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संकट में फंसे पुतिन को मिला मोदी का साथ, रूस के लिए 27 देशों से भिड़ गया भारत, विदेश मंत्रालय की EU को दो टूक

रूस-यूक्रेन जंग को तीन साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन जंग अभी भी जारी है. ट्रंप बार-बार पुतिन को समझाने की कोशिश भी कर रहे लेकिन रुसी राष्ट्रपति उनकी एक नहीं सुन रहे. अब यूरोपीय यूनियन रूस को अलग तरीके से घेरने की कोशिश में लगी है. इसमें 27 देश शामिल है. लेकिन इस मुसीबत की घड़ी में भारत अपने मित्र रूस के साथ मजबूती से खड़ा है.

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यूक्रेन का साथ देने वाले यूरोपीय यूनियन ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. इससे पुतिन की मुसीबत बढ़ जाएगी. रूस को अकेले 27 देशों ने घेरा है. नए प्रतिबंध लगाकर रूस पर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध खत्म करने का दबाव बनाया है. 

यूरोपीय यूनियन ने रूस पर लगाया प्रतिबंध 

यूरोपीय यूनियन ने शुक्रवार को रूस के खिलाफ अपना 18वां प्रतिबंध पैकेज जारी किया है. इसका मकसद रूसी तेल निर्यात से होने वाली आय को कम करना है. यानी ये फैसला पुतिन के पर कतरने के समान है. इसका कारण है तेल के आय से ही रूस अबतक युद्ध में टिका है. सैंक्शन पैकेज में सबसे प्रमुख है रूसी कच्चे तेल पर एक नया ‘मूविंग प्राइस कैप’, जो बाजार मूल्य से 15% कम होगा. अपने नए प्रतिबंधों से ईयू ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र, पुराने तेल टैंकरों के बेड़े और सैन्य खुफिया सेवा के कर्मियों को निशाना बनाया. इसमें भारत में रूस की रोसनेफ्ट के स्वामित्व वाली वडिनार रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया है.

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रूस के साथ मजबूती से खड़ा है भारत 

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रूस पर यूरोपीय यूनियन के इस एक्शन पर भारत अपने दोस्त के साथ खड़ा है. भारत अपने दोस्त रूस के लिए संकटमोचक के रूप में उभरा है. भले ही किसी ने अब तक यूरोपीय यूनियन को जवाब नहीं दिया, मगर रूस के साथ खड़ा होकर भारत ने जवाब दिया है. भारत ने यूरोपीय यूनियन (EU) के इस कदम की कड़ी आलोचना की और इसे ‘दोहरा मापदंड’ करार दिया.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत एकतरफा सैंक्शनों का समर्थन नहीं करता. ऊर्जा व्यापार में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए. हमारी प्राथमिकता 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है."

इस तरह से भारत ने साफ कर दिया है कि वह ऐसी घड़ी में रूस के साथ है. भारत का यह स्टैंड सीधे-सीधे यूरोपीय यूनियन और पश्चिमी देशों की उस नीति पर सवाल उठाता है, जहां वे खुद ऊर्जा खरीद जारी रखते हैं, मगर अन्य देशों पर प्रतिबंधों का पालन करने का दबाव डालते हैं. अमेरिका समेत वेस्टर्न कंट्री भी भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बनाते आए हैं. मगर भारत भी अब पहले वाला भारत नहीं. भारत ने सबको मुंहतोड़ जवाब दिया है और कहा है कि भारत का जहां से मन होगा वहां से तेल खरीदेगा.

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भारत के पैसों पर टिका है रूस-यूक्रेन युद्ध?

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ईयू और अमेरिका का दावा है कि भारत के तेल वाले पैसे का यूज रूस युद्ध में कर रहा है. इन दोनों का दावा है कि भारत के तेल खरीदने से रूस को युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने का मौका मिलता है. जबकि इसके जवाब में भारत ने तर्क दिया कि पश्चिमी देश स्वयं रूसी गैस और तेल उत्पादों का आयात जारी रखे हुए हैं, खास तौर पर स्पेन और बेल्जियम जैसे देश रूसी एलएनजी के बड़े खरीदार हैं. भारत 2022 से रूस से कच्चे तेल के आयात को लगातार बढ़ा रहा है. यह एक मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गया है. जो युद्ध से पहले करीब शून्य था. यह तेल रियायती दरों पर खरीदा जाता है, जिससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है. 

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