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राहुल गांधी ने मोदी-अडानी का मुखौटा पहनाकर उठाए सवाल, बीजेपी ने किया जोरदार पलटवार

अडानी मुद्दे पर संसद में चर्चा न होने से नाराज कांग्रेस ने एक अनोखे प्रदर्शन का सहारा लिया। राहुल गांधी ने संसद परिसर में पीएम मोदी और अडानी का मुखौटा लगाए अपने सांसदों से सवाल-जवाब किए। इस दौरान उन्होंने सरकार और अडानी समूह के कथित गठजोड़ पर तंज कसा।

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अडानी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच जारी सियासी घमासान ने सोमवार (9 दिसंबर 2024) को नया मोड़ ले लिया। संसद में चर्चा की अनुमति न मिलने से नाराज कांग्रेस ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा।

संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी पर निशाना साधने के लिए मुखौटों का सहारा लिया। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और अडानी का मुखौटा लगाए अपने सांसदों से सवाल-जवाब किए। प्रदर्शन के दौरान शिवाजी कालगे ने मोदी का, जबकि मणिकम टैगोर ने अडानी का मुखौटा पहना। इस वीडियो में राहुल गांधी ने तंज भरे सवाल पूछते हुए दोनों के बीच कथित गठजोड़ पर कटाक्ष किया।

राहुल गांधी ने सवालों की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में की, लेकिन उनके हर सवाल के पीछे गहरा संदेश छिपा था। राहुल गांधी ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में यह बताने की कोशिश की कि मोदी सरकार और अडानी समूह के बीच कथित सांठगांठ देश के संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है।
बीजेपी का पलटवार
इस वीडियो के वायरल होते ही बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, "यह बेहद शर्मनाक है कि आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संसद में मुखौटा पहनकर प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत कटाक्ष कर रहे हैं। कांग्रेस अब हताश और अस्तित्व के संकट से जूझ रही पार्टी बन गई है।" बीजेपी ने कांग्रेस पर देश के लोकतांत्रिक मूल्यों का मजाक उड़ाने और विदेशी ताकतों के साथ खड़े होने का आरोप लगाया।
सियासी जंग की वजह
अडानी समूह पर लगे आरोप और राहुल गांधी का यह प्रदर्शन केवल एक घटना नहीं है। यह उस राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाती रही है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों और संसाधनों का दुरुपयोग किया। एयरपोर्ट, बंदरगाह, बिजली क्षेत्र जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अडानी समूह को मिले अनुबंधों को कांग्रेस ‘भ्रष्टाचार’ का उदाहरण बताती है। यह प्रदर्शन विपक्ष की नई रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है, जो जनता का ध्यान अपनी ओर खींचने और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है। हालांकि, बीजेपी इसे कांग्रेस की हताशा का परिणाम बताती है।

इस पूरे प्रकरण में जनता का ध्यान इस बात पर है कि क्या विपक्ष के आरोपों में दम है, या यह सिर्फ राजनीति का एक और अध्याय है। ऐसे प्रदर्शन सवाल तो खड़े करते हैं, लेकिन क्या वे समाधान की ओर ले जाते हैं?
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