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पेट्रोल‑डीजल अब पानी से भी सस्ता! 1 लीटर की कीमत गिरकर ₹18 से कम हो सकती है

Petrol And Diesel Price: अगले 2-3 सालों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं. इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है. यानी भविष्य में सस्ता ईंधन और सस्ता तेल हमें देखने को मिल सकता है.

Image Source: Social Media
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Petrol And Diesel Rate: पेट्रोल और डीजल की कीमतें अक्सर घटने-बढ़ने की खबरें सुनने को मिलती हैं .लेकिन इस बार बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत पानी की बोतल से भी कम हो सकती है. जी हाँ, ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी जेपी मॉर्गन के अनुमान के मुताबिक, मार्च 2027 तक ब्रेंट क्रूड की कीमत सिर्फ 30 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है.

एक लीटर तेल की कीमत 18 रुपये से भी कम

अगर इस कीमत को भारतीय रुपये में बदलें, तो एक बैरल का भाव लगभग 2,850 रुपये होगा .एक बैरल में 159 लीटर तेल होता है. इस हिसाब से एक लीटर कच्चे तेल की कीमत लगभग 17.90 रुपये होगी. यह दिल्ली में बिकने वाली 18-20 रुपये वाली मिनरल वॉटर की बोतल से भी सस्ती है.

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भारत जैसी आयातक देशों के लिए अहम खबर


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भारत जैसी देश जो अपनी तेल की जरूरत का करीब 86% हिस्सा आयात करता है, उसके लिए यह बड़ी खबर है. जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत वर्तमान स्तर से 50% से अधिक गिर सकती है. अभी ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 62 डॉलर प्रति बैरल है. गिरावट का कारण सप्लाई का बढ़ना और मांग के मुकाबले अधिक तेल उपलब्ध होना बताया गया है. 

ओवरसप्लाई का असर होगा कीमतों पर


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भले ही दुनिया में तेल की खपत लगातार बढ़ रही है, लेकिन सप्लाई ग्रोथ इसके मुकाबले कहीं ज्यादा होगी. खासतौर पर नॉन-OPEC+ देशों जैसे रूस, मेक्सिको, कजाकिस्तान, ओमान, मलेशिया, सूडान, साउथ सूडान, अजरबैजान, बहरीन, ब्रुनेई और सिंगापुर से आने वाला तेल ज्यादा होगा. जब सप्लाई ज्यादा होगी, तो कीमतें गिरना स्वाभाविक है.

डिमांड और सप्लाई का आंकलन


साल 2025 में दुनिया में तेल की मांग 0.9 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ने का अनुमान है, जिससे कुल खपत 105.5 mbpd तक पहुंच जाएगी. 2026 में खपत स्थिर रहेगी और 2027 में बढ़कर 1.2 mbpd हो सकती है. लेकिन जेपी मॉर्गन का कहना है कि 2025 और 2026 में सप्लाई डिमांड से लगभग तीन गुना तेजी से बढ़ेगी. 2027 तक भी सप्लाई मांग से ज्यादा रहने की संभावना है. इसका सीधा मतलब है कि ओवरसप्लाई बढ़ेगा और कीमतें गिरेंगी.

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इस अनुमान के मुताबिक, अगले 2-3 सालों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं. इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है. यानी भविष्य में सस्ता ईंधन और सस्ता तेल हमें देखने को मिल सकता है.

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