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PM मोदी ने रच दिया कीर्तिमान, इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ा... अब नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने की बारी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जुलाई 2025 को अपने कार्यकाल के 4,078 दिन पूरे कर लिए. इसके साथ ही उन्होंने इंदिरा गांधी का लगातार 4,077 दिन प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ दिया. अब मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं. उनसे आगे केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू हैं. यह मील का पत्थर मोदी के ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ नेतृत्व का प्रतीक बन गया है.

Image: File Photo By X
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. 25 जुलाई 2025 को उन्होंने अपने कार्यकाल के 4,078 दिन पूरे कर लिए हैं, जिससे वह भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने वाले दूसरे नेता बन गए हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम था, जिन्होंने 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक 4,077 दिनों तक देश की बागडोर संभाली थी. मोदी अब केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं, जिन्होंने 1947 से 1964 तक भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दी.


नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना भारतीय लोकतंत्र की विविधता और जनभावनाओं का प्रतीक है. वह आज़ादी के बाद जन्म लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं. उनका संबंध गुजरात से है, जो एक गैर-हिंदी भाषी राज्य है. इससे पहले देश में ऐसा कोई प्रधानमंत्री नहीं रहा, जो इन दोनों विशेषताओं को एक साथ लेकर आया हो. यह उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि उन्होंने भाजपा जैसी पार्टी को दो बार पूर्ण बहुमत से सत्ता दिलाई.

PM मोदी ने रचा कीर्तिमान

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मोदी ने 2014 और 2019 में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत से जीत दिलाई. यह उपलब्धि इसलिए खास मानी जाती है क्योंकि वे पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जिनकी अगुवाई में पार्टी को लगातार दो बार स्पष्ट बहुमत मिला. 2024 में तीसरी बार सत्ता में वापसी ने साबित कर दिया कि मोदी की लोकप्रियता केवल लहर नहीं, बल्कि एक स्थायी जनआस्था बन चुकी है. हालाँकि तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने में पीएम मोदी को NDA के घटक दलों ने साथ दिया.

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छह बार चुनाव जीतने वाले एकमात्र नेता

मोदी ने गुजरात में तीन बार (2002, 2007, 2012) और केंद्र में तीन बार (2014, 2019, 2024) चुनाव जीतकर एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाया है. भारत के किसी भी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के लिए यह उपलब्धि बेहद दुर्लभ है. उन्होंने बतौर पार्टी नेता छह चुनावों में जीत हासिल कर यह साबित कर दिया कि जनता का भरोसा उनके नेतृत्व में लगातार बना हुआ है.

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नेहरू की बराबरी 

प्रधानमंत्री मोदी ने अब जवाहरलाल नेहरू के एक और रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. नेहरू वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की थी. अब मोदी भी इस मुकाम पर पहुंच गए हैं. यदि आने वाले वर्षों में वे अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाते हैं, तो वह देश के पहले प्रधानमंत्री बनने की दिशा में बढ़ सकते हैं, जिन्होंने सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक रूप से सरकार का नेतृत्व किया.

चायवाले से दुनिया के ताकतवर नेता बनने तक की यात्रा

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नरेंद्र मोदी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. गुजरात के वडनगर में जन्मे मोदी ने बचपन में अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में मदद की. इसके बाद उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से हुआ, जिसने उनके जीवन और सोच की दिशा तय की. बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बनकर राजनीतिक सफर शुरू किया और एक दशक तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी। इस दौरान उन्होंने विकास के मॉडल को नया आकार दिया, जिसे बाद में 'गुजरात मॉडल' के नाम से जाना गया. 2014 में जब उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया, तो देश को एक नई ऊर्जा और नया दृष्टिकोण मिला. उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ जैसे नारों के जरिए देश के सामाजिक ताने-बाने को जोड़ने का प्रयास किया और वैश्विक मंचों पर भारत की छवि को मजबूत किया. अब वे एक ऐसे नेता बन चुके हैं जिनकी गिनती दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में होती है.

क्या मोदी पार कर पाएंगे नेहरू का रिकॉर्ड?

अब जब नरेंद्र मोदी ने इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वे नेहरू का रिकॉर्ड भी तोड़ पाएंगे. जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में 6,130 दिन सेवा दी थी. यदि मोदी 2029 तक पद पर बने रहते हैं, तो वे यह ऐतिहासिक कीर्तिमान भी पार कर सकते हैं. फिलहाल के राजनीतिक समीकरण और जन समर्थन को देखते हुए यह संभावना नकारा नहीं जा सकता.

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बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्थापित किए गए रिकॉर्ड न केवल उनकी राजनीतिक समझ को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में जनमत कितना जागरूक और निर्णायक हो चुका है. वे उन चुनिंदा नेताओं में से हैं जिन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर असाधारण ऊंचाइयों को छुआ है.

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