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विरोधी Owaisi की बात मान गये PM Modi, Russia पहुंचते ही Putin से की बात
Russia और Ukraine के बीच जारी जंग अब इस हद तक पहुंच गई है कि रूस की सेना में हिंदुस्तानियों को फर्जी तरीके से भर्ती करवा कर यूक्रेन के खिलाफ उन्हें युद्ध लड़ाया जा रहा है। ये मसला कई बार हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी उठा चुके हैं। जिस पर अब पीएम मोदी ने रूस पहुंचते ही तगड़ा एक्शन ले लिया है।
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PM Modi : कहते हैं एक युद्ध किसी भी देश को दशकों पीछे ढकेल देता है।लेकिन इसके बावजूद रूस और यूक्रेन के बीच पिछले ढाई साल से जंग चल रही है।जो थमने का नाम ही नहीं ले रही है। ना रूस पीछे हट रहा है। और ना ही यूक्रेन पीछे हटने को तैयार है। दोनों देशों के बीच जारी जंग अब इस हद तक पहुंच गई है कि रूस की सेना में हिंदुस्तानियों को फर्जी तरीके से भर्ती करवा कर यूक्रेन के खिलाफ उन्हें युद्ध लड़ाया जा रहा है। ये मसला कई बार हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी उठा चुके हैं। जिस पर अब PM Modi ने रूस पहुंचते ही तगड़ा एक्शन ले लिया है।
हैदराबादी सांसद असदुद्दीन ओवैसी और मोदी के बीच भले ही छत्तीस का आंकड़ा रहता हो। लेकिन बात जब देश की आती है तो ओवैसी भी पीएम मोदी से ही गुहार लगाते हैं। क्योंकि मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। यही वजह है कि इसी साल रूस में जब हैदरबाद के युवक मोहम्मद असफान की मौत हुई तो। असदुद्दीन ओवैसी ने इस मसले को उठाते हुए मोदी सरकार में विदेश मंत्री एस जयशंकर को खत लिखा था। और बताया था कि भारतीय युवकों को कैसे युद्ध में जबरन धकेला जा रहा है।
भारतीय नागरिकों को फर्जी तरीके से सेना में भर्ती करके यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़वा रहे रूस के खिलाफ पिछले कई महीनों से असदुद्दीन ओवैसी इसी तरह से आवाज उठाते रहे हैं। और अब जब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद आठ जुलाई को पीएम मोदी पहली बार रूस दौरे पर गये तो। एक बार फिर ओवैसी ने पीएम मोदी को रूस में फंसे भारतीयों के मुद्दे की याद दिलाते हुए कहा कि।
"नरेंद्र मोदी रूस में हैं, इसलिए उन्हें पुतिन से संपर्क करना चाहिए और यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भारतीयों की भर्ती को रोकना चाहिए, उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि युद्ध में फंसे निर्दोष भारतीयों को जल्द से जल्द घर वापस लाया जाए"
रूस में हिंदुस्तानियों को जबरन युद्ध के मैदान में धकेलने के मसले पर लगातार आवाज उठा रहे ओवैसी की बात लगता है पीएम मोदी ने मान ली है। इसीलिये रूस पहुंचते ही राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के सामने ये मसला उठाया। और रूस इस बात के लिए तैयार भी हो गया कि वो जल्द ही भारतीय नागरिकों को सेना से डिस्चार्ज करेगा।जिससे वो भारत लौट सके।
मोदी ने कैसे सुलझाया ये मुद्दा ?
दरअसल रूस में फंसे भारतीयों का मुद्दा जैसे ही तूल पकड़ने लगा मोदी सरकार भी तुरंत एक्टिव हो गई थी।और लगातार कूटनीतिक कोशिशें शुरू हो गई थीं। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक रूस में करीब तीस से चालीस नागरिक फंसे हैं। जिनकी वापसी के लिए कोशिशें की जा रही हैं। दस भारतीयों को तो वापस भी लाया जा चुका है। इसी बीच आठ जुलाई को रूस पहुंचे पीएम मोदी ने रात्रिभोज के दौरान राष्ट्रपति पुतिन के सामने ये मुद्दा उठाया था।इस पर रूसी राष्ट्रपति अपनी सेना में कार्यरत सभी भारतीयों को सेना से अलग करने और उनकी भारत वापसी में मदद करने पर सहमत हो गए। इसी बात से समझ सकते हैं कि रूस और भारत की दोस्ती कितनी गहरी है। पीएम मोदी के एक इशारे पर पुतिन जहां भारतीय नागरिकों को छोड़े जाने पर राजी हो गये तो वहीं पीएम मोदी को रूस के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्र्यू से भी सम्मानित किया गया है। बहरहाल यूक्रेन के खिलाफ जंग में जबरन धकेले जा रहे भारतीय नागरिकों को छोड़े जाने के लिए रूस जिस तरह से राजी हुआ है।
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