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मिसाइल टेस्ट करने चला था पाकिस्तान, लेकिन तबाह होते-होते बचा, न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास गिरी शाहीन-3

पाकिस्तान सच में अजूबा देश है. हर दिन वहां से कुछ न कुछ अजीबोगरीब घटना की खबर आती रहती है. लेकिन इस बार जो खबर सामने आई है वो यकीनन हैरान और परेशान करने वाली है. अपनी ही मिसाइल शाहीन-3 से तबाह और बर्बाद होते-होते ये पड़ोसी देश बाल-बाल बच गया है.

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एक तरफ भारत जहां अपनी सैन्य शक्ति लगातार बढ़ा रहा है. और दुनिया की आँखों में आंखें डालकर एक संदेश दे रहा है कि ये बदलता भारत है, नया भारत है, ये घर में घुसकर मारता है. वहीं भारत से बार-बार मार खा चुका पाकिस्तान भी अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने में जुट गया है. लेकिन कुदरत का निजाम है कि उसका साथ ही नहीं दे रहा. एक बार फिर पाक का मिसाइल टेस्ट नाकाम रहा है. 

पाक का शाहीन-3 मिसाइल टेस्ट नाकाम 

पाकिस्तान की सेना ने हाल ही में अपनी शाहीन-3 मिसाइल का टेस्ट किया, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. लेकिन ये टेस्ट बुरी तरह नाकाम रहा. मिसाइल निशाना चूक गई और डेरा गाजी खान (पंजाब प्रांत) में एक परमाणु केंद्र के पास धमाका हुआ.

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इसका मलबा बलूचिस्तान के डेरा बुगटी जिले में गिरा, जो नागरिक बस्तियों के बेहद करीब था. इस घटना ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाए, बल्कि बलूचिस्तान के लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया. 22 जुलाई 2025 को हुए इस हादसे के बाद पाकिस्तानी सेना ने इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया, मीडिया को रोका और लोगों को घरों में रहने को कहा. ये जगह नागरिक बस्तियों से सिर्फ 500 मीटर दूर थी. लूप सेहरानी लेवी स्टेशन के पास ग्रेपन रवाइन में मलबा गिरा, जिससे बड़ा धमाका हुआ.

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धमाका इतना जोरदार था कि 20-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दिया, जिसमें बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के इलाके भी शामिल थे. कुछ वीडियो में लोग डरकर भागते दिखे. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल डेरा गाजी खान के परमाणु केंद्र पर गिरी, तो कुछ ने कहा कि ये किसी दुश्मन ड्रोन का हमला था. DG खान कमिश्नर के प्रवक्ता मझर शीरानी ने कहा कि ये शायद किसी फाइटर जेट की सोनिक बूम (ध्वनि की दीवार टूटने की आवाज) थी, लेकिन पक्की जांच का इंतजार है. 

डेरा गाजी खान पाकिस्तान का सबसे बड़ा परमाणु केंद्र है. यहां यूरेनियम का भंडारण और प्रोसेसिंग होती है. 1970 में पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन (PAEC) ने यहां एक पायलट प्लांट बनाया था, जो रोजाना 10,000 पाउंड यूरेनियम प्रोसेस करता है. ये जगह पाकिस्तान के परमाणु हथियार प्रोग्राम का दिल है. अगर मिसाइल सचमुच इस केंद्र पर गिरी, तो ये बहुत बड़ा हादसा हो सकता था. लेकिन अधिकारियों ने दावा किया कि कोई नुकसान नहीं हुआ.

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क्या है शाहीन-3 की खासियत 

शाहीन-3 पाकिस्तान की सबसे ताकतवर मिसाइलों में से एक है. ये एक सतह से सतह (सरफेस-टू-सरफेस) बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 2750 किलोमीटर तक मार कर सकती है. यानी ये भारत के कई शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु तक पहुंच सकती है. 

परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता, 20-25 से 300-500 किलोटन तक के परमाणु हथियार ले जा सकती है. इसके अलावा सॉलिड फ्यूल, ये ठोस ईंधन पर चलती है, जो इसे जल्दी लॉन्च करने में मदद करता है. पाकिस्तान ने इसे 2000 के दशक में चीन की तकनीकी मदद से बनाना शुरू किया. पाकिस्तान इसे अपनी रक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है, खासकर भारत की सैन्य ताकत का जवाब देने के लिए. लेकिन बार-बार टेस्ट फेल होने से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं.

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बलूचिस्तान ने इस टेस्ट की निंदा की 

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान नाम के संगठन ने इस टेस्ट की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि मिसाइल टेस्ट ने बलूचिस्तान के लोगों की जान खतरे में डाली. अगर मलबा थोड़ा और इधर-उधर गिरता, तो सैकड़ों लोग मारे जा सकते थे.

पहले भी फेल हुआ है पाक का मिसाइल टेस्ट 

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ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान का मिसाइल टेस्ट फेल हुआ. पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है. अक्टूबर 2023 में भी शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ था. उस बार भी धमाका डेरा गाजी खान के पास हुआ, जिसकी आवाज 30-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल परमाणु केंद्र पर गिरी, लेकिन सरकार ने इसे सोनिक बूम बताया. 

जनवरी 2021 में शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ और मिसाइल डेरा बुगटी के नागरिक इलाके में गिरी. कई घर तबाह हुए और लोग घायल हुए. बलूच रिपब्लिकन पार्टी ने इसे बलूचिस्तान को पाकिस्तानी सेना की प्रयोगशाला बनाने का सबूत बताया. 

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बाबर-II मिसाइल, जो जमीन और समुद्र से लॉन्च हो सकती है, बलूचिस्तान में टेस्ट के दौरान क्रैश हो गई. एक अज्ञात मिसाइल सिंध के जमशोरो शहर में गिरी. कुछ का दावा था कि ये भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हादसे का जवाब देने की कोशिश थी. ये हादसे दिखाते हैं कि पाकिस्तान की मिसाइल तकनीक में अभी भी खामियां हैं.

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