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'हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं', PM मोदी की कंटेंट क्रिएटर्स और टेक प्रोफेशनल्स से बड़ी अपील

PM मोदी ने देश के कंटेंट क्रिएटर्स, टेक प्रोफेशनल्स और युवाओं से बड़ी अपील की है. उन्होंने ओरेंज कल्चर क्रांति पर कहा कि भारत के महाभारत-रामायण और किस्से-कहानियां यहां तक की हनुमान जी ही पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं. उन्होंने मैकाले और अंग्रेजों की गुलामी की मानसिकता से भी मुक्ति की अपील की.

PM Modi Speech at Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 / PMO
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' के समापन सत्र को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं को महत्वपूर्ण बताया. प्रधानमंत्री ने यंग टेक प्रोफेशनल्स और गेमिंग क्रिएटर्स से बड़ी अपील की. पीएम ने मौजूदा दौर में गेमिंग और माइथोलॉजी के समावेश पर भी जोर दिया. उन्होंने बाल हनुमान जैसी किड्स कार्टून्स की तरह किस तरह गेमिंग में भी रामायण-महाभारत के किरदार-कहानी को इस्तेमाल कर सकते हैं, उस पर जोर दिया.

'भारत में खड़ी हुई क्रिएटर्स की नई कम्युनिटी'

प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि डिजिटल इंडिया ने भी भारत में क्रिएटर्स की एक नई कम्युनिटी खड़ी कर दी है. भारत आज ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ यानी कल्चर, कंटेंट और क्रिएटिविटी का अभूतपूर्व विकास होते देख रहा है. भारत मीडिया, फिल्म, गेमिंग, म्यूज़िक,डिजिटल कंटेंट,VR-XR जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा ग्लोबल सेंटर बन रहा है. 

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'हम अपने किस्से-कहानियों को दुनिया में ले जा सकते हैं'

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उन्होंने ये भी कहा कि अभी यहां पर ('विकसित भारत यंग लीडर्स' ड एक प्रेजेंटेशन में हमारे कल्चर को एक्सपोर्ट करने की बात आई. मैं तो आप नौजवानों से आग्रह करता हूं, हमारी जो कहानियां हैं, कहानी- किस्से हैं, रामायण है, महाभारत है, बहुत कुछ है. क्या हम उसमें गेमिंग की दुनिया में ले जा सकते हैं, इन चीजों को? पूरी दुनिया में गेमिंग एक बहुत बड़ा मार्केट है, बहुत बड़ी इकोनॉमी है. 

हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं: PM मोदी

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हम अपनी माइथोलॉजी की कथाओं को लेकर के भी गेमिंग की दुनिया में नए-नए खेल ले जा सकते हैं, हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं. हमारा कल्चर भी एक्सपोर्ट हो जाएगा, आधुनिक रूप में हो जाएगा, टेक्नोलॉजी का  उपयोग होगा. और आजकल भी मैं देख रहा हूं, हमारे देश के इस कई स्टार्टअप है, जो गेमिंग की दुनिया में बहुत बढ़िया भारत की बातें कह रहे हैं, और बच्चों को भी खेलते-खेलते भारत को समझना सरल हो जाता है.

'आपका सामर्थ्य भारत का सामर्थ्य बनेगा'

पीएम मोदी ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, "साल 2047 में जब हमारी आजादी के 100 साल होंगे, वहां तक की यात्रा भारत के लिए अहम है और यही वो समय है, जो आपके जीवन में भी सबसे महत्वपूर्ण है. आपका सामर्थ्य भारत का सामर्थ्य बनेगा, आपकी सफलता भारत की सफलता को नई ऊंचाइयां जरूर देगी. मैं आप सभी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में सहभागिता के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं."

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स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग की स्थापना हुई: PM मोदी

पीएम मोदी ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील करते हुए कहा, "हर साल 12 जनवरी को, हम स्वामी विवेकानंद के सम्मान में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं, जिनका जीवन और शिक्षाएं हमें प्रेरित करती रहती हैं. उनसे प्रेरणा लेकर, विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग की स्थापना की गई. बहुत कम समय में, यह एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है, जहां युवा देश की दिशा तय करने में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं."

'स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी हमारे लिए प्रेरणा'

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उन्होंने कहा, "स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा हैं. हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है, कैसे हम नेशन फर्स्ट की भावना से जीवन जिएं, और हमारे हर प्रयास में समाज का और देश का हित हो? इस दिशा में स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हम सबके लिए बहुत बड़ा मार्गदर्शक और प्रेरक है."

उन्होंने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग की तारीफ करते हुए कहा, "मुझे खुशी है कि बहुत कम समय में यह इतना बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है. एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां देश की विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी होती है. करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना, देश के विकास के लिए अपने विचार शेयर करना, ये अपने आप में अभूतपूर्व है."

भारत में स्टार्टअप क्रांति को मिली तेजी: मोदी

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उन्होंने भारत की स्टार्टअप यात्रा पर कहा, "स्टार्टअप कल्चर दुनिया भर में लगभग 50-60 साल पहले शुरू हुआ और समय के साथ, यह बड़ी कंपनियों के दबदबे वाले दौर में बदल गया. हालांकि, इस पूरे समय में, भारत में स्टार्टअप के कॉन्सेप्ट पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया. 2014 तक, देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे. स्टार्टअप कल्चर की कमी के कारण, सरकारी दखल बहुत ज्यादा था, जिससे युवाओं को अपनी काबिलियत दिखाने के बहुत कम मौके मिलते थे. हमारे युवाओं की प्रतिभा को पहचानते हुए, हमने एक नया तरीका अपनाया. युवाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान देते हुए, सरकार ने नई योजनाएं शुरू कीं, जिससे भारत में स्टार्टअप क्रांति को तेजी मिली."

उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के स्टार्टअप की तारीफ करते हुए कहा, "लगभग पांच या छह साल पहले, भारत में स्पेस सेक्टर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ इसरो की थी. लेकिन, हमने स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिया, और आज इस इंडस्ट्री में 300 से ज्यादा स्टार्टअप हैं. खास बात यह है कि इतने कम समय में, स्काईरूट एयरोस्पेस नाम के एक स्टार्टअप ने अपना खुद का रॉकेट, विक्रम एस, बनाया और लॉन्च किया."

कल्चर, कॉन्टेंट और क्रिएटिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विकास: PM नोदी

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उन्होंने कहा, "मुझे अपने देश के युवाओं पर भरोसा है, आपके सामर्थ्य पर भरोसा है, इसलिए हमने एक अलग राह चुनी. हमने युवाओं को ध्यान में रखते हुए एक के बाद एक नई स्कीम बनाई. यहीं से स्टार्टअप क्रांति ने भारत में असली गति पकड़ी. भारत आज ऑरेंज इकोनॉमी यानी कल्चर, कॉन्टेंट और क्रिएटिविटी का अभूतपूर्व विकास होते देख रहा है. 

रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है भारत: PM

बीते दशक में बदलाव का, रिफॉर्म का जो सिलसिला हमने शुरू किया, वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है. इन रिफॉर्म के केंद्र में हमारी युवाशक्ति है. इसलिए देश के हर युवा को संकल्प लेकर गुलामी की मानसिकता से देश को बाहर निकालना है. जीएसटी में अगली पीढ़ी के सुधारों ने युवाओं और उद्यमियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बना दिया है. इसके अलावा, अब 12 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स-फ्री होने से, लोगों को ज्यादा बचत का फायदा मिलेगा."

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कमिटमेंट, गौरव और मजबूती के साथ बढ़ाने होंगे कदम: PM मोदी

कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर नहीं हो सकता, विकसित नहीं हो सकता. और इसलिए, अपने सामर्थ्य, अपनी विरासत,अपने साजो-सामान पर गौरव का अभाव, हमें खलता है, हमारे पास उसके प्रति एक कमिटमेंट चाहिए, गौरव का भाव होना चाहिए. और हमें बड़ी मजबूती के साथ, गौरव के साथ मजबूत कदमों से आगे बढ़ना चाहिए. 

हमें मिलकर मानसिक गुलामी को खत्म करनी है: PM मोदी

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आपने ब्रिटिश राजनेता मैकाले के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा, उसने गुलामी के कालखंड में  शिक्षा-तंत्र के माध्यम से भारतीयों की ऐसी पीढ़ी बनाने के लिए काम किया, जो मानसिक रूप से गुलाम हो. इससे भारत में स्वदेशी के प्रति,अपनी परंपराओं के प्रति, अपने प्रोडक्ट्स, अपने सामर्थ्य के प्रति हीन-भावना पनपी. सिर्फ स्वदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, विदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, इसी को श्रेष्ठता की गारंटी मान लिया, अब ये कोई गले उतरने वाली चीज है क्या? हमें मिलकर गुलामी की इस मानसिकता को खत्म करना है. 

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दस साल बाद, मैकाले के उस दुस्साहस को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं, और ये पीढ़ी की जिम्मेवारी है कि 200 साल पहले का जो पाप है ना, वो धोने के लिए अभी 10 साल बचे हैं हमारे पास. और ये युवा पीढ़ी धोकर के रहेगी, मुझे पूरा भरोसा है. और इसलिए देश के हर युवा को संकल्प लेकर इस मानसिकता से देश को बाहर निकालना है.

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