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'ऑपरेशन शील्ड' स्थगित, जानिए क्यों टल गया सीमावर्ती राज्यों का मॉक ड्रिल मिशन

केंद्र सरकार द्वारा सीमावर्ती राज्यों में 29 मई को प्रस्तावित 'ऑपरेशन शील्ड' नामक मॉकड्रिल को प्रशासनिक कारणों से स्थगित कर दिया गया है. गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और चंडीगढ़ में यह नागरिक सुरक्षा अभ्यास हवाई हमले और ब्लैकआउट जैसे आपातकालीन हालात की तैयारियों के लिए होना था.

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देश की सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को परखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित मॉकड्रिल ‘ऑपरेशन शील्ड’ को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. यह मॉकड्रिल 29 मई को गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित होने वाली थी. मगर अब प्रशासनिक कारणों से इसे अगली सूचना तक टाल दिया गया है. गृह मंत्रालय द्वारा सभी सिविल डिफेंस कंट्रोलर्स और संबंधित विभागों को इस बारे में औपचारिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि मॉकड्रिल की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी.

क्यों अहम था ‘ऑपरेशन शील्ड’?

‘ऑपरेशन शील्ड’ को नागरिक सुरक्षा के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभ्यास माना जा रहा था. इसका उद्देश्य था सीमावर्ती राज्यों में आपदा के समय नागरिकों और प्रशासन की सामूहिक प्रतिक्रिया को परखना. इस अभ्यास के दौरान ब्लैकआउट, हवाई हमले जैसी स्थितियों को मॉक तरीके से दोहराकर देखा जाना था कि किस तरह से नागरिक, सुरक्षाकर्मी, और प्रशासन एक साथ मिलकर संकट से निपट सकते हैं. इसके अलावा इमरजेंसी एग्जिट, प्राथमिक उपचार और संचार व्यवस्था की भी जांच की जानी थी. इस मॉकड्रिल में एनसीसी, एनएसएस, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स तथा एनवाईकेएस जैसे संगठनों के युवा स्वयंसेवकों को भी शामिल किया गया था.

किन राज्यों में होना था अभ्यास?

गृह मंत्रालय के अनुसार यह मॉकड्रिल सीमावर्ती राज्यों – गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा सहित केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के कई जिलों में शाम 5 बजे से आयोजित होनी थी. मगर अब इन सभी क्षेत्रों में मॉकड्रिल रोक दी गई है. खासकर जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में इसकी पूरी तैयारी थी, जिसे अब अचानक स्थगित कर दिया गया है. राजस्थान गृह विभाग और गुजरात सूचना विभाग ने भी इस निर्णय की पुष्टि कर दी है. चंडीगढ़ प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि गुरुवार को अब कोई अभ्यास या ब्लैकआउट नहीं होगा.

हालांकि सरकार ने आधिकारिक रूप से स्थगन के पीछे का कारण “प्रशासनिक कारण” बताया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अभ्यास को लेकर कुछ ज़मीनी तैयारियां अधूरी थीं. साथ ही, मौजूदा संवेदनशील हालात और सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता के बीच सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी अभ्यास बिना पूरी सुरक्षा व्यवस्था के न हो. यह संभव है कि आगामी कुछ दिनों में ऑपरेशन शील्ड की संशोधित रूपरेखा के साथ नई तारीख जारी की जाए.

क्या है मॉकड्रिल का असली मकसद?

इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों के प्रति जागरूक करना था. किसी भी राष्ट्रीय संकट, युद्धकालीन स्थिति या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कैसे सुरक्षित रहना है, कैसे प्रशासन का सहयोग करना है. ये सब इस मॉकड्रिल के जरिए सिखाया जाना था. नागरिक सुरक्षा वॉर्डन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन मिलकर यह अभ्यास करने वाले थे, जिससे हर स्तर पर तैयारियों की समीक्षा हो सके.

अब देशभर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ‘ऑपरेशन शील्ड’ के लिए अगली तारीख कब घोषित की जाएगी. जानकारों का मानना है कि अभ्यास की रूपरेखा में कुछ बदलाव कर के इसे जून के पहले सप्ताह में फिर से आयोजित किया जा सकता है. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस तरह की मॉकड्रिल न केवल प्रशिक्षण का माध्यम हैं, बल्कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा भी हैं. बदलती वैश्विक परिस्थितियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए, इस तरह के अभ्यास भविष्य में और भी अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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