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Pawan Kalyan ने Hindi विरोधी Thackeray और Stalin को दिया करारा जवाब!

Tamil Nadu की स्टालिन सरकार जहां सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करती है तो वहीं महाराष्ट्र के ठाकरे ब्रदर्स के समर्थक सड़क पर उतर कर गुंडई करते हैं और हिंदी बोलने वाले यूपी-बिहार के लोगों को मारते-पीटते हैं ऐसे हिंदी विरोधियों को साउथ के सनातनी नेता और आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने मुंहतोड़ जवाब दिया है !

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दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में आज भी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है... लेकिन इसके बावजूद देश का ये दुर्भाग्य है कि आज तक हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं दिया गया... यही वजह है तमिलनाडु से लेकर महाराष्ट्र तक… आज भी हिंदी के विरोध में सियासी तलवारें खिंच जाती हैं... तमिलनाडु की स्टालिन सरकार जहां सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करती है… तो वहीं महाराष्ट्र के ठाकरे ब्रदर्स के समर्थक सड़क पर उतर कर गुंडई करते हैं और हिंदी बोलने वाले यूपी-बिहार के लोगों को मारते-पीटते हैं… ऐसे हिंदी विरोधियों को साउथ के सनातनी नेता और आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने मुंहतोड़ जवाब दिया है…

दक्षिण भारत के जिस राज्य आंध्र प्रदेश की सत्ता में पवन कल्याण डिप्टी सीएम… उस आंध्र प्रदेश में आज भी सबसे ज्यादा तेलगू भाषा बोली जाती है… लेकिन इसके बावजूद पवन कल्याण ने कभी हिंदी भाषा का विरोध नहीं किया… क्योंकि ये बात वो अच्छी तरह से जानते हैं कि हिंदी भाषा बोलने पर उनकी तेलगू भाषा पर कोई आंच नहीं आएगी… और ना ही उसके अस्तित्व पर कोई खतरा होगा… यही वजह है कि तेलगू भाषा को मां और हिंदी भाषा को मौसी बताते हुए उन्होंने इशारों ही इशारों में ठाकरे ब्रदर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया… और एक बयान में उन्होंने कहा कि…'अगर तेलुगू हमारी मां है तो हिंदी हमारी मौसी की तरह है, अगर हम विदेशी भाषा सीख सकते हैं तो हिंदी सीखने में क्यों हिचकाते हैं ? हिंदी पूरे देश में आसानी से समझी जाने वाली भाषा है, मैं पर्सनली सोशल मीडिया पर हिंदी का इस्तेमाल करता हूं आइये हम हिंदी से प्रेम करने, उसे अपनाने और उसे बढ़ावा देने का संकल्प लें'

हिंदी विरोधियों की खबर ले रहे डिप्टी सीएम पवन कल्याण यहीं नहीं रुके… ठाकरे के समर्थकों को नसीहत देने के साथ ही उन्होंने देश के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का नाम लेते हुए इशारों ही इशारों में हिंदी विरोधी स्टालिन को भी लताड़ते हुए कहा कि…'आपको हिंदी भाषा को स्वीकार करने में शर्म क्यों आती है ? हमारे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम तमिलनाडु से थे लेकिन उन्हें हिंदी बहुत पसंद थी, वे कहते थे कि भाषाएं दिलों को जोड़ने का जरिया होती हैं तो आइये हम हिंदी भाषा को उनके नजरिये से देखें, कोई थोपता नहीं, कोई नफरत नहीं करता, बस इसे समझें और अपनाएं, हिंदी कोई अनिवार्य भाषा नहीं है यह एक ऐसी भाषा है जिसे देश के सभी राज्यों में आसानी से समझा जा सकता ह

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आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने ठाकरे ब्रदर्स के साथ-साथ स्टालिन को भी नसीहत देने में कोई कसर नहीं छोड़ी... तो वहीं सबसे बड़ी बात ये है कि खुद पवन कल्याण तेलुगू बोलते हैं… लेकिन इसके बावजूद इसका मतलब ये नहीं है कि ठाकरे ब्रदर्स या स्टालिन की तरह वो भी हिंदी विरोध करना शुरू कर दें... उनके लिए तेलुगू मां और हिंदी मौसी की तरह है… इसीलिये पवन कल्याण सोशल मीडिया पर हिंदी में भी ट्वीट करते रहते हैं… जिससे वो अपनी बात पूरे देश तक पहुंचा सकें… (हिंदी ट्वीट दिखा देना) और इस बात में उन्हें कोई शर्म नहीं है... पवन कल्याण के बारे में एक और बात आपको बता दें देश के बाकी नेता भले ही सोकॉल्ड सेकुलर की चादर ओढ़कर राजनीति की रोटियां सेंकते हों… लेकिन पवन कल्याण एक सच्चे सनातनी की तरह राजनीति करते हैं… और डंके की चोट पर कहते हैं कि…'मैं कट्टरपंथी नहीं प्राउड हिंदू हूं, एक ईसाई को ईसाई बने रहने में, एक मुस्लिम को मुस्लिम बने रहने में किसी को कोई समस्या नहीं होती है लेकिन जैसे ही कोई हिंदू अपने धर्म को लेकर प्रतिबद्ध होता है उसे सांप्रदायिक करार दे दिया जाता है यही इनका सेकुलरिज्म हैं'

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बात हिंदू के सम्मान के लिए लड़ने की हो या फिर हिंदी के लिए विरोधियों से भिड़ने की… पवन कल्याण इसी तरह से ललकारते हुए विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देते हैं… तो वहीं दूसरी तरफ ठाकरे के समर्थक महाराष्ट्र में लाठी-डंडे के दम पर मराठी भाषा को सम्मान दिलाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं और हिंदी बोलने वालों को मारपीट रहे हैं.

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