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राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें...जनरल नरवणे की अनपब्लिश्ड बुक मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR, शुरू की जांच
दिल्ली पुलिस ने जनरल एम.एम. नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब मामले में FIR दर्ज कर ली है. ये बुक कैसे लीक हुई, इसकी भी जांच शुरू कर दी गई है. अगर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े की बात सामने आती है तो राहुल गांधी, पब्लिशिंग हाउस और लेखक पर भी कार्रवाई हो सकती है.
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दिल्ली पुलिस ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे द्वारा लिखित अप्रकाशित पुस्तक ‘Four Stars of Destiny’ के कथित अनधिकृत प्रसार को गंभीरता से लेते हुए इस मामले में एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने यह कार्रवाई उस सूचना के आधार पर की है, जिसमें बताया गया था कि पुस्तक की प्री-प्रिंट कॉपी बिना आधिकारिक अनुमति के ऑनलाइन प्रसारित की जा रही है, जबकि इसके प्रकाशन के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमोदन अब तक प्राप्त नहीं हुआ है.
बढ़ सकती है राहुल गांधी की मुश्किलें!
आपको बताएं कि पुलिस की जांच के बाद राहुल गांधी, पूर्व आर्मी चीफ नरवणे और प्रकाशक यानी कि पब्लिशिंग हाउस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. बतौर आर्मी सर्विस कोई किताब लिखता है तो उसे उसकी बाकायदा इजाजत लेनी होती है. उसे टेक्स्ट की कॉपी आर्मी इंटेलिजेंस, आर्मी मुख्यालय और रक्षा मंत्रालय को भेजनी होती है. वहां से क्लियर होने, NOC सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही कोई किताब छपती है.
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ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत हो सकती है कार्रवाई
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ऐसा इसलिए कि उसकी जानकारी से कहीं देश और सेना के हित को नुकसान ना पहुंचे और ना ही दुश्मन इसका इस्तेमान अपनी नीति निर्धारण, रणनीति के लिए करे. ऐसे में अगर ऐसा कोई करता है तो उस पर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत कार्रवाई भी हो सकती है. ऐसे में अगर जनरल नरवणे ने इजाजजत ली या नहीं, प्रकाशक ने बिना इजाजत किताब कैसे छापी, कैसे बांटी, कैसे लीक की गई और राहुल गांधी ने कैसे ये किताब लहरा दी...तीनों ही परिस्थिति में केस इसी सेक्शन के आधार पर दर्ज हो सकता है.
क्या जा सकती है राहुल गांधी की सांसदी!
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ऐसे में अगर जांच होती है, केस की पुष्टि हो जाती है तो कार्रवाई भी हो सकती है. इस एक्ट के तहत तीन साल या उससे ज्यादा समय की सजा भी होती है. ऐसे में अगर 2 साल से ज्यादा समय के लिए सजा होती है तो जन प्रतिनिधि की सांसदी या सदस्यता भी जा सकती है. इस लिहाज से अब पुलिस की जांच पर पूरा मामला टिक गया है.
पब्लिशिंग हाउस के खिलाफ जांच!
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कई न्यूज वेबसाइट्स पर यह जानकारी सामने आई कि पुस्तक का प्री-प्रिंट संस्करण इंटरनेट पर उपलब्ध है. प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इसी शीर्षक वाली एक टाइपसेट पीडीएफ कॉपी कुछ वेबसाइटों पर मौजूद है, जिसे कथित तौर पर *पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड* द्वारा तैयार किया गया बताया जा रहा है. इसके अलावा, कुछ ई-कॉमर्स और ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स पर किताब का अंतिम कवर इस तरह प्रदर्शित किया गया था, जिससे यह प्रतीत हो रहा था कि पुस्तक पहले से ही बिक्री के लिए उपलब्ध है.
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मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कथित लीक और नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए इसे स्पेशल सेल को सौंप दिया है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह सामग्री कैसे सार्वजनिक हुई, किस माध्यम से इसे ऑनलाइन अपलोड किया गया और क्या इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका है. जांच एजेंसियां पीडीएफ कॉपी के स्रोत और उसके प्रसार से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं और संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के साथ समन्वय भी किया जा रहा है.
किताब को नहीं मिली थी हरी झंडी!
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पुलिस ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि पुस्तक के प्रकाशन के लिए अब तक आवश्यक आधिकारिक स्वीकृतियां नहीं ली गई हैं. इसके बावजूद पुस्तक से जुड़ी सामग्री का सार्वजनिक होना गंभीर नियम उल्लंघन की ओर इशारा करता है. इसी कारण मामले को औपचारिक रूप से दर्ज कर जांच शुरू की गई है.
जनरल नरवणे की किताब पर संसद में संग्राम
यह पूरा घटनाक्रम एक बड़े राजनीतिक विवाद का कारण भी बन गया है. उल्लेखनीय है कि यह मामला उस घटना के लगभग एक सप्ताह बाद सामने आया है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद परिसर के अंदर इस पुस्तक की कथित प्रति पकड़े हुए देखा गया था. इसके बाद संसद में हंगामा हुआ और लोकसभा की कार्यवाही बाधित हो गई. विवाद के चलते बजट सत्र के शेष समय के लिए आठ सांसदों को निलंबित भी कर दिया गया.
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दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है. पुलिस यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि जनरल नरवणे की इस अप्रकाशित पुस्तक से जुड़ी सामग्री किन परिस्थितियों में सार्वजनिक हुई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी.