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'CAA के तहत सिर्फ 3 लोगों को मिली भारत की नागरिकता...', सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा खुलासा, कहा - 25 लाख का फर्जी शोर मचाया गया

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि प्रदेश में अब तक केवल 3 लोगों को CAA कानून के तहत नागरिकता मिली है. राज्य में नागरिकता प्राप्त करने के लिए कुल 12 आवेदन प्राप्त किए गए थे, इनमें 3 लोगों को मंजूरी मिल चुकी है. वहीं 9 लोगों के नाम अभी विचाराधीन है.

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को प्रदेश के लिए एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा है कि अब तक असम में नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 के तहत सिर्फ 3 विदेशी नागरिकों को ही भारत की नागरिकता दी गई है. बता दें कि पिछले कुछ समय से इस तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं कि लाखों विदेशी असम में इस कानून के तहत नागरिकता हासिल कर चुके हैं. ऐसे में असम के मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत कर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया. 

CAA के तहत असम में केवल 3 नागरिकों को मिली नागरिकता

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि प्रदेश में अब तक केवल 3 लोगों को CAA कानून के तहत नागरिकता मिली है. सरमा ने बताया कि 'राज्य में नागरिकता प्राप्त करने के लिए कुल 12 आवेदन प्राप्त किए गए थे, इनमें 3 लोगों को मंजूरी मिल चुकी है. वहीं 9 लोगों के नाम अभी विचाराधीन है.' असम में सिर्फ 3 नाम को मंजूरी मिलने के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य में CAA का प्रभाव शुरुआती अटकलों की तुलना में कहीं अधिक सीमित रहा है.

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'नागरिकता को लेकर बहुत लोगों ने शोर मचाया'

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असम के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'राज्य में नागरिकता को लेकर काफी शोर मचाया गया कि 20 से 25 लाख लोगों ने आवेदन किया है और सभी लोगों को नागरिकता मिल जाएगी, ऐसे में बताना चाहेंगे कि केवल 12 आवेदन आए हैं. क्या इस पर चर्चा करना बनता है? 

CAA कानून के तहत नागरिकता पाने वाले पहले व्यक्ति

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असम में CAA कानून के तहत नागरिकता पाने वाले पहले लाभार्थी 50 वर्षीय दुलोन दास बने, जिन्हें अगस्त 2024 में भारतीय नागरिकता मिली है. वह प्रदेश में इस कानून के तहत नागरिकता पाने वाले पहले व्यक्ति बने हैं. 

क्या है CAA कानून? 

बता दें कि CAA का पूरा मतलब नागरिकता संशोधन अधिनियम है. इस कानून का उद्देश्य हिंदू, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदाय के उन शरणार्थियों को नागरिकता देना है, जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आए हों. हालांकि, इस कानून के तहत उनका प्रवेश भारत में 31 दिसंबर 2014 से पहले होना चाहिए. इस कानून के तहत नागरिकता पाने के लिए भारत में कम से कम उनका 5 वर्ष का निवास पूरा होना जरूरी है. 

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2019 में संसद से पारित हुआ था यह कानून

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बता दें कि CAA कानून दिसंबर 2019 में संसद से पारित हुआ था, लेकिन इसे 11 मार्च 2024 को लागू किया गया, जब इसके नियम अधिसूचित किए गए. केंद्र ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया है कि गैर-मुस्लिम अवैध प्रवासियों के मामलों को फिलहाल विदेशियों के न्यायाधिकरण (FTS) को न भेजा जाए, जब तक कि उनके नागरिकता आवेदन पर फैसला नहीं हो जाता.

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