Advertisement

Loading Ad...

संसद में विपक्ष को झटका, स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज; अमित शाह ने राहुल गांधी का खोला कच्चा चिट्ठा

Parliament Budget Session 2026:लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया है. इस दौरान विपक्ष को बड़ा झटका लगा. वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को सदन में बोलने नहीं देने के आरोपों का जोरदार जवाब देते हुए बताया कि वे कब-कब सदन में चर्चा से दूर रहे.

Loksabha Speaker Om Birla (Screengrab)
Loading Ad...

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया. इसके साथ ही ओम बिरला ही लोकसभा के स्पीकर बने रहेंगे. आपको बता दें कि कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने एक दिन पहले सदन में स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश किया था. इस प्रस्ताव पर बहस के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया था. एक दिन पहले कांग्रेस की ओर से तरुण गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की थी.

बीजेपी की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू पहले वक्ता थे. आज इस चर्चा का दूसरा दिन था. गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब दिया. इसके बाद विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से मतदान कराया गया और यह अविश्वास प्रस्ताव गिर गया. मतदान के बाद पीठासीन जगदंबिका पाल ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.

अमित शाह ने राहुल गांधी के संसद में रिकॉर्ड की खोली पोल!

Loading Ad...

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने विपक्ष के आरोपों का एक-एक कर जवाब दिया. शाह ने न सिर्फ राहुल गांधी को घेरा, बल्कि तथ्यों के साथ उनका रिकॉर्ड भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने अधिकारों के हनन की बात करते हैं, लेकिन जो उनके हाथ में है उसकी जवाबदेही कौन लेगा.

Loading Ad...

इस दौरान शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कहते हैं कि स्पीकर उन्हें बोलने नहीं देते, जबकि सच्चाई यह है कि राहुल गांधी खुद ही बोलना नहीं चाहते. इतना ही नहीं, शाह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी की उपस्थिति और चर्चाओं में भागीदारी का पूरा रिकॉर्ड सदन के सामने रख दिया.

शाह ने राहुल गांधी की विभिन्न लोकसभाओं में उपस्थिति के आंकड़े देते हुए कहा कि,

Loading Ad...
  • 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51% रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 67% था.
  • 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52% रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 80% था.
  • 15वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 43% रही, जबकि औसत उपस्थिति 76% थी.

उन्होंने कहा कि 16वीं लोकसभा में 2014, 2015, 2017 और 2018 में राष्ट्रपति के अभिभाषण में राहुल गांधी ने भाग नहीं लिया.

इसके अलावा 16वीं लोकसभा में उन्होंने बजट पर एक भी चर्चा में हिस्सा नहीं लिया और किसी भी सरकारी विधेयक पर भी चर्चा में भाग नहीं लिया.

शाह ने आगे कहा कि 17वीं लोकसभा में 2019, 2020 और 2021 में भी राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में हिस्सा नहीं लिया.

Loading Ad...

इसी तरह 2019, 2020, 2022 और 2023 के केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया.

एक विधेयक को छोड़कर वे लगभग किसी भी विधेयक पर चर्चा में शामिल नहीं हुए.

18वीं लोकसभा में भी उन्होंने केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग नहीं लिया. 

Loading Ad...

यहां तक कि चार दशक बाद स्पीकर के खिलाफ आए इस अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया.

अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने देश के कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधेयकों पर भी चर्चा में भाग नहीं लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • तीन तलाक विधेयक
  • भूमि अधिग्रहण विधेयक
  • 122वां संविधान संशोधन
  • आधार प्रणाली
  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक
  • अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का प्रस्ताव
  • CAA
  • महामारी रोग संशोधन विधेयक
  • पूरा शीतकालीन सत्र
  • तीन नए न्याय संहिता कानून 
  • आईटी सुधार और वित्त विधेयक 2024
  • वक्फ संशोधन विधेयक
  • वंदे मातरम् पर चर्चा
  • कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अभिनंदन प्रस्ताव पर चर्चा

इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है. करीब चार दशक बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है. यह संसदीय राजनीति और सदन दोनों के लिए अफसोसजनक घटना है, क्योंकि स्पीकर किसी दल के नहीं, बल्कि पूरे सदन के होते हैं. वे सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक भी होते हैं.

Loading Ad...

उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे तय किए गए थे, लेकिन इससे भी ज्यादा समय तक बहस चली. लगभग 13 घंटे तक सदन में चर्चा हुई और 42 से अधिक सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया.

अमित शाह ने कहा कि जब स्पीकर की नियुक्ति हुई थी, तब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने उन्हें एक साथ आसन तक पहुंचाया था. इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्व निभाने के लिए पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिलता है. आज उनके फैसलों से असहमति हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों के अनुसार स्पीकर का निर्णय अंतिम माना जाता है. इसके बावजूद विपक्ष ने उनकी निष्ठा पर सवाल उठाया है.

यह भी पढ़ें

उन्होंने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है. न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में हमारे लोकतंत्र की प्रतिष्ठा है. जब इस पंचायत के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की छवि पर पड़ता है. यही वजह है कि आम तौर पर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जाता.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...