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पाकिस्तान का नया दांव, पहलगाम आतंकी हमले की सच्चाई पर अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग, रूस-चीन को भी घसीटा
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया. इस हमले में 26 निर्दोषों की जान चली गई, और जिम्मेदारी पाक समर्थित संगठन टीआरएफ ने ली. भारत ने सख्ती दिखाते हुए दोषियों पर कार्रवाई का ऐलान किया, वहीं पाकिस्तान ने खुद को बचाने के लिए रूस और चीन को बीच में घसीटते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग कर दी.
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे. यह हमला साल 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर घाटी में सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है. घटनास्थल पर बिखरे खून के निशान और चीखों की गूंज आज भी लोगों के दिलों को दहला रही है.
हमले की जिम्मेदारी और भारत का सख्त संदेश
इस हमले की जिम्मेदारी 'द रेसिस्टेंस फ्रंट' यानी टीआरएफ ने ली है, जो प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक मुखौटा संगठन माना जाता है. जैसे ही यह खबर सामने आई, भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए हमले के दोषियों और साजिशकर्ताओं के खिलाफ सबसे कठोर कार्रवाई का ऐलान कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अप्रैल 2025 को एक सभा में कहा कि, "इस हमले के दोषियों को हम ऐसा जवाब देंगे जिसे वे जीवन भर याद रखेंगे."
पाकिस्तान का नया दांव
इधर भारत में गुस्से की लहर थी, उधर पाकिस्तान ने अपने बचाव के लिए एक नया राग छेड़ दिया. पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी 'रिया नोवोस्ती' को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि इस हमले की सच्चाई जानने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय जांच टीम बनाई जानी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि रूस, चीन या फिर पश्चिमी देश मिलकर एक निष्पक्ष जांच करें ताकि यह पता चल सके कि भारत सच्चाई बोल रहा है या नहीं.
ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भी इस हमले पर अंतरराष्ट्रीय जांच की पेशकश की है. आसिफ का तर्क था कि भारत बिना किसी ठोस सबूत के पाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है और ये केवल "खाली बयानबाजी" है.
विश्लेषकों की नजर में पाकिस्तान की चाल
यह बयान सुनते ही कूटनीतिक गलियारों में हलचल मच गई. विशेषज्ञों ने इसे पाकिस्तान की छवि बचाने की नाकाम कोशिश करार दिया. मॉस्को स्थित स्वतंत्र अमेरिकी विश्लेषक एंड्रयू कोरिब्को ने अपने न्यूज़लेटर में लिखा कि पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों ने इस हमले पर दो ऐसे विरोधाभासी बयान दिए हैं जो खुद उनके दावों को कमजोर करते हैं.
पहला बयान पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का आया, जिन्होंने दावा किया कि पहलगाम में हमला करने वाले "स्वतंत्रता सेनानी" भी हो सकते हैं. कोरिब्को लिखते हैं कि चाहे कश्मीर मसले पर किसी के भी विचार हों, लेकिन निर्दोष पर्यटकों की हत्या करना किसी भी सूरत में आतंकवाद है. स्वतंत्रता सेनानियों को आतंकवादियों के साथ जोड़ना वैश्विक स्तर पर स्वतंत्रता आंदोलनों को कलंकित करता है. दूसरा बयान खुद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दिया, जिन्होंने 'अल जज़ीरा' को इंटरव्यू में कहा कि यह हमला "फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन" भी हो सकता है, यानी भारत ने खुद अपने ही नागरिकों पर हमला कराया हो ताकि पाकिस्तान को बदनाम किया जा सके.
एंड्रयू कोरिब्को ने इन दोनों बयानों के बीच के विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाते हुए लिखा कि एक ओर डार हमले को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी ओर आसिफ इस हमले को भारत की साजिश बता रहे हैं. दोनों दावे एक साथ सच नहीं हो सकते. यह विरोधाभास पाकिस्तान के भीतर की बौखलाहट को दर्शाता है और इस बात की तरफ इशारा करता है कि कहीं न कहीं पाकिस्तानी शासन इस हमले से जुड़ी अपनी भूमिका को छिपाने की कोशिश कर रहा है.
भारत की सख्ती और जांच का दायरा
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम को बहुत गंभीरता से लिया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने पहलगाम हमले की जांच अपने हाथ में ले ली है. एनआईए की फॉरेंसिक टीम, इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बल संयुक्त रूप से सबूत जुटाने में लगे हुए हैं. मानव रहित ड्रोन और यूएवी के माध्यम से इलाके की गहन छानबीन हो रही है ताकि हमलावरों तक पहुंचा जा सके.
शुरुआती जांच से पता चला है कि हमले में करीब पांच से सात आतंकवादी शामिल थे. उनमें से कुछ को पाकिस्तान में प्रशिक्षण मिला था. जांच में आदिल ठोकर उर्फ आदिल गुरी और आसिफ शेख जैसे स्थानीय आतंकियों की भूमिका सामने आ रही है. जानकारी के मुताबिक आदिल ठोकर 2018 में पाकिस्तान चला गया था जहां उसने लश्कर-ए-तैयबा के साथ आतंकी प्रशिक्षण लिया और अब भारत में हमले को अंजाम देने लौटा. घटना के बाद से पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश फैल गया है. सोशल मीडिया से लेकर संसद तक हर जगह एक ही मांग उठ रही है दोषियों को सजा मिले और आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हो. वहीं पाकिस्तान की तरफ से लगातार बयानबाजी करके सच्चाई से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का रूस और चीन जैसी शक्तियों को इस मामले में घसीटना भी एक सोची-समझी रणनीति है ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि को थोड़ा बेहतर दिखाया जा सके. हालांकि भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों को हर हाल में सजा दी जाएगी. पहलगाम का यह हमला न केवल कश्मीर बल्कि पूरे भारत के लिए एक गहरा जख्म है. इसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट होने की जरूरत है. अब दुनिया को तय करना होगा कि वह निर्दोषों के खून पर चुप रहेगी या आतंक के खिलाफ निर्णायक कदम उठाएगी.
भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. अब बारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की है कि वह इस मसले पर पाकिस्तान से असली जवाब मांगे और आतंक को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे.
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