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Dhami सरकार को लेकर गरमाया सियासी माहौल, मंत्री और विधायक क्यों लगा रहे दिल्ली दौड़ ?

जिस तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सत्ता से हटाए जाने की अटकलों ने जोर पकड़ा था। उसी तरह से पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाओं ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया, उत्तराखंड के मंत्री और नेता आखिर क्यों लगा रहे दिल्ली दौड़, खुल गया राज ?

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जिस तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सत्ता से हटाए जाने की अटकलों ने जोर पकड़ा था, उसी तरह से पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाओं ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया था। खास कर धन सिंह रावत जैसे बीजेपी विधायकों के दिल्ली दौरे से इन अटकलों को और भी बल मिलने लगा। जिसके दम पर मीडिया के कुछ सोकॉल्ड मठाधीश मुख्यमंत्री बदलने की फर्जी खबरें गढ़ने में जुट गये, लेकिन जल्द ही धामी विरोधी इस एजेंडे की हवा निकल गई। क्योंकि उत्तराखंड के बीजेपी विधायकों और मंत्रियों की दिल्ली दौड़ की असली वजह सीएम धामी को कुर्सी हटाना नहीं बल्कि उत्तराखंड सरकार में मंत्रि मंडल विस्तार है।

दरअसल उत्तराखंड सरकार में मुख्यमंत्री समेत बारह सदस्य ही मंत्री मंडल में हो सकते हैं। यही वजह है कि साल 2022 में जब सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लगातार दूसरी बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उस वक्त सीएम धामी के साथ नौ मंत्रियों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी और तीन मंत्री पद खाली छोड़ दिये गये थे। लेकिन कुछ ही दिनों पहले कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास का निधन हो गया था। जिसकी वजह से उत्तराखंड सरकार में चार मंत्री पद खाली हो गये और अब इन्हीं पदों को भरने की चर्चाओं के बीच खुद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कुछ ही दिनों पहले जहां पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, अरविंद पांडेय, बंशीधर भगत, बिशन सिंह चुफाल के साथ ही कई नए और पुराने विधायकों के साथ देहरादून में मुलाकात की थी। तो वहीं इन मुलाकातों के बाद खुद सीएम धामी दिल्ली दौरे पर गये थे। जिसके बाद ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि जल्द ही उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार हो सकता है।

क्यों उड़ी मुख्यमंत्री बदलने की अफवाह ?

उत्तराखंड में जब भी कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालता है, उसके सत्ता संभालने से ज्यादा सत्ता से हटाए जाने की अटकलें लगाई जाती हैं। उत्तराखंड के पिछले 24 साल के सियासी इतिहास में कई मुख्यमंत्रियों को अस्थिरता की इसी तरह की अफवाहों से जूझना पड़ा है। यही वजह है कि प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने के बावजूद सीएम धामी के खिलाफ भी कुर्सी से हटाए जाने का खूब माहौल बनाया गया और ये माहौल बनाने वालों में या तो सो कॉल्ड पत्रकार होते हैं या फिर वो नेता जो सरकार से बाहर होते हैं, या वो मंत्री जो अपनी कुर्सी बचाना चाहते हैं इसीलिये सरकार के खिलाफ अस्थिरता का माहौल बनाने में विरोधियों की मदद करते हैं। लेकिन उत्तराखंड बीजेपी में शामिल ऐसे विभीषणों को एक बात जरूर याद रखनी चाहिए कि ये वही सीएम धामी हैं जिनके नेतृत्व में बीजेपी ने उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर इतिहास रच दिया। क्योंकि उत्तराखंड में भी हिमाचल प्रदेश और राजस्थान की तरह हर पांच साल बाद सत्ता बदलती रहती थी। लेकिन साल 2022 में ये ट्रेंड बदल गया और लगातार दूसरी बार बीजेपी सत्ता में आई। यही वजह है कि दिल्ली दरबार में सीएम धामी का कद बढ़ा हुआ है और दिल्ली दौड़ लगाने वाले बीजेपी नेताओं को बीजेपी आलाकमान ने साफ संदेश दे दिया है कि मंत्री बनना हो या फिर अपना मंत्री पद बचाना हो। आपको हर हाल में सीएम धामी का विश्वास जीतना होगा। तभी कुछ हो पाएगा। इस तरह से दिल्ली दौड़ लगाने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है।

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सीएम धामी को फ्री हैंड !

दिल्ली आलाकमान ये बात जानता है कि उत्तराखंड को पहली बार एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला है,जो जिहादियों पर लगाम लगाना जानता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरी ताकत झोंकना भी जानता है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा। जब लाखों श्रद्धालुओं ने देवभूमि की ओर रुख किया। लेकिन इसके बावजूद धामी सरकार ने बड़े ही व्यवस्थित तरीके से चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा संपन्न कराई। कहीं कोई भगदड़ नहीं हुई और ना ही कोई हादसा हुआ। इतना ही नहीं धामी सरकार ने ही उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने का दम दिखाया। और नौ नवंबर को उत्तराखंड के स्थापना दिवस पर उसे लागू करने भी जा रहे हैं। धामी सरकार अगर धाकड़ फैसले ले रही है, तो इसका मतलब साफ है कि दिल्ली से धामी सरकार को फ्री हैंड मिला हुआ है और यही बात मंत्रिमंडल विस्तार में भी लागू होती है। जिन चार खाली पदों पर मंत्रियों की नियुक्ति होनी है,उन पदों को सीएम धामी को ही भरना है। जिससे वो अपनी टीम मजबूत कर सकें। दिल्ली से कोई दखल नहीं होगा इसी बात से समझ सकते हैं कि उत्तराखंड सरकार में मंत्री पद हासिल करना हो या मंत्री पद बचाना हो। बीजेपी नेताओं को सीएम धामी का विश्वास जीतना होगा और हां जो लोग धामी की कुर्सी जाने का फर्जी एजेंडा चला रहे थे। कम से कम उनको भी ये बात जान लेनी चाहिए कि जब तक धानी सरकार पर बीजेपी आलाकमान का हाथ है। सीएम धामी को कुर्सी से हटाना आसान नहीं है। 

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