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'2025 में सिर्फ 3 हादसे हुए...', रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन दुर्घटना में आई गिरावट पर कहा - यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए

अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि 'भारतीय रेलवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और समय-समय पर किए गए सुरक्षा उपायों के चलते ट्रेन हादसों में भारी गिरावट आई है. वर्ष 2014-15 में जहां 135 हादसे हुए थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर 31 रह गई है. इसके अलावा साल 2025-26 में जून 2025 तक केवल 3 हादसे हुए हैं'

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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में साल 2004 से लेकर 2014 कांग्रेस सरकार और फिर 2015 से 2025 तक के बीच हुई कुल ट्रेन दुर्घटनाओं की रिपोर्ट साझा की. इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा के लिए किस तरह के ठोस कदम उठाए जा रहे और भारतीय रेलवे टेक्नोलॉजी का किस तरीके से इस्तेमाल कर रही है. यह सभी खास जानकारी उन्होंने दी है. 

'2014-15 में 135 ट्रेन हादसे हुए'

अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि 'भारतीय रेलवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और समय-समय पर किए गए सुरक्षा उपायों के चलते ट्रेन हादसों में भारी गिरावट आई है. वर्ष 2014-15 में जहां 135 हादसे हुए थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर 31 रह गई है. इसके अलावा साल 2025-26 में जून 2025 तक केवल 3 हादसे हुए हैं'

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'2004 से 2014 तक कुल 1,711 ट्रेन हादसे हुए थे'

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केंद्रीय मंत्री ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आगे बताया कि 'साल 2004 से 2014 के दौरान कुल 1,711 ट्रेन हादसे हुए थे, यानी वार्षिक औसत 171 हादसे का था, जो अब घटकर रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए हैं. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे द्वारा कई कदम उठाए गए हैं. इसके तहत 6,635 स्टेशनों पर इलेक्ट्रिकल /इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई है. जिससे पॉइंट और सिग्नल के केंद्रीकृत संचालन के जरिए मानवीय गलतियों से होने वाले हादसों में कमी आई है.'

'11,096 लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर इंटरलॉकिंग की सुविधा'

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उन्होंने आगे बताया कि '11,096 लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर इंटरलॉकिंग की सुविधा प्रदान की गई है, जिसके चलते रेल फाटकों पर सुरक्षा बढ़ी है. 6,640 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग की गई है, ताकि ट्रैक पर ट्रेन की उपस्थिति की पुष्टि इलेक्ट्रॉनिक रूप से की जा सके. जुलाई 2020 में राष्ट्रीय ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के रूप में अपने नई 'कवच' तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. इसके अलावा यह अब तक कई मार्गों में लागू हो चुकी है. वहीं दिल्ली-मुंबई व दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर इसके लिए काम जारी है.'

'सभी इंजनों में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस'

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वैष्णव ने आगे यह भी बताया कि 'सभी इंजनों में 'विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस' लगाए गए हैं. ताकि लोको पायलटों की सतर्कता सुनिश्चित की जा सके. कोहरे के मौसम में कम दृश्यता के दौरान चालक दल को सतर्क करने के लिए ओएचई मास्ट पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए गए हैं. सुरक्षा के लिए जीपीएस आधारित 'फॉग सेफ्टी डिवाइस' कोहरे से प्रभावित क्षेत्रों में लोको पायलटों को दिए गए हैं. जिससे वह सिग्नल और लेवल क्रॉसिंग गेट जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की दूरी जान सकते हैं.'

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