Advertisement

Loading Ad...

Modi से नफरत में Rahul Gandhi ने हद पार कर दी, पत्रकार रोमाना खान ने क्लास लगा दी !

भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में कितनी कड़वाहट है। ये बात तो आप जानते ही हैं लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई के लिए धन्यवाद दिया। तो वहीं दूसरी तरफ दशकों तक देश की सत्ता संभालने वाले गांधी परिवार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने के लिए एक शब्द तक नहीं आया।

Loading Ad...

आपको क्या लगता है लगातार तीसरी बार हिंदुस्तान की सत्ता संभाल रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सबसे ज्यादा नफरत कौन करता होगा? पाकिस्तान या फिर राहुल गांधी ? आपका सीधा सा जवाब होगा पाकिस्तान क्योंकि जिस प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) के एक इशारे पर देश की सेना ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की, एयर स्ट्राइक की और फिर पूरे चुनाव में खुद सीएम योगी ने पाकिस्तान से पीओके लेने की डेडलाइन दी, वो पाकिस्तान भला मोदी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की बधाई क्यों देगा।यकीन मानिये इतना कुछ होने के बावजूद जब चार जून को नतीजे आए और नौ जून को नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 

राहुल ने तो मोदी से नफरत में हद पार कर दी

उसके ठीक अगले ही दिन दस जून को खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें बधाई देते हुए कहा- भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने पर नरेंद्र मोदी को बधाई । और पीएम मोदी ने भी जवाब में कहा-आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद शहबाज शरीफ। भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में कितनी कड़वाहट है। ये बात तो आप जानते ही हैं लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई के लिए धन्यवाद दिया। तो वहीं दूसरी तरफ दशकों तक देश की सत्ता संभालने वाले गांधी परिवार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने के लिए एक शब्द तक नहीं आया। जबकि राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी दोनों ही सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद ना तो राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और ना ही प्रियंका गांधी ने।

Loading Ad...

दोनों नेताओं के व्यवहार से लग रहा है उन्हें ये बात नहीं हजम हो रही है कि नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री कैसे बन गये। अगर ऐसा नहीं होता तो हमारे देश का लोकतंत्र यही कहता है कि चुनाव में भले ही खूब वार पलटवार हो, लेकिन चुनाव के बाद जीत की बधाई देने की परंपरा भी रही है। लेकिन ये लोकतांत्रिक परंपरा लगता है गांधी परिवार भूल गया है। तभी तो उनके इस व्यवहार पर पत्रकार रोमाना ईसार खान भी भड़क गईं और एक ट्वीट में राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा-लोकतंत्र लोकलाज से चलता है, इसके बावजूद अगर सदन में नेता विपक्ष की जिम्मेदारी लेने जा रहे राहुल गांधी नरेंद्र मोदी की सरकार को एक बधाई तक नहीं देते तो कौन सी लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं, क्या मन में कड़वाहट रख कर राजनीतिक रंजिश पाल कर लोकतंत्र मजबूत होगा ?

Loading Ad...

ये शब्द हैं किसी बीजेपी नेता के नहीं हैं ये शब्द एक पत्रकार के हैं।क्योंकि ये बात वो भी जानती हैं कि चुनावी मैदान में खुद की हार के बावजूद जीतने वाले को बधाई देना ही लोकतांत्रिक परंपरा रही है और इस परंपरा को जो निभाए।वही असली नेता होता है, इस मामले में तो नरेंद्र मोदी से राहुल गांधी की कोई तुलना ही नहीं की जा सकती।क्योंकि जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनी,तो उस वक्त बीजेपी के चुनाव हारने के बावजूद पीएम मोदी ने कांग्रेसी नेता सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री पद संभालने पर बधाई दी।

यह भी पढ़ें

जब हिमाचल में बीजेपी को हराकर कांग्रेस सत्ता में आई,उस वक्त भी पीएम मोदी ने चुनावी कड़वाहट भुलाकर सीएम सुक्खू को मुख्यमंत्री पद संभालने पर बधाई दी। यकीन  इतना ही नहीं पिछले साल दिसंबर में जब कांग्रेस ने तेलंगाना में सरकार बनाई और रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री बने,उस वक्त भी पीएम मोदी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए बधाई दी। ये तमाम उदाहरण बता रहे हैं कि चुनावों में भले ही मोदी कांग्रेस को लताड़ते रहे हों लेकिन इसके बावजूद चुनाव खत्म होने के बाद कांग्रेस को सत्ता संभालने के लिए बधाई देना नहीं भूलते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी हैं जिन्हें लोकतांत्रिक परंपराओं का शायद प भी नहीं पता इसीलिये नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ लेने के बावजूद उन्हें बधाई नहीं दी।

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...