.

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