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PAK को अपने कर्मों का हिसाब देना ही होगा... कश्मीर की बेटी ने पूरी दुनिया के सामने खोली आतंकिस्तान की पोल
पाकिस्तान के आतंकवाद को खुद झेल चुकी, जिसके पिता और भाई को बंदूक की नोक पर अगवा किया गया, यातनाएं दी गईं, बचपन छीन लिया; उस कश्मीर की बेटी तसलीमा अख्तर ने उसकी पूरी दुनिया के सामने पोल खोल दी और बताया कि कैसे कश्मीर को उसने आतंक का प्रयोगशाला बना दिया है. तसलीमा ने आगे दुनिया के देशों से पाक को सबक सिखाने और न्याय के कटघरे में लाने की मांग की.
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जम्मू-कश्मीर की बेटी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और आतंकवादी हमलों को खुद झेलने वाली तसलीमा अख्तर ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आतंकिस्तान की पोल खोलते हुए कहा कि कश्मीरियों के खून का जिम्मेदार सिर्फ एक देश है, वह है पाकिस्तान.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद को पाल-पोस रहा है. कश्मीरियों की आवाज के रूप में बोलते हुए तसलीमा ने अपने बचपन की वह दर्दनाक रात याद को याद किया और कहा कि जब 11 अप्रैल 1999 को सिर्फ 11 साल की उम्र में उनके पिता और बड़े भाई को पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने अगवा कर लिया था.
पिता यातनाओं के बाद तो किसी तरह रिहा हुए, लेकिन भाई को सात दिनों तक बंदी बनाकर रखा गया. इस घटना ने उनके परिवार को अपना पुश्तैनी घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया. तसलीमा ने कहा, “उस रात पाकिस्तान ने मेरा बचपन मार डाला. मेरे परिवार की कहानी लाखों कश्मीरी परिवारों की वही चीख है, जिसे दुनिया अब तक अनसुना कर रही है.”
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इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि उनके अपने स्कूल के दस दोस्त, लड़के और लड़कियां पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण अनाथ हो गए. वे अपने माता-पिता से अलग हो गए; उनकी जिंदगी की शुरुआत ही बर्बाद हो गई. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये विपत्तियां व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि कश्मीर के आतंक प्रभावित लोगों के साझा दर्द का है.
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उन्होंने पूरी दुनिया को चेताया कि पाकिस्तान की सेना और ISI कश्मीर को आतंक की प्रयोगशाला बनाकर इंसानियत के विरुद्ध युद्ध छेड़े हुए है. “स्कूलों में टीचर्स को गोलियों से भून दिया गया, मजदूरों को उनके काम की जगह पर मार डाला गया, मंदिरों और मस्जिदों में प्रार्थना करने वालों को निशाना बनाया गया. कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से उखाड़ फेंका गया, भागने पर मजबूर किया गया. ये सब पाकिस्तान की स्टेट पॉलिसी का हिस्सा है.
उन्होंने तत्काल दुनिया के देशों से हस्तक्षेप की मांग की और तीन प्रमुख मांगें रखीं:
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आतंक के शिकारों को मानवाधिकारों की शीर्ष प्राथमिकता प्रदान करना.
आतंकवाद को आश्रय देने वाले देशों, विशेष रूप से पाकिस्तान की आतंकियों को प्रशिक्षण और हथियार देने वाली भूमिका पर कठोर जवाबदेही सुनिश्चित करना.
विधवाओं, अनाथों और विस्थापित परिवारों के लिए कारगर पुनर्वास कार्यक्रम लागू करना.
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अंत में तसलीमा ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि हम बदला नहीं, न्याय मांगते हैं. हम शांति चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान को अपने अपराधों का हिसाब दुनिया के सामने देना ही होगा. अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भी खामोश रहा तो यह खामोशी आने वाली पीढ़ियों की सबसे बड़ी शर्म होगी.