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भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर पीएम मोदी का आदिवासी समाज को बड़ा तोहफा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में आदिवासी समाज के उत्थान और विकास के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। बिहार के जमुई जिले में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने आदिवासी समाज की पढ़ाई, कमाई और दवाई पर केंद्रित योजनाओं को रेखांकित किया और उनके योगदान को उचित पहचान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के उत्थान और उनके योगदान को राष्ट्रीय पहचान देने के उद्देश्य से जमुई के खैरा प्रखंड में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम ने न केवल आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास को उजागर किया, बल्कि उनकी वर्तमान और भविष्य की समृद्धि के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास ने आदिवासी समाज के साथ अन्याय किया है। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय ने न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध किया, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। "आदिवासी समाज वह समाज है, जिसने राजकुमार राम को भगवान राम बनाया। उनके इतिहास को मिटाने की कोशिश स्वार्थ भरी राजनीति का नतीजा थी।"

प्रधानमंत्री ने बिरसा मुंडा, संथाल क्रांति, और भील योद्धाओं के योगदान को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का ईमानदार प्रयास किया है।
पढ़ाई, कमाई और दवाई
प्रधानमंत्री मोदी ने आदिवासी समाज की पढ़ाई, कमाई और दवाई पर जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने न केवल आदिवासी समाज के लिए बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। मातृभाषा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई का विकल्प और आदिवासी बच्चों के सपनों को पंख देने के लिए छात्रवृत्तियां और नए शैक्षणिक संस्थान होंगे। पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास और स्वरोजगार के लिए विशेष योजनाएं होंगी। दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए योजनाएं होंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने आदिवासी विरासत को सहेजने के लिए संग्रहालय और रिसर्च सेंटर की स्थापना की है। साथ ही, आदिवासी समुदाय के कई सदस्यों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। "जिसे पिछली सरकारों ने नहीं पूछा, उसे मोदी पूजता है।" प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के चुनाव को आदिवासी समाज के गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह एनडीए सरकार का सौभाग्य है कि देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मिली।
6,600 करोड़ की परियोजनाएं: भविष्य के लिए आधारशिला
इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने 6,600 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि यह सरकार आदिवासी समाज के उत्थान और उनकी गरिमा को बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने जनजातीय गौरव दिवस को आदिवासी समाज के इतिहास और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाने का एक विशेष अवसर बताया। "आज का दिन उन तमाम नायकों को याद करने का है, जिन्होंने अपने बलिदान और संघर्ष से देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा की।"

प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन न केवल आदिवासी समाज के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि आदिवासी समुदाय की विरासत, संघर्ष और योगदान को आने वाली पीढ़ियां न भूलें। जनजातीय गौरव दिवस एक नई शुरुआत है, जो आदिवासी समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा करती है।

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