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मार्च 2026 तक नक्सलवाद, 2029 तक आतंकवाद का खात्मा तय, मोदी सरकार की 'PRAHAR' नीति, आंतक के पैरोकारों की टूटेगी कमर

मोदी सरकार ने नक्सलियों के खात्मे के बाद अब आतंकवाद और उनके पैरोकारों को जड़ से समाप्त करने की रणनीति अपनाई है. 'प्रहार' नीति के जरिए स्पष्ट कर दिया गया है कि आतंकियों को बौद्धिक, वित्तीय सहित अन्य रूप से पोषित करने वालों को किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा.

Modi Govt Unveils PRAHAR Policy
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केंद्र की मोदी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से लाल आतंक और नक्सल समस्या को हर कीमत पर जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया है. सुरक्षाबलों को पूरी छूट दी गई है और टार्गेट दिया गया है कि वो तय सीमा के अंदर नकस्लियों का खात्मा करें, चाहे जैसी नीति अपनानी परे. सरेंडर, पुनर्वास से लेकर हथियार के बल पर, जो जैसी भाषा में समझेगा, उसे वैसी ही भाषा में समझाया जाएगा. इसके बाद अब सरकार ने आतंकवाद के खात्मे को लेकर भी अपनी नीति स्पष्ट कर दी है. ये अपने आप में देश की पहली नीति होगी जो आतंकवाद, कट्टरपंथ, जिहाद, क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म सहित हर प्रकार की समस्या को डील करेगी.

आपको बताएं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सोमवार को भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति 'प्रहार' की घोषणा की है. यह आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने के देश के दीर्घकालिक प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

गृह मंत्रालय ने 'प्रहार' नामक देश की पहली व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति पेश की है, जो सीमा पार आतंकवाद, ड्रोन हमलों, साइबर खतरों और संगठित आतंकी नेटवर्क सहित उभरते और जटिल सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक संरचित राष्ट्रीय ढांचा स्थापित करती है. यह दस्तावेज आतंकवाद से निपटने में भारत के दशकों के अनुभव और नेतृत्व को दर्शाता है और आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से जोड़ने के किसी भी प्रयास को दृढ़ता से खारिज करता है.

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क्या है ‘प्रहार’?

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रहार यह भारत की पहली यूनिफॉर्म (एक समान) राष्ट्रीय एंटी-टेरर पॉलिसी है. पहले अलग-अलग एजेंसियां अपने स्तर पर काम करती थीं, अब एक स्पष्ट राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया है ताकि आतंकवाद से लड़ाई संगठित और समन्वित तरीके से हो. यह नीति आतंकवाद और हिंसा के प्रति सरकार के अटूट जीरो टॉलरेंस के दृष्टिकोण को दोहराती है, साथ ही पीड़ितों के प्रति समर्थन पर बल देती है और किसी भी परिस्थिति में आतंकी कृत्यों के औचित्य को अस्वीकार करती है.

मोदी सरकार को क्यों लानी पड़ी विस्तृत-लिखित आतंकवाद विरोधी नीति?

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सरकार का तर्क है कि चुकि दुनिया में आतंकवाद का तरीका बदल रहा है. पहले सीमा पार आतंकवाद होते थे, अब स्लीपर सेल्स, लोन वुल्फ, इंटरनल एसेट्स के जरिए आतंकी वारदात को अंजाम दिया जाता है. अब ड्रोन, सोशल मीडिया, एन्क्रिप्शन, डार्क वेब, क्रिप्टो जैसे आधुनिक साधनों का इस्तेमाल हो रहा है. इतना ही नहीं ग्लोबलाइज्ड वर्ल्ड में सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद और स्लीपर सेल जैसी चुनौतियां बढ़ी हैं. ऐसे में सरकार का मानना है कि इन बदलते खतरों से निपटने के लिए नई रणनीति जरूरी थी. इसलिए तो सरकार ने इस नीति के तहत खतरे के दायरे को बढ़ा दिया गया है. इसी के तहत निजी कंपनियां और डिजिटल सिस्टम भी अब सुरक्षा ढांचे का हिस्सा हैं.

‘प्रहार’ शब्द, जिसका अर्थ “हमला” है, भारत के आतंकवाद-विरोधी ढांचे के सात प्रमुख स्तंभों का प्रतिनिधित्व करता है: आतंकवादी हमलों की रोकथाम, त्वरित और उचित प्रतिक्रिया, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों में क्षमता निर्माण, मानवाधिकारों के अनुरूप संचालन सुनिश्चित करना, कट्टरता को बढ़ावा देने वाली स्थितियों का समाधान करना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और सामाजिक लचीलेपन और पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देना. आठ पृष्ठों का इस नीति का दस्तावेज गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया है.

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प्रहार नीति के मुख्य लक्ष्य क्या हैं?

  • सरकार की इस प्रकार की पहली एंटी टेरर नीति के मकसद की बात करें तो इसका मुख्य और कोर उद्देश्य है आतंकी हमलों को होने से पहले ही रोक देना.
  • प्रीएम्ट  (Prevention) कर, खतरे को भांप कर रोकना. 
  • इसके अलावा हमला होने पर तुरंत और संतुलित जवाब देना.
  • आतंक विरोधी कार्रवाई में सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना.
  • आतंकियों की फंडिंग, हथियार और ठिकाने खत्म करना.
  • कानून और मानवाधिकारों का पालन करते हुए कार्रवाई.
  • कट्टरपंथ (Radicalization) रोकना.
  • कट्टरपंथियों पर भी कसी जाएगी नकेल!

क्षेत्रीय अस्थिरता, अराजक क्षेत्रों के अस्तित्व और स्टेट-प्रायोजित आतंकवाद के मामलों को उजागर करते हुए, यह रणनीति रोकथाम, त्वरित और उचित प्रतिक्रिया, अंतर-एजेंसी समन्वय में सुधार और मानवाधिकारों तथा कानून के शासन का कड़ाई से पालन करने पर केंद्रित बहुस्तरीय दृष्टिकोण अपनाती है. इसमें बताया गया है कि भारत का रुख स्पष्ट है कि आतंकवाद के किसी भी रूप को उचित नहीं ठहराया जा सकता, और देश आतंकवाद को किसी भी धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता. यह नीति नागरिकों की सुरक्षा, मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के शासन के तहत स्थापित कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता पर आधारित है.

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प्रहार में टेक्नोलॉजी पर खास फोकस

  • सरकार ने माना है कि ड्रोन से हथियार गिराए जा रहे हैं (खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में)
  • सोशल मीडिया से भर्ती और प्रचार हो रहा है.
  • डार्क वेब और क्रिप्टो से फंडिंग हो रही है.
  • इसलिए टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी और जवाबी रणनीति पर जोर दिया गया है.

सीमा पार आतंकवाद एक बड़ा खतरा बना हुआ है, जिसमें चरमपंथी समूह और उनसे जुड़े नेटवर्क हमले करने की कोशिश कर रहे हैं. अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठन स्लीपर सेल को सक्रिय करने और देश के भीतर हिंसा भड़काने के प्रयास जारी रखे हुए हैं.

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विदेशी तत्वों पर आंतरिक सुरक्षा को अस्थिर करने का भी आरोप लगाया गया है, जबकि आतंकवादी संचालक तेजी से ड्रोन सहित उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, विशेष रूप से पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में. दस्तावेज में आतंकी नेटवर्क और संगठित अपराध समूहों के बीच बढ़ते तालमेल का उल्लेख किया गया है, जो रसद, भर्ती और वित्तीय प्रवाह को सुगम बनाते हैं.

प्रहार के तहत एंटी टेरर अभियान में कौन-कौन एजेंसियां अहम भूमिका निभाएंगी?

  • MAC (Multi Agency Centre) - रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग
  • NSG - राष्ट्रीय स्तर पर आतंकरोधी बल
  • NIA - आतंकी मामलों की जांच
  • राज्य पुलिस - पहली प्रतिक्रिया बल

डिजिटल प्लेटफॉर्म आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रमुख साधन बनकर उभरे हैं, जो सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन, डार्क वेब प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से गुमनाम संचार की सुविधा प्रदान करते हैं. इनका उपयोग प्रचार-प्रसार, भर्ती, वित्तपोषण और परिचालन समन्वय के लिए किया जाता है.

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जैविक, केमिकल हथियारों के खतरों को लेकर गंभीर सरकार!

रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और साइबर क्षमताओं तक पहुंच प्राप्त करने के प्रयासों के साथ-साथ गैर-सरकारी तत्वों और शत्रुतापूर्ण संस्थाओं द्वारा साइबर घुसपैठ के बढ़ते खतरे को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की गई हैं.

आतंक के हर एक तंत्र पर होगा 'प्रहार'!

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सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी समर्थन तंत्रों को नष्ट करने का दायित्व सौंपा गया है, जिनमें भूमिगत कार्यकर्ता नेटवर्क, अवैध हथियार आपूर्ति श्रृंखलाएं और आतंकी वित्तपोषण चैनल शामिल हैं. सीमा सुरक्षा उपायों में भूमि, समुद्री और हवाई क्षेत्रों में उन्नत निगरानी और पहचान प्रौद्योगिकियों की तैनाती शामिल है.

रेलवे, विमानन नेटवर्क, बंदरगाह, रक्षा सुविधाएं, अंतरिक्ष परिसंपत्तियां और परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान सहित महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को इस ढांचे के तहत बेहतर सुरक्षा प्रदान की जाएगी. प्रतिक्रिया तंत्र के तहत, आतंकी घटनाओं में स्थानीय पुलिस बल प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करेंगे, जिन्हें विशेष राज्य आतंकवाद-विरोधी इकाइयों और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड जैसे विशिष्ट राष्ट्रीय बलों द्वारा प्रमुख अभियानों में सहायता प्रदान की जाएगी. आतंकवाद से संबंधित अपराधों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की जाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना और उच्च दोषसिद्धि दर प्राप्त करना होगा.

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शाह की प्रहार नीति की कुछ और अहम बातें!

  • कट्टरपंथ रोकने की रणनीति, समुदाय के नेताओं और NGO की भागीदारी.
  • जेलों में कट्टरपंथ रोकना, युवाओं और महिलाओं के लिए शिक्षा व रोजगार कार्यक्रम.
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आतंकवाद अब वैश्विक समस्या है.
  • खुफिया जानकारी साझा करना, प्रत्यर्पण समझौते यानी कि भगौड़ों का वापस लाना.
  • वैश्विक स्तर पर आतंकियों को सूचीबद्ध कराना.

क्या संदेश है?

यह भी पढ़ें

  • सरकार ने साफ किया है कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाएगा, लेकिन ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी
  • भारत की विश्वसनीयता और सुरक्षा ढांचा मजबूत करने की तैयारी.

कुल मिलाकर देखें तो ‘प्रहार’ एक व्यापक, संगठित और टेक्नोलॉजी-आधारित रणनीति है, जिसका मकसद आतंकवाद को जड़ से खत्म करना और भविष्य के खतरों के लिए देश को तैयार रखना है. इतना ही नहीं आतंकवाद के साथ-साथ आतंकवाद के पैरोकारों, समर्थकों, बौद्धिक, वित्तीय रूप से पोषित करवाने वालों की कमर तोड़ने की नीति अपनाई जाएगी.

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