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अलग-थलग खड़े रह गए PCB चीफ मोहसिन नकवी... टीम इंडिया ने नहीं ली एशिया कप ट्रॉफी, जानें पूरी डिटेल
IND vs PAK, Asia Cup Final: एशिया कप फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता लेकिन ट्रॉफी को लेकर बड़ा विवाद हो गया. टीम इंडिया ने पाकिस्तानी मोहसिन नक़वी से ट्रॉफी लेने से इंकार कर दिया और साफ कहा कि जब तक नक़वी स्टेज पर हैं, वे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगे. करीब दो घंटे तक मैदान पर ड्रामा चला और अंत में भारतीय टीम ने ट्रॉफी न लेने का फ़ैसला किया.
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IND vs PAK, Asia Cup Final: दुबई के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए एशिया कप के हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने एक बार फिर पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी. इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है और लोग इसे 'ऑपरेशन सिंदूर अगेन' बताते हुए टीम इंडिया को बधाई दे रहे हैं. हालांकि, मैच जीतने के बाद मैदान पर ट्रॉफी को लेकर एक बड़ा विवाद देखने को मिला.
दरअसल, भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी मोहसिन नकवी से जीत की ट्रॉफी लेने से साफ इंकार कर दिया. टीम का कहना था कि जब तक नकवी स्टेज पर मौजूद हैं, तब तक वे ट्रॉफी नहीं लेंगे. करीब दो घंटे तक मैदान पर यही ड्रामा चलता रहा. नकवी ट्रॉफी लेकर मंच पर खड़े रहे लेकिन भारतीय खिलाड़ी अड़े रहे. अंत में टीम इंडिया ने ट्रॉफी स्वीकार न करने का फ़ैसला किया और अपना रुख स्पष्ट कर दिया. एक तरफ टीम इंडिया की शानदार जीत ने करोड़ों भारतीयों का सिर गर्व से ऊँचा किया है, तो दूसरी तरफ खिलाड़ियों के इस कदम ने पाकिस्तानी आयोजकों को असहज स्थिति में डाल दिया है.
कौन हैं मोहसिन नकवी?
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मोहसिन नकवी जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन हैं और एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) के भी प्रमुख हैं. इसके साथ ही वो पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं. नकवी फाइनल मुकाबले के बाद ट्रॉफी देने के लिए काफी बेताब दिख रहे थे. लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने साफ कर दिया कि वे किसी पाकिस्तानी नेता से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगे. दरअसल, 14 सितंबर को हुए पहले भारत-पाकिस्तान मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी प्लेयर्स से हैंडशेक नहीं किया था. उसी वक्त से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अगर फाइनल भारत जीतता है तो टीम ट्रॉफी नकवी से लेने से इंकार कर देगी फाइनल से पहले नकवी ने खुद बयान दिया था कि इस साल का एशिया कप क्रिकेट की उत्कृष्टता और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन है और वे विजेता टीम को ट्रॉफी देने के लिए उत्सुक हैं. लेकिन खिलाड़ियों का कड़ा रुख पाकिस्तान को असहज कर गया और मंच पर करीब दो घंटे तक ड्रामा चलता रहा.
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नकवी का भारत विरोधी रुख
टूर्नामेंट की शुरुआत से ही नकवी का रवैया भारत विरोधी रहा है. उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) से अपील की थी कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव को फाइनल में खेलने से रोका जाए. इसक पीछे वजह यह थी कि सूर्या ने 14 सितंबर को पाकिस्तान पर मिली जीत को भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित किया था और पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाई थी. इस पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने उन पर आईसीसी के लेवल-4 के तहत आरोप लगाए थे.
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मैच रिपोर्ट कार्ड
फाइनल मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी कर रही पाकिस्तान टीम ने अच्छी शुरुआत जरूर की. साहिबजादा फरहान और फखर ज़मान ने पहले विकेट के लिए 84 रनों की साझेदारी की. फरहान ने 38 गेंदों में 57 रन और ज़मान ने 35 गेंदों में 46 रन बनाए. लेकिन इसके बाद पाकिस्तान की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई. केवल 38 गेंदों के भीतर पूरी टीम ढेर हो गई और 33 रन जोड़ने के बाद सभी खिलाड़ी पवेलियन लौट गए. मोहम्मद हैरिस, शाहीन अफरीदी और फहीम बिना खाता खोले आउट हो गए. टीम 147 रन पर सिमट गई. भारत की तरफ से कुलदीप यादव ने 4 विकेट, अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती ने 2-2 विकेट जबकि बुमराह ने भी 2 विकेट झटके.
तिलक वर्मा ने लगाया जीत का तिलक
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147 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही. अभिषेक शर्मा 5 रन, कप्तान सूर्यकुमार यादव 1 रन और शुभमन गिल 12 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए. भारत का स्कोर सिर्फ 20 पर 3 विकेट हो गया था. इसके बाद तिलक वर्मा और संजू सैमसन ने पारी को संभाला. दोनों ने चौथे विकेट के लिए 57 रन जोड़े. सैमसन 24 रन बनाकर आउट हुए लेकिन तिलक वर्मा डटे रहे. उन्होंने 53 गेंदों में 69 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें 3 चौके और 4 छक्के शामिल थे. शिवम दुबे ने भी 34 रन बनाकर टीम को जीत की ओर धकेला. अंत में रिंकू सिंह 4 रन बनाकर नाबाद रहे और भारत ने यह ऐतिहासिक मुकाबला 6 विकेट से जीत लिया.
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बता दें कि एशिया कप फाइनल केवल एक क्रिकेट मैच नहीं था, बल्कि यह भारत-पाकिस्तान की पुरानी प्रतिद्वंद्विता और खिलाड़ियों की सख्त नीति का भी प्रतीक बन गया. एक ओर टीम इंडिया ने शानदार खेल दिखाकर खिताब अपने नाम किया, वहीं दूसरी ओर ट्रॉफी विवाद ने इस जीत को और चर्चित बना दिया। यह मुकाबला लंबे समय तक क्रिकेट प्रेमियों की यादों में दर्ज रहेगा.