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PM मोदी ने बताया कैसे बनते हैं बड़े फैसले और क्या है उनकी प्राथमिकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी पॉडकास्टर Lex Fridman के साथ एक विशेष बातचीत में अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कैसे वह विभिन्न स्रोतों से जानकारी प्राप्त करते हैं, और निर्णय लेने से पहले हर पहलू का गहन विश्लेषण करते हैं।

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निर्णय लेने की प्रक्रिया हमेशा से चर्चा का विषय रही है। उनकी रणनीतियों और फैसलों ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। हाल ही में, अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में पीएम मोदी ने अपने निर्णय लेने के तरीके और विचारधारा को विस्तार से बताया। उनकी इस बातचीत ने राजनीति, प्रशासन और नेतृत्व में रुचि रखने वालों को एक नई दृष्टि दी।

सूचनाओं की गहराई से पड़ताल

पीएम मोदी ने बताया कि उनके पास सूचनाओं के कई स्रोत हैं, जिनका वे व्यापक रूप से उपयोग करते हैं। उनके अनुसार, “मेरे सूचना चैनल बहुत सक्रिय और व्यापक हैं। मेरे अधिकारी कई बार इस बात से आश्चर्यचकित हो जाते हैं कि मैं इतनी सारी सूचनाएँ कैसे जुटा लेता हूँ।” यह उनके नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जिससे वे विभिन्न दृष्टिकोणों को समझकर उचित निर्णय ले सकते हैं।

85% जिलों का अनुभव और जमीनी समझ

प्रधानमंत्री बनने से पहले, मोदी ने भारत के 85 से 90 प्रतिशत जिलों में रात बिताई है। उन्होंने कहा, “मैं शायद भारत का एकमात्र राजनेता हूँ जिसने इतनी यात्राएँ की हैं। मैंने उन अनुभवों से बहुत कुछ सीखा है।” यह गहरी जमीनी समझ उन्हें आम जनता की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है। उनकी यह यात्रा उन्हें नीति निर्धारण में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है।

बिना किसी पूर्वाग्रह के निर्णय लेने की क्षमता

पीएम मोदी ने बताया कि वह निर्णय लेते समय किसी पूर्वनिर्धारित धारणा से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने कहा, “मैं किसी भी तरह का बोझ नहीं ढोता, जो मुझे किसी विशेष दिशा में जाने के लिए मजबूर करे। मेरे लिए निर्णय लेने का एकमात्र पैमाना मेरा देश है।” उनके इस दृष्टिकोण से स्पष्ट होता है कि वह भारत की बेहतरी को प्राथमिकता देते हैं, न कि किसी बाहरी दबाव को।

मोदी ने कहा कि वह कभी भी केवल एक दृष्टिकोण पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि कई स्रोतों से जानकारी प्राप्त करते हैं। “मेरे पास जब भी कोई जानकारी आती है, तो मैं उसे अंतिम सत्य नहीं मानता। मैं हमेशा अतिरिक्त दृष्टिकोण तलाशता हूँ और फिर निष्कर्ष पर पहुँचता हूँ,” उन्होंने कहा। यह एक परिपक्व नेता की विशेषता है, जो हर निर्णय को समग्र दृष्टिकोण से देखता है।

विद्यार्थी जैसा दृष्टिकोण और वकील जैसी जिज्ञासा

पीएम मोदी ने बताया कि वह नए मुद्दों को समझने के लिए हमेशा एक विद्यार्थी जैसा दृष्टिकोण अपनाते हैं। “अगर कोई विषय मेरे लिए नया है, तो मैं पूछता हूँ - क्या आप इसे स्पष्ट कर सकते हैं? यह कैसे काम करता है? फिर आगे क्या होता है और कैसे?” यह दृष्टिकोण उन्हें विषय की गहराई में जाने और उचित निर्णय लेने में सहायता करता है।

साथ ही, जब उन्हें विपरीत विचार मिलते हैं, तो वह वकील की भूमिका निभाना पसंद करते हैं। “मैं जानबूझकर चुनौतीपूर्ण सवाल पूछता हूँ और कई कोणों से मुद्दे का विश्लेषण करता हूँ। इससे मुझे सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने में मदद मिलती है,” उन्होंने कहा।

पीएम मोदी ने बताया कि कैसे उन्होंने कोविड महामारी के दौरान आर्थिक नीतियों पर निर्णय लिया। उन्होंने कहा, “नोबेल पुरस्कार विजेताओं और प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों ने मुझे सुझाव दिए कि भारी मात्रा में धन खर्च किया जाए। राजनीतिक दलों ने मुझ पर दबाव डाला, लेकिन मैंने वही किया जो देश के लिए सही था।” उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें अधिक मुद्रा छापने और अर्थव्यवस्था में धन की बाढ़ लाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने भारत की अनूठी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाई। “जब पूरी दुनिया कोविड के बाद मुद्रास्फीति से जूझ रही थी, भारत को उससे बचाने में हमने सफलता पाई,” उन्होंने बताया।

ग्लोबल लीडरशिप और भविष्य की दिशा
पीएम मोदी ने बताया कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक निर्णायक शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता भारत को आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है।

प्रधानमंत्री मोदी की निर्णय लेने की प्रक्रिया उनके गहरे अनुभव, व्यापक दृष्टिकोण, बिना किसी पूर्वाग्रह के सोचने की क्षमता और व्यावहारिक रणनीतियों पर आधारित है। उनकी शैली उन्हें एक असाधारण नेता बनाती है, जो न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान निकालते हैं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी मजबूत बनाते हैं। यह इंटरव्यू उनके नेतृत्व कौशल की एक झलक मात्र है, जो आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करेगा।
Source- IANS
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