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UN में कश्मीर के मुद्दे पर अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान, तुर्की ने भी नहीं दिया इस बार साथ

हाल ही में कश्मीर के मुद्दे पर आयोजित UN बैठक में पाकिस्तान को एक बार फिर अलग-थलग महसूस करना पड़ा। तुर्की, जो अक्सर पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा रहा है, ने इस बार समर्थन नहीं दिया। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि तुर्की उसकी स्थिति को मजबूत करेगा। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने में पाकिस्तान को कठिनाइयाँ सामना करना पड़ रहा है।

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जम्मू और कश्मीर में लोकतंत्र का महापर्व अर्थात विधानसभा चुनाव शांति तरीके से जारी हैं। अनुच्छेद 370 के ख़ात्मे के बाद घाटी में छिटपुट घटनाओं को छोड़कर करीब-करीब शांति है, विकास की गति तेज़ हुई है और रोजमर्रा की जिंदगी में सुधार आया है। यही चीज़ पाकिस्तान को पसंद नहीं है। उसने एक बार फिर UNGA में भारत को भभकी दी है और जहर उगला है। 

UNGA के 79वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बयान में अंतर

UN जेनरल असेंबली का 79वां सत्र अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में जारी है। हर बार की तरह इस बार भी भारत ने लोकतंत्र, मानवाधिकार, ग्रीन एनर्जी, शांति और सुरक्षा की बात की। जिस तरह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत ने दुनिया के सामने एक बेहतर भविष्य की रूपरेखा रखी वहीं अपेक्षा के अनुरूप ही पाकिस्तान ने UNGA के मंच का इस्तेमाल इस्लामी दुनिया को खुश करने, आतंकवाद और घुसपैठ पर गलतबयानी करने और भारत के ख़िलाफ़ जहर उगलने के लिए किया। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने फिर अलापा कश्मीर राग

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने UNGA के इस सत्र का इस्तेमाल अपनी अवाम का ध्यान गरीबी और बदहाल अर्थव्यवस्था से हटाने के लिए किया। शरीफ ने इस दौरान जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव और शांति स्थापना की प्रक्रिया की कोशिश को लेकर जहर उगला और भारत की आतंक विरोधी कार्रवाई को मानवाधिकार से जोड़ दिया। 

शरीफ ने पूरे भाषण में 16 बार किया कश्मीर-कश्मीर शब्द का ज़िक्र

शरीफ ने कश्मीर का ज़िक्र कर फिर से घिसे-पिटे संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव का हवाला दिया और इस पर अमल करवाने की मांग की। उन्होंने POK में पाक सेना और सरकार के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शन और आंदोलन को पड़ोसी देश भारत से जोड़ दिया और कहा कि इंडिया इस गतिविधि में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सिंद्धांत सिब्बल की मानें तो पाक पीएम ने अपने पूरे भाषण के दौरान कश्मीर का ज़िक्र 16 बार, पाकिस्तान 14, भारत 12, मुस्लिम 3 और हिन्दू शब्द का प्रयोग 01 बार किया। शरीफ ने भारत के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई की भी बात की। 

शहबाज शरीफ के आरोपों का भारत ने दिया जवाब

पाकिस्तानी पीएम के आरोपों का जवाब UN में First Secretary भविका मंगलनंदन ने दिया। उन्होंने पाकिस्तान पर 1971 में नरसंहार करने, आतंकवाद का फॉरेन पॉलिसी के टूल के रूप में इस्तेमाल, आतंकवादियों के जरिए कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना, ओसामा बिन लादेन को प्रश्रय देने सहित संसद पर हमले और  26/11 मुंबई हमले की बात की और जोरदार जवाब दिया। 
कश्मीर के मुद्दे पर इस्लामी देशों ने भी नहीं दिया पाक का साथ!

कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को OIC के साथ-साथ अन्य देशों मसलन तुर्की का साथ UNGA में मिलता रहा है। हैरानी की बात है कि तुर्की ने इस बार आम सभा में कश्मीर का नाम तक नहीं लिया वहीं फिलिस्तीन पर उसका बयान आया। तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने अपने भाषण में कश्मीर शब्द का प्रयोग तक नहीं किया। 2019 के बाद यह पहली बार है जब तुर्किये ने कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ नहीं दिया।

जानकारों की मानें तो यह बदलाव बदले सियासी माहौल, तुर्की की जरूरत, भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भूमिका और अर्दोआन का ब्रिक्स में शामिल होने की कोशिश के कारण संभव हुआ है। भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और अगले महीने रूस में इसकी शिखर बैठक भी होने वाली है। अर्दोआन और तुर्किये के इस रुख की वजह पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। विपक्षी PTI ने इस मामले को लेकर शरीफ सरकार पर तंज़ कसा है और इसे देश की कमजोर स्थिति से जोड़ दिया है।

भारत को UNSC की सदस्यता के मुद्दे पर मिला फ्रांस और ब्रिटेन का भी साथ

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फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के पीएम कीर रॉडनी स्टार्मर ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की है। अन्य देशों ने भी UNSC के स्वरूप में बदलाव की मांग की है। भारत लंबे समय से बदले वक्त और चुनौंतियों को देखते हुए इसमें बदलाव की मांग करता रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी यहां रहती है और वह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में भारत को परमानेंट मेंबर नहीं बनाना नाइंसाफी है।

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क्या है कश्मीर को लेकर UNSC का प्रस्ताव? 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47, कश्मीर संघर्ष के समाधान से संबंधित है। इसे 21 अप्रैल 1948 को अपनाया गया। इस प्रस्ताव में तीन बातें कही गई हैं। पहला ये कि  पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर से अपने सभी नागरिकों को हटाए। दूसरी बात ये कि भारत कानून व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनज़र न्यूनतम सेना रखे। और तीसरी बात ये कि स्थिति सामान्य होने के बाद UN की निगरानी में जनमत संग्रह हो। चुकि पाकिस्तान ने UNSC के प्रस्ताव को कभी माना ही नहीं, मसलन उसने कश्मीर से अपने नागरिकों POJK से भी नहीं हटाए, आतंकी गतिविधि बंद नहीं की, घुसपैठ नहीं रोकी और डेमोग्राफी में बदलाव कर दिया इसलिए UNSC प्रस्ताव की राग अलापना बेमानी है। 

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