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बिना अक्ल भारत की नकल कर रहा पाकिस्तान, बिलावल भुट्टो की अगुवाई में 'झूठ परोसने' विदेशी दौरे पर जाएगा PAK प्रतिनिधिमंडल

अपनी वैश्विक कूटनीति को मजबूत करने और आतंकवाद के मुद्दे पर अपने काले कारनामे छिपाने की कोशिश में पाकिस्तान की सरकार ने बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को विदेशी दौरे पर भेजने का फैसला लिया है. जो भारत और पकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पकिस्तान का पक्ष रखेगा. पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के इस फैसले को भारत की नकल के तौर पर देखा जा रहा है.

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पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत सरकार और भारतीय सेना ने जिस तरीके से ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है. हालांकि वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीति को और ज्यादा मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने एक बहुत जरूरी फैसला लिया और 40 सांसदों की एक टीम बनाई है. जिसे सात अलग-अलग डेलिगेशन में बांटा गया है. ये प्रतिनिधिमंडल दुनिया के कोने-कोने में जाएगा और बताएगा कि पाकिस्तान आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़ कैसे है. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और असल उद्देश्य को यह डेलिगेशन दुनिया के बाकी देशों तक पहुंचाएगा ताकि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में कोई असमंजस न रहे और न ही पाकिस्तानी प्रोपेगंडा को कोई जगह मिल सके. जैसे ही भारत सरकार ने अपना पक्षा दुनिया के सामने रखने के लिए डेलिगेशन भेजने का फैसला किया ठीक वैसे ही पाकिस्तान भी भारत की नकल करते हुए वैश्विक मंच पर इसी तरह एक अपना भी डेलिगेशन भेजने का निर्णय ले लिया.

खबर मिल रही है कि ऑपरेशन सिंदूर की शानदार सफलता के बाद जिस तरह से केंद्र सरकार वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को बेनकाब करने की कोशिश कर रही है. ठीक उसी तरह पाकिस्तान भी अपनी एक नई टीम तैयार कर चुका है. जिसको दुनिया के बाकी देशों में वह भेजेगा. आपको बता दें कि पाकिस्तान का यह कदम पूरी तरीके से भारत की नकल के तौर पर देखा जा रहा है. पाकिस्तान की सरकार ने पीपीपी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को इस चीज के लिए चुना है. यानी वही बिलावल भुट्टो जो भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालातों के बीच बार-बार गीदड़भभकी दे रहा था, पीएम मोदी को धमकी दे रहा था, नदी में पानी की जगह खून बहाने की धमकी दे रहा था. वह अब पाकिस्तान का पक्ष दुनिया के बाकी देशों में रखते हुए नजर आएंगे.

सोशल मीडिया पर बिलावल ने दी जानकारी 

पाकिस्तान ने बिलावल के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है जिसमें कई पूर्व मंत्रियों को भी रखा गया है. बताते चलें बिलावल भुट्टो की इस टीम में पूर्व मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान, हिना रब्बानी खार और पूर्व विदेश सचिव जलील अब्बास जिलानी को शामिल किया गया है और इसकी जानकारी बाकायदा बिलावल भुट्टो ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दी. भुट्टो ने लिखा- "प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने मुझे अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति के लिए पाकिस्तान का पक्ष रखने के लिए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का अनुरोध किया. मैं इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए सम्मानित महसूस कर रहा हूं."

नकल की लंबी फेहरिस्त

भारत के अंदर एक कहावत है जो आम तौर पर सुनने को मिलती है कि 'नकल के लिए भी अक्ल की जरूरत होती है', जो कि शायद पाकिस्तान की सरकार और उसके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास बिल्कुल भी नहीं है. अब पाकिस्तान की सरकार और प्रधानमंत्री पूरी तरह से भारत की नकल पर उतारू हो गए है. जिसकी फेहरिस्त लंबी है, जैसे कि...
1. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर किया तो उसने सो कॉल्ड बनयान-अल-मर्सस ऑपरेशन चलाया. 
2. भारत ने सीसीएस की बैठक की तो उसने राष्ट्रीय सुरक्षा समीति की बैठक की.
3. पीएम मोदी ने देश ने नाम संबोधन दिया तो शहबाज शरीफ भी टीवी पर आकर अपनी आवाम से मुखातिब होने लगा.
4. पीएम मोदी एय़र बेस गए तो शहबाज शरीफ भी टैंक पर चढ़ गया.
5. पीएम मोदी ने भारत का पक्ष रखने के लिए विदेश दौरे पर डेलिगेशन भेजने का फैसला किया तो वो भी बिलावल के नेतृत्व में डेलिगेशन भेज रहा है
6. भारत ने सिंधू समझौता रद्द किया, पासपोर्ट बैन किया, वीजा कैंसल किया, उच्चायोग की हैसियत कम की और पाकिस्तानियों को देश निकाला दिया तो उसने भी वही करने का नाटक किया.

विश्लेषकों की राय 

बिलावल के नेतृत्व में पाकिस्तानी नेताओं के प्रतिनिधिनमंडल को विदेश भेजने के शहबाज के फैसले को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान एक बार फिर से झूठ की बुनियाद दुनिया के बाकी देशों में खड़ी करने की कोशिश कर रहा है, ताकि विक्टिम कार्ड प्ले कर सके. इसे लेकर विश्लेषकों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान कोशिश करना चाह रहा है कि वह दुनिया में अपना पक्ष स्पष्टता के साथ रख सके. वहीं भारत की कूटनीतिक जीत को एक तरीके से चैलेंज देने की एक असफल कोशिश पाकिस्तान की तरफ से की गई है.

आपको बताते चलें कि भारत की तरफ से जिन सांसदों की टीम को गठित किया गया है, उनमें शशि थरूर, सुप्रिया सुले समेत वरिष्ठ नेता चुने गए हैं. हालांकि भारत में इसको लेकर एक तरफ जहां राजनीति हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान, भारत की नकल करता हुआ नजर आ रहा है. कुल मिलाकर एक बात तो साफ है कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार कर रहा है और इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के नाम संबोधन करते हुए सीधे तौर पर कह दिया था कि पाकिस्तान से अब बात होगी तो सिर्फ पीओके पर होगी और बात होगी तो सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर होगी.
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