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सदन में अमित शाह के तेवरों से खुश हुए PM मोदी, बोले- यही है लोकतंत्र की ताकत

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर विपक्ष के आरोपों का अमित शाह ने तथ्यों के साथ जवाब दिया. पीएम मोदी ने शाह के भाषण की सराहना करते हुए इसे लोकतंत्र की मजबूती बताने वाला बताया. उनके पोस्ट के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है.

Amit Shah/ Narendra Modi
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देश की राजधानी दिल्ली में मौसम भले ही ठंडा होता जा रहा है, लेकिन राजनीतिक माहौल लगातार गर्माहट बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी वजह संसद का शीतकालीन सत्र है, जिसमें कई अहम मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नोंकझोंक देखने को मिल रही है. ताजा मामला चुनाव आयोग की कार्यशैली और पारदर्शिता को लेकर उठ रहा है. इस कड़ी में विपक्ष के आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में करारा जवाब दिया और तथ्यों के साथ विपक्ष के दावे खारिज किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमित शाह के भाषण की तारीफ की और इसे सोशल मीडिया पर उत्कृष्ट भाषण बताया, साथ ही चुनाव सुधार पर उठाए गए मुद्दों को अहम करार दिया.

PM मोदी ने साझा किया पोस्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह के दिए गए भाषण का अंश वीडियो साझा करते हुए लिखा कि 'गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का भाषण उत्कृष्ट था. उन्होंने ठोस तथ्यों के साथ हमारी चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं, हमारे लोकतंत्र की शक्ति को उजागर किया और विपक्ष के झूठ का पर्दाफाश भी किया.' पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव सुधार जैसे गंभीर विषय पर सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है. पीएम की इस प्रतिक्रिया के बाद सियासी हलकों में इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है.

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संसद में हुई अमित शाह और राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग

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संसद में गृहमंत्री अमित शाह के भाषण का सबसे अहम हिस्सा वह रहा, जब उनकी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ तीखी नोकझोंक हुई. अमित शाह के बयान के दौरान राहुल गांधी ने बीच में टिप्पणी की, जिस पर शाह ने सख्त लहजे में कहा कि उनके भाषण का क्रम वही तय करेंगे, कोई और नहीं. इसी पर राहुल गांधी ने तुरंत अंग्रेजी में शाह को सीधी बहस की चुनौती दे दी, जिसके बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए और भी गरमा गया.

शाह ने कांग्रेस को वोट चोरी पर घेरा 

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सदन में अपने संबोधन में गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखे हमले करते हुए वोट चोरी के मुद्दे को विस्तार से उठाया. शाह ने कहा कि देश में वोट की हेराफेरी की शुरुआत आज़ादी के शुरुआती वर्षों में ही हो गई थी. उनके मुताबिक, एक चुनाव में जहां सरदार पटेल को 28 वोट मिले थे, वहीं जवाहरलाल नेहरू को सिर्फ 2 वोट मिलने के बावजूद उन्हें आगे बढ़ाया गया. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध ठहराया था, जिसके बाद खुद को बचाने के लिए आपातकाल जैसे कठोर कदम उठाए गए और कानून में बदलाव किया गया. शाह ने सोनिया गांधी पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि नागरिकता प्राप्त करने से पहले वे मतदाता सूची में कैसे दर्ज हो गईं, और इस मामले से जुड़ा विवाद आज भी दिल्ली की अदालत में लंबित है. शाह ने आगे सदन में यह भी कहा कि 'मोदी जी जनता के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री बने हैं, आपके कृपा से नहीं.'

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बताते चलें कि सत्र के दौरान लगातार बढ़ती तल्खी और आरोप-प्रत्यारोप यह साफ दिखाते हैं कि चुनाव सुधार और पारदर्शिता का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति का केंद्र बना रहेगा. अमित शाह के भाषण, पीएम मोदी की प्रतिक्रिया और विपक्ष की आपत्तियों ने इस बहस को और तेज कर दिया है. अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार और विपक्ष इस महत्वपूर्ण विषय पर किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और यह विवाद सत्र के बाकी दिनों में क्या नया मोड़ लेता है.

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