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राष्ट्रपति का ‘अपमान’ कर बुरी फंसी ममता सरकार! गृह मंत्रालय ने मांग लिया जवाब, अमित शाह ने कहा- ये निचला स्तर
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले में गृह मंत्रालय ने कड़ी नाराजगी जताई है. पश्चिम बंगाल सरकार से राष्ट्रपति के दौरे से जुड़े चार पॉइंट्स पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.
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पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे में प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा रहा है. PM मोदी के इस पूरे प्रकरण की निंदा करने के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है. गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से मामले की पूरी जानकारी मांगी है. जो आज शाम तक ही देनी होगी. इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे में किए गए प्रोटोकॉल, कार्यक्रम स्थल, यात्रा मार्ग और सुरक्षा समेत अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े सभी पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है.
गृह मंत्रालय ने जताई नाराजगी
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दावा है कि पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने आईं प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू को प्रोटोकॉल के तहत राज्य सरकार के किसी अधिकारी या प्रतिनिधि ने रिसीव नहीं किया. इसे राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े ‘ब्लू बुक’ नियमों के तहत प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा रहा है.
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नियम कहते हैं कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और DGP में से किसी की मौजूदगी रहनी चाहिए, लेकिन बंगाल में महामहिम द्रौपदी मुर्मू का स्वागत केवल सिलीगुड़ी के मेयर ने किया. इस पर गृह मंत्रालय ने नाराजगी जताई है. कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सवाल राष्ट्रपति के वेन्यू के इंतजामों पर भी उठ रहे हैं.
अमित शाह, PM मोदी ने जताई नाराजगी
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इस घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे मामले को बेहद शर्मनाक बताया है. PM मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया. PM ने लिखा, ‘राष्ट्रपति के साथ हुआ व्यवहार बेहद शर्मनाक है. जो लोग लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखते हैं, वे इस घटना से आहत और निराश हैं. राष्ट्रपति खुद आदिवासी समाज से आती हैं और उनके द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा ने देश के लोगों के मन को भी दुखी किया है.’
PM मोदी ने TMC सरकार पर कड़ा निशाना साधते हुए कहा, राज्य प्रशासन ने सारी हदें पार कर दी हैं. राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और उसकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में समझदारी से काम करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जाएगा.
वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने भी नाराजगी जताते हुए कहा, पश्चिम बंगाल की TMC सरकार ने अराजक व्यवहार करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान कर एक नया निचला स्तर छू लिया है. कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की खुली अनदेखी कर राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है.
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CM ममता बनर्जी ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. इस घटनाक्रम ने लोकतंत्र, संवैधानिक पदों की गरिमा और आदिवासी समुदाय के सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने क्या आरोप लगाए थे?
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दरअसल, 7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुईं थीं. इस दौरान महामहिम पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार से बेहद खफा दिखीं. उन्होंने CM पर आदिवासियों के अपमान का आरोप भी लगाया.
नॉर्थ बंगाल में इंटरनेशनल आदिवासी कॉन्क्लेव के लिए परमिशन नहीं दी गई. जिस पर प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू ने नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, ‘संथालों को वेन्यू तक पहुंचने से रोक दिया गया था.’ द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल प्रशासन पर प्रोटोकॉल फॉलो न करने का आरोप भी लगाया. दावा है कि राष्ट्रपति को अगवानी के लिए राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद नहीं था. इसके बाद उनकी नाराजगी और बढ़ गई.
ममता सरकार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने क्या कहा?
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दरअसल राष्ट्रपति को मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में कार्यक्रम को संबोधित करना था, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी. इसलिए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया. अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह मूल स्थल पर गईं और वहां अपनी बात रखी. महामहिम मुर्मू ने कहा, ‘पता नहीं प्रशासन के मन में क्या था, हम तो आसानी से यहां आ गए. वहां हालात बहुत ज्यादा कंजस्टेड हैं, लेकिन यहां तो मुझे लगता है कि 5 लाख लोग आसानी से इकट्ठे हो सकते हैं. पता नहीं हमें वहां किसलिए ले गए.’ राष्ट्रपति ने आगे कहा, वे अपने भाई-बहनों के पास जाकर उनके हालात देखना चाहती थीं, लेकिन प्रशासन ने अड़ंगा डाला. दरअसल, ममता सरकार पर आरोप है कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन को उत्तर बंगाल में आयोजित करने की इजाजत नहीं दी, ये पता होते हुए भी कि राष्ट्रपति इसमें चीफ गेस्ट थीं.
‘ममता बनर्जी को मेरे साथ होना चाहिए था’
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भावुक होकर कहा, उन्हें (ममता बनर्जी) मेरे कार्यक्रम में साथ होना चाहिए था. मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है. ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं, शायद वह मुझसे नाराज हैं. इसीलिए मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहां (गोशाईपुर) जाना पड़ा. कोई बात नहीं, मुझे इस बात का कोई गुस्सा या नाराजगी नहीं है.
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहले से नाराज थीं रही सही कसर ममता सरकार के अधिकारियों ने पूरी कर दी. सरकार का कोई नुमांईंदा उन्हें रिसीव करने नहीं पहुंचा. जिसे प्रोटोकॉल का बड़ा उल्लंघन माना जा रहा है. इस घटनाक्रम के बाद बंगाल की राजनीतिक पारा गर्मा गया और सरकार पर कई सवाल खड़े हो गए.
BJP ने साधा निशाना
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राष्ट्रपति मुर्मू की नाराजगी के बाद BJP ने ममता सरकार को आड़े हाथों लिया. BJP आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, आज पश्चिम बंगाल में घटी घटनाओं से ममता बनर्जी सरकार के नेतृत्व में संवैधानिक ढांचे के पूर्ण पतन का संकेत मिलता है. एक दुर्लभ और अभूतपूर्व घटनाक्रम में, भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने सिलीगुड़ी यात्रा के दौरान तैयारियों और प्रोटोकॉल के अभाव पर खुले तौर पर नाराजगी व्यक्त की. इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय संथाली सम्मेलन के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया, जहां स्वयं राष्ट्रपति मुख्य अतिथि थीं.’