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दिल्ली में प्रदूषण का कहर, दिवाली के पटाखों और धुएं ने हवा को बनाया ज़हरीला, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

दिवाली के जश्न के बाद दिल्ली की हवा में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. AQI बेहद खराब श्रेणी में दर्ज हुआ है और लोगों को N95 मास्क पहनने की सलाह दी गई है. डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी है.

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दिवाली के उल्लासपूर्ण जश्न के बीच दिल्ली-एनसीआर की हवा जहरीली हो चुकी है. पटाखों की धूम के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया है, जहां कई इलाकों में 400-500 तक का स्तर दर्ज किया गया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार सुबह 6 बजे AQI 475 तक पहुंचा, जो 'हैजर्डस' कैटेगरी में आता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों के लिए. डॉक्टरों ने N95 मास्क लगाने, घर के अंदर रहने और एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने की सलाह दी है.

पटाखों ने बढ़ाई मुसीबत, AQI 400 पार

दिवाली की रात सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर पटाखे फूटे, जिससे हवा में PM2.5 और PM10 का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया. CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अक्टूबर रात 10 बजे दिल्ली का औसत AQI 344 था, लेकिन कई स्टेशनों जैसे आनंद विहार (404), वजीरपुर (423) और द्वारका (417) में यह 400 से ऊपर चला गया. निजी एजेंसी AQI.in के अनुसार, 36 में से 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर 'रेड जोन' दर्ज हुआ. विशेषज्ञों का कहना है कि सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों ने हवा को विषैली बना दिया, जिससे धुंधलका छा गया और दृश्यता कम हो गई.

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पराली और वाहनों का योगदान

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पटाखों के अलावा पराली जलाने और वाहनों के धुएं ने प्रदूषण को और गहरा किया. हरियाणा और पंजाब से बहकर आया धुआं, ठंडी हवाओं और कम गति के कारण दिल्ली में जमा हो गया. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के विश्लेषक अनिल कुमार ने कहा, "एक ही रात के पटाखों से AQI 500 पार कर सकता है. " ऐतिहासिक रूप से, दिवाली के समय दिल्ली का AQI 380 तक पहुंच चुका है, जिससे श्वसन रोगों के मामले 15% बढ़ जाते हैं. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में 'गंभीर' स्तर बरकरार रहने का अनुमान जताया है.

अस्पतालों में मरीजों की संख्या उछली

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प्रदूषण के स्तर ने स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है. डॉक्टरों के अनुसार, AQI 400 पर सांस लेना दम घुटने जैसा हो जाता है, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और फेफड़ों की सूजन बढ़ रही है. मेदांता के डॉ. सुशील कटारिया ने कहा, "बच्चों और बुजुर्गों को बाहर न निकलने दें; अगर जरूरी हो तो N95 मास्क लगाएं. " पिछले 24 घंटों में श्वसन संबंधी शिकायतों के केस 20% बढ़े हैं. WHO के मानकों के अनुसार, PM2.5 का स्तर 25 माइक्रोग्राम/घन मीटर से ऊपर खतरनाक है, लेकिन दिल्ली में यह 150 से अधिक हो गया. विशेषज्ञों ने सुबह की सैर बंद करने और एयर प्यूरीफायर चलाने की सलाह दी.

GRAP चरण-2 सक्रिय, लेकिन राहत दूर

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-2 को लागू कर दिया है, जिसमें निर्माण कार्यों पर रोक, सड़कों पर पानी छिड़काव और वाहनों की जांच शामिल है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केवल 'ग्रीन पटाखों' की अनुमति थी (8-10 बजे तक), लेकिन उल्लंघन पर जुर्माना बढ़ाने की योजना है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हवाओं की दिशा बदलने तक सुधार मुश्किल. क्लाउड सीडिंग जैसी तकनीकों पर विचार चल रहा है.

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जागरूकता जरूरीवायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के अनुसार, अगले दो दिनों तक AQI 400-500 के बीच रहेगा. लंबे समय के समाधान के लिए पराली को ऊर्जा स्रोत बनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और पटाखों पर सख्ती की मांग हो रही है. डॉ. अनुपम सिब्बल ने कहा, "N95 मास्क सही फिट वाला चुनें, नकली से बचें. " यदि तत्काल कदम न उठाए गए, तो यह संकट पूरे सर्दी भर खिंच सकता है. सरकार ने किसानों के लिए सब्सिडी वाली मशीनरी उपलब्ध कराई है, लेकिन जागरूकता अभियान तेज करने की जरूरत है. 

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